हर एक परिवार से कम से कम एक व्यक्ति को प्रदर्शन में दिल्ली पहुँचने का फरमान दिया गया है। ऐसा न करने पर जुर्माने और गाँव-समाज से बहिष्कार की धमकी दी गई है।
वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।