अपने इस फर्जी सूचना वाले ट्वीट में राजदीप ने केवल छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को ही भ्रमित नहीं किया। बल्कि ये भी बताना चाहा कि स्थानीय नेता और अपराधिक गैंग मिलकर हिंसा कर रहे हैं, जिससे नागरिक प्रताड़ित हो रहे हैं।
“अगर झूठे वादे करने की देश में कोई प्रतियोगिता होती, तो केजरीवाल को निश्चित रूप से पहला पुरस्कार मिलेगा। मैं केजरीवाल को याद दिलाने के लिए आया हूँ कि आप तो अपने किए गए वादों को भूल गए, लेकिन न तो दिल्ली की जनता और न ही भाजपा कार्यकर्ता भूले हैं। आपके पास शायद इसकी सूची नहीं है, लेकिन मेरे पास है।”
राजदीप ने गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान को CAA के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अपने शो में आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्होंने रबर स्टाम्प बता गवर्नर को नीचा दिखाने की कोशिश की। जवाब में खान ने उनकी भाषा को अभद्र बताते हुए क्लास लगाई।
बात 2006 की है। नए-नए खुले IBN7 और CNN-IBN को किसी सनसनीखेज स्टोरी की तलाश थी। राजदीप उसके चीफ एडिटर थे। TRP के लिए इन्होंने रिपोर्टर जमशेद खान से एक फर्जी स्टिंग करवाया डॉ अग्रवाल का। खबर यह बनाई कि डॉक्टर भीख माँगने वाले गिरोह के लिए बच्चों का हाथ-पैर काटते हैं। जाँच में ऐसा कुछ नहीं निकला लेकिन...
मामला शोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर से जुड़ा है। राजदीप ने एक IPS पर सनसनीखेज आरोप लगाए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई। प्रेस की स्वतंत्रता की दुहाई दी। राहत नहीं मिली तो माफी माँग जान बचाई।
2029 में मोदी चौथी बार PM बनेंगे और फिर राष्ट्रपति। भारत हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा। दक्षिण भारत विद्रोह कर देगा, नॉर्थ-ईस्ट हाथ से निकल जाएगा और कश्मीर चला जाएगा। राजदीप ने झूठ और कल्पना के सहारे 'डर' तैयार किया है। इस मीठे ज़हर से बच कर रहिए।
CAA विरोध में सिर्फ़ तिरंगा और महात्मा गाँधी की तस्वीर लेकर लोग चल रहे? सब कुछ शांति से हो रहा? देश में कहीं कोई दंगा नहीं? प्रोपेगेंडा पत्रकार राजदीप ने तो यही कहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें उनकी औकात बता दी गई - फोटो, वीडियो के साथ, प्रमाण देकर।
राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट कर कहा है कि कॉन्ग्रेस और जेडीएस अभी भी गुटबाजी में फॅंसी है। उन्होंने पैसे और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल से नतीजों पर असर डाले जाने की बात भी कही है।
राजदीप सरदेसाई कॉन्ग्रेस परिवार के प्रति वफ़ादार रहे हैं। इस साल फरवरी में, उन्होंने इंडिया टुडे टीवी में अपने एक शो के दौरान वाड्रा को बेगुनाह साबित करने पर तुले नज़र आए। उन्होंने अपने कार्यक्रम में यह दावा किया था कि......
राजदीप सरदेसाई के इस बदले सुर से सभी हैरान हैं। अपनी ही बात से पलट गए हैं। पहले उन्होंने जल्दी सुनवाई ख़त्म करने का स्वागत किया था, अब वह पूछ रहे हैं कि इतनी जल्दी भी क्या है? उन्होंने गिरगिट की तरह रंग बदला है। राजदीप जजों को ही खरी-खोटी सुनाने लगे।