Saturday, July 31, 2021
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केरल के गवर्नर को राजदीप सरदेसाई ने बताया ‘भाजपा एजेंट’, अपने ही टीवी शो में हो गए ज़लील

सरदेसाई ने केरल के राज्यपाल का न सिर्फ़ अपमान किया बल्कि लाइव शो में उन्हें भाजपा का एजेंट बता उनके प्रति अपनी व्यक्तिगत घृणा भी व्यक्त की। लाइव शो के विषय को हिन्दू-मुस्लिम मुद्दा बनाने को लेकर गवर्नर ने राजदीप को फटकार भी लगाई।

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) पारित होने के बाद से ही विवाद का मुद्दा रहा। इसके ख़िलाफ़ देशभर में जगह-जगह हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए। इस मुद्दे पर ‘लिबरल गैंग’ भी छटपटा रहा है, जो अपनी भड़ास किसी न किसी रूप में निकालता रहता है। इसी कड़ी में, फर्ज़ी ख़बरों के प्रचारक राजदीप सरदेसाई ने गुरुवार (16 जनवरी) को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को CAA के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अपने शो में आमंत्रित किया। इस दौरान उन्होंने केरल के राज्यपाल को ‘भाजपा का एजेंट’ और ‘रबर स्टाम्प’ तक कह डाला। जवाब में आरिफ मोहम्मद ने भी उनकी जमकर क्लास ली।

दरअसल, नागरिकता संशोधन क़ानून को लागू करने के केंद्र के फ़ैसले को लेकर कम्युनिस्ट शासित राज्य केरल में सरकार और राज्यपाल के बीच विवाद चल रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच CAA के ख़िलाफ़ केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई। राज्यपाल ख़ान ने केरल सरकार को इस बात के लिए फ़टकार लगाई थी कि CAA को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से पहले उनकी सलाह क्यों नहीं ली गई।

राजदीप सरदेसाई ने केरल विवाद पर अपने शो का प्रीमियर करते हुए, आरिफ मोहम्मद खान को ‘रबर स्टाम्प’ कहकर उनका अपमान किया। शो के दौरान सरदेसाई ने दावा किया कि राज्य सरकार द्वारा CAA के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से पहले उन्हें (खान) दरकिनार कर दिया गया था, इसलिए वो राज्य सरकार से नाराज़ थे।

राज्यपाल ने राजदीप सरदेसाई के दावे पर पलटवार करते हुए सम्मानपूर्वक कहा कि वो किसी से नाराज़ नहीं थे। उन्होंने कहा कि वह संवैधानिक रूप से राज्य के प्रमुख हैं और राज्य सरकार को सलाह देना उनका अधिकार है। आरिफ मोहम्मद खान ने सवालिया लहजे में पूछा, “अगर राज्य सरकार मुझे बताए बिना सुप्रीम कोर्ट में चली जाती है, तो मैं अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग कैसे करूँ?”

इसके अलावा, राज्यपाल खान ने देश की संसद द्वारा पारित क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित करने के लिए भी केरल सरकार को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यह मसला राज्य के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। खान ने कहा, “कानून का विरोध करने के लिए राज्य सरकार ने जो समय और धन खर्च किया उसका उपयोग प्रदेश के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए न कि अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए।”

राजदीप सरदेसाई ने चिड़चिड़ाते हुए पूछा कि क्या आरिफ मोहम्मद खान केरल सरकार के ख़िलाफ़ जाकर अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे थे? खान ने इसके जवाब में कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दे पर राज्य सरकार को सलाह देना उनका संवैधानिक अधिकार है और राज्य सरकार राज्यपाल से कोई जानकारी छिपा नहीं सकती।

शो के दैरान राजदीप सरदेसाई ने राज्यपाल खान को ‘रबर स्टाम्प’ कहकर उनका अपमान करना जारी रखा, इस पर खान ने गहरी आपत्ति जताई। सरदेसाई ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को ‘भाजपा एजेंट’ बताया और CAA के मुद्दे पर एक अलग रुख़ अपनाने के लिए उन पर हमला किया।

राजदीप सरदेसाई की असम्मानजनक टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि पत्रकार के तौर पर उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा अभद्र है। भाजपा का एजेंट कहे जाने पर खान ने कहा कि उनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति ने की थी न कि भाजपा ने।

सवाल पूछने की आड़ में, सरदेसाई ने केरल के राज्यपाल का न सिर्फ़ अपमान किया बल्कि लाइव शो में उन्हें भाजपा का एजेंट कहकर उनके प्रति अपनी व्यक्तिगत घृणा भी व्यक्त की। इस लाइव शो के विषय को हिन्दू-मुस्लिम मुद्दा बनाकर देश की जनता के बीच धार्मिक विभाजन पैदा करने की कोशिश करने पर मोहम्मद आरिफ खान ने राजदीप सरदेसाई की क्लास भी लगाई।

बता दें कि आरिफ मोहम्मद खान और CAA के लिए उनके समर्थन को बदनाम करने वाले सरदेसाई ने CAA के ख़िलाफ़ हो रहे जानलेवा विरोध-प्रदर्शनों को ’शांतिपूर्ण’ बताकर फ़र्ज़ी दावे किए थे। जबकि सच्चाई यह है कि CAA के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे मुस्लिम, संसद द्वारा कानून पारित किए जाने के बाद से ही उग्र हो गए थे। मुस्लिम मॉब ने शहरों को जला दिया और बड़े पैमाने पर हिंसा की।अप्रत्याशित रूप से, राजदीप सरदेसाई ने मुस्लिम भीड़ के कृत्यों को शांतिपूर्ण रवैया बताकर उनके अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश की।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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