फालतू डिस्क्लेमर डाल कर पौराणिक पात्रों का मजाक बनाने वाला 'न्यूजलॉन्ड्री' क्या इस्लाम, जन्नत, 72 हूरों और दारू की नदी पर व्यंग्य करेगा? यहाँ तो तथ्य कहने पर 'सर तन से जुदा' हो जाता है, सोचिए व्यंग्य पर क्या होगा।
"पापा का लगभग हर दिन सिर जोर से दर्द करने लगता था। वो दर्द से चीखने लगते थे। कई बार तो बेहोश भी हो जाते थे। इसी वजह से उन्हें कहीं अकेले नहीं भेजा जाता था।"