विषय: The Wire

क्या मोदी के खिलाफ हो जाना कोई लाइसेंस है अपराध करने का?

‘द वायर’ वालो, ‘मोदी-विरोधी’ होने से गबन और क़त्ल करने का लाइसेंस नहीं मिलता

अब ये कातिलों से लेकर गबन के आरोपियों का बचाव केवल इस आधार पर करना चाहते हैं कि फलाना मोदी के खिलाफ बोला था, ‘एंटी-RSS’ था, तो अगर इसे जेल भेजा गया तो सरकार के खिलाफ बोलने वालों में ‘डर का माहौल’ बन जाएगा।
पत्रकारिता के समुदाय विशेष को नई 'ट्रिक' ढूँढ़नी होगी लोगों को ठगने के लिए- जनता सयानी हो रही है।

‘मोदी ने विज्ञापन रोका’ वाली फ़र्ज़ी खबर ‘सूत्रों के हवाले से’ फैला रहा है पत्रकारिता का समुदाय विशेष

प्रोपेगेंडा-पर-प्रोपेगेंडा फैलाते रहना, बार-बार पकड़े जाते रहना, शर्मिंदा होना- अगर यही बिज़नेस मॉडल है तो बात दूसरी है, वरना वायर वालों को बाज आ जाना चाहिए।
आरिफ़ मुहम्मद खान और आरफा खानम शेरवानी

आरिफ मुहम्मद ने ‘हिन्दू राष्ट्र, डरा हुआ मुस्लिम, तीन तलाक़’ पर Wire को दिखाया आईना, जो ‘डरे हुए मीडिया गिरोह’ को देखने की जरूरत है

हिन्दू राष्ट्र और नागरिकता के सवाल पर आरिफ मुहम्मद ने वायर की पत्रकार को जवाब देते हुए कहा कि यह विचार केवल दूसरे धर्मों में है। खासतौर से मुसलमानों में जहाँ अहमदिया, बरेलवी, देवबंदी, शिया, सुन्नी सब एक दूसरे को दोयम दर्जे का मानते हैं या ख़ारिज करते हैं। हिंदुत्व में दूसरे दर्जे के नागरिक का कोई विचार नहीं है। यहाँ कोई भी 'धिम्मी' नहीं होता और किसी को भी 'जजिया' के लिए नहीं कहा जाता।

‘द वायर’ ने बर्खास्त, बेआबरू पुलिस अफसर संजीव भट्ट की उम्रकैद में भी घुसा दी अपनी मोदी-घृणा

प्रोपेगेंडा पोर्टल 'द वायर' बड़ी चालाकी से अपने हैडलाइन में ऐसे शब्द लिखता है जैसे कोर्ट ने अपराधी संजीव भट्ट को उम्र कैद की सजा उसके 30 साल पुराने अपराध के कारण नहीं बल्कि 'मोदी के गुजरात दंगों शामिल' होने की बात कहने के लिए दिया गया है।
दिल्ली मेट्रो

फ़र्ज़ी समाजशास्त्र के बाद अब झोलाछाप अर्थशास्त्र भी पढ़ाएगा The Wire, मेट्रो पर बाँटा ज्ञान

यह लेख वायर ही नहीं, सभी वामपंथी-चरमपंथियों में बढ़ती हुई खीझ की नुमाईश है। इनका प्रोपेगैंडा धराशायी हो जाने से इनके दिमागों के फ्यूज़ बुरी तरह जल गए हैं।
द वायर प्रोपगंडा

गुरुग्राम मुस्लिम युवक के दावे झूठ साबित होने के बावजूद ‘The Wire’ उसे लेकर फैला रहा ज़हर

'द वायर' ने गुरुग्राम की फेक दावों वाली ख़बर का सच सामने आने के बावजूद उसे लेकर 'डर का माहौल' वाला प्रोपेगैंडा फैलाना जारी रखा। न मुस्लिम की टोपी फेंकी गई, न शर्ट फाड़ी गई और न 'जय श्री राम' बोलने को कहा गया, फिर भी 'द वायर' झूठ फैला रहा है।
द वायर

एक सौ सोलह ‘वायर’ के लेख… चुनावी रिपोर्टिंग में वायर का हर विश्लेषण गलत

यह महज़ संयोग है या फिर साज़िशन ऐसा किया गया? क्या 'द वायर' की पोलिटिकल रिपोर्टिंग वाक़ई बकवास और अनुभवहीन है, या जान-बूझ कर चुनावों को प्रभावित करने के लिए ऐसे लेख लिखे गए?
द वायर

मोदी जीत भी गए तो भारत बँटा हुआ ही रहेगा: The Wire ने उगला जहर

लेखक ने आरोप लगाया कि अगले कुछ वर्षों में भारत पर वैष्णव शाकाहार थोप दिया जाएगा। हालाँकि, इसके लिए उन्होंने कोई बैकग्राउंड नहीं दिया। रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों के भाजपा में शामिल होने को लेकर भी इस लेख में नाराज़गी जताई गई है। कहा गया है कि सैन्य अधिकारी समझते हैं कि एक ही पार्टी उनके लिए काम कर रही है और उनका भाजपा में शामिल होना अशुभ है।

‘द वायर’ पर गाय और आतंकी में अंतर नहीं! कश्मीर में आतंकी रहने तक चुनाव न हों!

गाय की मौत पर इकट्ठा होने वाले संवेदनशील गाँव उस बच्चे को पहली ही बार बहकने पर, इकट्ठा होकर क्यों नहीं समझाने आया कि बेटा, हथियार मत उठाओ? तब आपके गाँव की संवेदना और नैतिकता कहाँ थी! और आप एक गाय को बीच में ले आते हैं? क्या गाय ने किसी पर ग्रेनेड फेंका था
वही फोटो जो द वायर ने लगाया- क्योंकि हर यज्ञ हर हिन्दू के लिए पवित्र है, असुरों के विरुद्ध रक्षणीय है

हिन्दूफ़ोबिक द वायर, मंदिर में पूजा-पाठ और यज्ञ-हवन ही होते हैं

सेक्युलर प्रोजेक्ट के तहत सरकारें मंदिरों की मलाई काटने की तो हक़दार हैं पर उनसे उम्मीद यह की जाती है कि वे पूजा-पाठ में सीधा-सीधा विघ्न उत्पन्न करें।
प्रोपेगैंडा पोर्टल 'द वायर' का लोगो

‘द वायर’ के हिसाब से भारतीय हिन्दू ही आतंकी हैं जिन्होंने मुसलमानों पर हिंसा की है! हाउ क्यूट!

मतलब, संकट मोचन मंदिर से लेकर लोकतंत्र के मंदिर संसद तक हमले में मरने वाले अधिकतर लोग हिन्दू ही होते हैं (क्योंकि जनसंख्या ज्यादा है और टार्गेट पर भी वही होते हैं) और मारने वाले हर बार मुसलमान होते हैं, फिर भी असली हिंसा तो गौरक्षकों द्वारा गौतस्करों को सरेराह पीट देना है।
आरफ़ा जी, नवाब साहब पैदा होने के सैकड़ों साल पहले से ज़मीनें बाँट रहे थे?

फैक्ट चेक: गोरखनाथ मंदिर के बारे में ‘द वायर’ की पत्रकार ने फैलाया फेक न्यूज़, ट्विटर पर छिड़ा घमासान

आरफ़ा खानम के ट्वीट एक नैरेटिव बुनने के लिए था- हिन्दुओं को मानसिक रूप से दबाने और इस्लामी संप्रभुता को अपने ऊपर स्वीकार कर लेने का नैरेटिव।

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