Homeरिपोर्टमीडिया'The Wire' के संस्थापक और संपादक के घर दिल्ली पुलिस का छापा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों...

‘The Wire’ के संस्थापक और संपादक के घर दिल्ली पुलिस का छापा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की हो रही जाँच: फर्जी स्टोरी चला कर अमित मालवीय को किया था बदनाम

‘The Wire’ ने अमित मालवीय को निशाना बनाते हुए झूठी ख़बरें प्रकाशित की थीं, जिन्हें उसे वापस लेना पड़ा था।

वामपंथी न्यूज वेबसाइट ‘‘The Wire’ भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ अपनी फर्जी रिपोर्टिंग के लिए चौतरफा घिर चुकी है । इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच वेबसाइट के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और एमके वेणु के घरों की तलाशी कर रही है। पुलिस उनके घरों में विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जाँच की जा रही है। वहीं समाचार एजेंसी एएनआई ने भी ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

मालवीय ने मेटा रिपोर्ट (अब वापस ली गई) को लेकर एफआईआर दर्ज करवाई थी, जिसके बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। मालवीय ने ‘The Wire’ के विरुद्ध शनिवार (29 अक्टूबर 2022) को दिल्ली पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। ‘The Wire’ ने अमित मालवीय को निशाना बनाते हुए झूठी ख़बरें प्रकाशित की थीं, जिन्हें उसे वापस लेना पड़ा था।

इस शिकायत में ‘The Wire’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन, संपादक एमके वेणु और उप-संपादक जाह्नवी सेन का नाम लिखा था। साथ ही IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-420 (धोखाधड़ी), 468 (झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर के साजिश), 469 (झूठे दस्तावेजों के सहारे किसी की मानहानि करना), 471 (जानबूझ कर झूठे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों का इस्तेमाल करना) और 500 (मानहानि) के अलावा 134B (आपराधिक साजिश) और (समान इरादे से सामूहिक अपराध) के तहत मामला दर्ज करने की माँग की गई थी।

अमित मालवीय ने खुद को भाजपा की ‘इन्फॉर्मेशन एवं टेक्नोलॉजी सेल’ का राष्ट्रीय संयोजक बताते ‘फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म’ नामक संगठन का नाम भी अपनी शिकायत में लिया था, जो ‘The Wire’ को चलाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के लिए ठगी और धोखाधड़ी का सहारा लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स और फेक दस्तावेजों के सहारे उनकी मानहानि की गई है।

दरअसल वामपंथी वेबपोर्टल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया, जिसमें दावा किया था कि अमित मालवीय इतने शक्तिशाली हैं कि फेसबुक या इंस्टाग्राम पर कोई पोस्ट अच्छा न लगने पर उसे तुरंत हटवा सकते हैं। हालाँक‍ि, ‘Meta’ के कम्युनिकेशंस हेड एंडी स्टोन ने इस पूरी खबर को बनावटी करार दिया था। उन्होंने कहा था कि बनावटी दस्तावेजों के आधार पर ‘The Wire’ ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है। एक अज्ञात सूत्र के आधार पर ‘The Wire’ ने दावा किया था कि अमित मालवीय ने सोशल मीडिया से 705 पोस्ट्स हटवाएँ हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -