अदालत ने कहा कि धार्मिक विश्वास नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और धार्मिक विश्वासों को कमजोर करने या अपमानित करने का कोई भी कार्य धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता का "गंभीर अपमान" है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने 22 मार्च 2024 को ये फैसला सुनाया, उन्होंने कहा कि कन्यादान हिंदू विवाह की अनिवार्य शर्त नहीं है।