लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना के लिए हमेशा स्थान रहेगा और परंपरा के अनुसार विपक्ष प्रधानमंत्री के भाषण को एक निरुत्साह वाला भाषण भी बता सकता है पर एक आम भारतीय के लिए उनका संबोधन आशा देता है और उसे प्रेरित भी करता है।
साल 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद विदेशों से 41 कलाकृतियों को वापस भारत लाया गया है। ये अब तक लौटाई गई कुल विरासतों का 75 फीसदी से भी अधिक है।