अपहरण के बाद आरोपित इज़मुल/नजमुल ने नाबालिग लड़की का चित्र साझा किया था। जिसमें लड़की के सिर पर सिंदूर लगा हुआ था और गले में माँ दुर्गा का लॉकेट था। अपहरण के बाद यह नज़मुल का पहला फेसबुक पोस्ट था।
अजय राय को शिक्षकों के पदों पर फर्जी नियुक्तियों में शामिल लोगों का पर्दाफाश करने का काम सौंपा गया था। इसके वजह से घोटालेबाजों ने उनकी सरेआम हत्या करवा दी।
कोर्ट ने कहा कि सभी बातों से ये मालूम होता है कि मुंबई पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 174 के तहत जो जाँच की, वह निश्चित कारण के लिए बहुत सीमित थी। इस केस को अपराध की धारा 157 के तहत नहीं जाँचा गया।
शेखर गुप्ता की वेबसाइट पर प्रकाशित लेख में कहा गया है कि 'विषाक्त' बिहारी परिवारों में बच्चों पर श्रवण कुमार बनने की जिम्मेदारी होती है। बिहारी रवीश कुमार प्रदेश के अपमान पर चुप हैं।