वाराणसी की ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में जुमे की नमाज अदा करने के लिए बड़ी संंख्या में लोग पहुँच गए। परिसर के अंदर जगह नहीं होने के बाद गेट बंद करने पड़े।
पूर्व एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा की रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्ञानवापी की पश्चिमी दीवार पर शेषनाग और हिंदू देवी-देवताओं की कलाकृति साफ नजर आ रही है।
मंदिर के तोड़े जाने का एक महत्वपूर्ण प्रमाण 'मा-असीर-ए-आलमगीरी’ नाम की पुस्तक भी है। यह पुस्तक औरंगज़ेब के दरबारी लेखक सकी मुस्तईद ख़ान ने 1710 में लिखी थी।