Homeवीडियोक्या हाथरस केस 'ऑनर किलिंग' का मामला है?| Ajeet Bharti on honour killing angle...

क्या हाथरस केस ‘ऑनर किलिंग’ का मामला है?| Ajeet Bharti on honour killing angle in Hathras case

अभी तक सामने आए सबूत इस मामले में यही इशारा कर रहे हैं कि यह गैंगरेप की घटना नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत आपसी रंजिश से हुई। फिर चाहे फॉरेंसिक रिपोर्ट्स को देखा जाए, चाहे तो मृतका की माँ के शुरूआती बयान को सुना जाए या स्थानीय मीडिया की कवरेज से इसका आँकलन किया जाए।

हाथरस केस में लगातार नई बातें निकलकर सामने आ रही हैं। गाँव वालों की प्रतिक्रिया, परिजनों के बयान, स्टिंग ऑपरेशन से हो रहे खुलासे, मिलाकर सबकुछ इस मामले को नया एंगल दे रहे हैं।

अभी तक सामने आए सबूत इस मामले में यही इशारा कर रहे हैं कि यह गैंगरेप की घटना नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत आपसी रंजिश से हुई। फिर चाहे फॉरेंसिक रिपोर्ट्स को देखा जाए, चाहे तो मृतका की माँ के शुरूआती बयान को सुना जाए या स्थानीय मीडिया की कवरेज से इसका आँकलन किया जाए। सबसे बस यही मालूम पड़ रहा है कि केस वो नहीं है जिसे अब तक मीडिया ने परोसा।

आरोपित पक्ष के लोग लगातार इस मामले में जाँच करवाने की बात कर रहे हैं। नार्को टेस्ट की माँग कर रहे हैं। वहीं पीड़ित पक्ष इन सबसे इंकार कर रहा है। आरोपितों ने जेल से पत्र भी लिखा है कि उन्होंने लड़की के साथ कोई गलत काम नहीं किया।

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी, केजरीवाल-मान-सिसोदिया के साथ तस्वीरें: कौन है AAP नेता अशोक ओझा, जो अपनी ही पार्टी के नेताओं को IB के नाम...

अशोक ओझा केवल शहर स्तर का पदाधिकारी नहीं था, बल्कि पार्टी के बड़े नेताओं के साथ सीधा संपर्क रखने वाला और संगठन में पहचान रखने वाला चेहरा था।

जनगणना में मातृभाषा का एक जवाब तय करता है देश का बजट, शिक्षा नीति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व: जानिए उर्दू-अरबी से लेकर 19000 भाषाई पहचान...

लोकतंत्र में संख्या बल ही किसी भी भाषाई समूह की माँगों को मजबूती देता है। बहुभाषी भारत में यह जनगणना तय करती है कि आने वाले समय में सरकारी संसाधन और प्रशासनिक विकास किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
- विज्ञापन -