Homeवीडियोजहरीली जिहादनों-वामपंथनों का 'हिन्दू प्रेम' | Roasting Jihadi-Leftists on Tanishq issue

जहरीली जिहादनों-वामपंथनों का ‘हिन्दू प्रेम’ | Roasting Jihadi-Leftists on Tanishq issue

इंटरनेट के दौर में तनिष्क विज्ञापन पर हुए बवाल ने यह साबित कर दिया कि जिहादी-वामपंथियों का प्रोपगेंडा अब और ज्यादा नहीं चल पाएगा। 'सेकुलर' विज्ञापन को देखने के बाद जो प्रतिक्रिया आई उसके कारण तनिष्क को माफीनामा तक जारी करना पड़ा।

इंटरनेट के दौर में तनिष्क विज्ञापन पर हुए बवाल ने यह साबित कर दिया कि जिहादी-वामपंथियों का प्रोपगेंडा अब और ज्यादा नहीं चल पाएगा। ‘सेकुलर’ विज्ञापन को देखने के बाद जो प्रतिक्रिया आई उसके कारण तनिष्क को माफीनामा तक जारी करना पड़ा।

ये बात और है कि इस माफीनामे की आखिरी पंक्तियों में भी तनिष्क ने अपनी असली ‘मंशा’ को जाहिर कर दिया। ये माफीनामा बिलकुल ऐसा है जैसे हिंदुओं ने उनके ब्रांड का बहिष्कार न किया हो, बल्कि उन पर हमले का ऐलान कर दिया हो।

एनडीटीवी तो इस कल्पना को वास्तविकता बताने पर ही आतुर हो गया और फेक खबर चला दी कि गाँधीधाम में तनिष्क स्टोर पर हमला हुआ है। खास बात देखिए खुद तनिष्क स्टोर के मैनेजर को ही नहीं मालूम था कि वहाँ हमला बोला गया है। बाद में सेकुलर पत्रकार एनडीटीवी के इस कारनामे की सफाई अपने ‘शब्दकोष’ के जरिए देते रहे।

इस बीच जहरीली जिहादनों-वामपंथनों ने भी ‘हिंदूप्रेम’ पर ज्ञान दिया और तनिष्क का बहिष्कार करने वालों के औकात की बात उठाई।

आगे पूरा वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -