Homeराजनीतिमनीष सिसोदिया ने की खुद और अरविंद केजरीवाल की राम-लक्ष्मण से तुलना, छिड़ी राजनीतिक...

मनीष सिसोदिया ने की खुद और अरविंद केजरीवाल की राम-लक्ष्मण से तुलना, छिड़ी राजनीतिक बहस: जंतर-मंतर पर आप ने लगाई ‘जनता की अदालत’

मनीष सिसोदिया ने सीबीआई अधिकारियों को जवाब दिया, "आप लक्ष्मण को राम से अलग करने की कोशिश कर रहे हो। दुनिया में कोई ताकत नहीं जो लक्ष्मण को राम से अलग कर सके।"

आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने खुद की और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तुलना भगवान राम और लक्ष्मण से की। इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बड़ी बहस छिड़ गई है।

मनीष सिसोदिया का बयान तब आया जब वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक सभा में जनता को संबोधित कर रहे थे। इस सभा में उन्होंने बताया कि जेल में रहते समय उनसे सीबीआई ने क्या बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि उन्हें जेल में अधिकारियों द्वारा यह कहने का प्रयास किया गया कि अरविंद केजरीवाल ने उनका नाम दे दिया है, और यदि सिसोदिया भी केजरीवाल का नाम ले लें तो वह बच सकते हैं। इस पर सिसोदिया ने जवाब दिया, “आप लक्ष्मण को राम से अलग करने की कोशिश कर रहे हो। दुनिया में कोई ताकत नहीं जो लक्ष्मण को राम से अलग कर सके।”

इस बयान में सिसोदिया ने खुद को लक्ष्मण और केजरीवाल को राम की तरह प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी और केजरीवाल की 26 साल पुरानी दोस्ती का हवाला देते हुए कहा कि उनका रिश्ता अटूट है, और कोई भी ताकत इसे तोड़ नहीं सकती।

मनीष सिसोदिया ने कहा, “इनकी कोशिश थी कि ये टूट जाए जब बाहर से नहीं टूटा तो अंदर से तोड़ने की कोशिश की। बेशर्मी देखिए इनकी सीबीआई ने कहा कि मनीष सिसोदिया ने केजरीवाल का नाम दिया। मुझे जेल में कहा गया कि देखो केजरीवाल ने आपका नाम ले दिया आप उनका नाम ले दो और आप बच जाओगे। मैं उनसे कहता था आप लक्ष्मण को राम से अलग करने की कोशिश कर रहे हो। दुनिया में किसी में ताकत नहीं जो लक्ष्मण को राम से अलग कर सके। अरविंद केजरीवाल से मेरी 26 साल पुरानी दोस्ती है। वह मेरे राजनैतिक गुरु हैं।”

राम और लक्ष्मण की तुलना न केवल एक व्यक्तिगत रिश्ते को आदर्श बनाने का प्रयास है, बल्कि इससे यह संदेश जाता है कि राजनीति में कुछ नेता खुद को ईश्वर के समान समझते हैं। उन्होंने अपने बयान में यह संकेत दिया कि विपक्ष और जाँच एजेंसियाँ उनकी दोस्ती और राजनीतिक साझेदारी को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन इस तुलना को धार्मिक नजरिए से देखना अलग मुद्दा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।

59 करोड़ अकाउंट्स, लाखों करोड़ की कैपिटल और आखिरी व्यक्ति तक पहुँचता बैंकिंग सिस्टम… फिर क्यों जनधन योजना से सुभाष गर्ग को लगी मिर्ची?

सुभाष गर्ग ने जनधन योजना के 59 करोड़ खातों पर सवाल उठाए, जानिए जीरो बैलेंस, इनएक्टिव अकाउंट्स और DBT से जुड़ी पूरी कहानी।
- विज्ञापन -