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पहलगाम आतंकी हमला का बलूचिस्तान के जाफर एक्सप्रेस हाईजैक से तुलना: न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने चलाया खतरनाक नैरेटिव, The Hindu ने बढ़ाया पाकिस्तानी प्रोपगेंडा

हिंदू और भारतीय संस्कृति से नफरत के लिए पहचाना जाने वाला अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' ने भी खबरों के साथ कलाकारी की है। पहलगाम में नाम और धर्म पूछकर हिंदुओं का नर संहार किया गया और 28 लोगों को सरेआम हत्या कर दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी आतंकी को बख्शा नहीं जाएगा और उनकी उम्मीद से बढ़कर सजा दी जाएगी।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में चुन-चुन कर हिंदुओं के नरसंहार से देश भर में गुस्सा है। इस्लामी आतंकियों ने हिंदुओं से कलमा पढ़वाया, उनके नाम और धर्म पूछा, कुछ को कपड़े भी उतरवाए और इसके बाद सिर्फ पुरुषों को गोली मार दी। मृतकों का पूरा परिवार आतंकित होकर परिवार के सदस्य का नरसंहार होता देखकर रहा। इसके बावजूद ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ इस नरसंहार को अलग दिशा देने की कोशिश की। वहीं, ‘द हिंदू’ अखबार ने भारत के खबरों में पाकिस्तान को तरजीह दी।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के हालिया लेख में एक बेतुकी कहानी को बढ़ावा देकर आतंक को उचित ठहराने का छुपा हुआ प्रयास किया गया है। इस में यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि पहलगाम में भारतीय नागरिकों पर पाकिस्तान का हमला किसी-न-किसी रूप में बलूचिस्तान के क्वेटा में बलूच विद्रोहियों द्वारा जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के अपहरण का ‘प्रतिशोध’ था।

इस लेख की लेखिका नीना गोपाल ने ‘कश्मीरी गर्मी का अंत: क्या पहलगाम जाफर एक्सप्रेस अपहरण का बदला है?’ शीर्षक से लिखा है। इस विचार स्तंभ में तथ्य और मामले की गंभीरता को पीछे छोड़ दिया गया है और झूठी बातों को प्राथमिकता दी गई है। दरअसल, यह पत्रकारिता नहीं है। यह पाकिस्तान की प्रेस विज्ञप्तियों को दोहराना है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस में लिखा गया लेख

दरअसल, झूठे नैतिक समानताओं का बनाकर करके भारत के खिलाफ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को वैध बनाने का एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। बलूचिस्तान में जो लड़ाई है, वह पंजाबी आधिपत्य से खुद को अलग करने की बलूचों की लड़ाई है। हालाँकि, लेख के जरिए पाकिस्तानी सेना द्वारा आंतरिक मामलों में भारतीय हस्तक्षेप के दावों को इसमें सही ठहराने की कोशिश की गई है।

पाकिस्तान हमेशा से बलूचिस्तान के अलगाववादी विद्रोह में भारत का हाथ होने का दावा करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में स्वतंत्रता दिवस के भाषण में बलूचिस्तान का जिक्र किया, तब से पाकिस्तान अपने दावे को और सही ठहराने लगा। हालाँकि, इसके पक्ष में वह आज तक कोई सबूत दुनिया के सामने पेश नहीं कर सका। इसके बजाय वह इस्लामी आतंकियों को प्रश्रय देकर भारत में हमले जरूर करवाता रहा है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस का लेख अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचा सकते हैं। पाकिस्तानी राजनयिकों द्वारा संयुक्त राष्ट्र में इस तरह के लेखों को हाथों-हाथ लेकर लहराया जाएगा और इसे सबूत बताकर पेश किया जाएगा और कहा जाएगा कि भारत आतंकवाद को उचित ठहराता है और पाकिस्तान में दखल देता है। यह लेख देश के लिए एक रणनीतिक मूर्खता है।

‘The Hindu’ का पाकिस्तान प्रेम

वहीं, हिंदू और भारतीय संस्कृति से नफरत के लिए पहचाना जाने वाला अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने भी खबरों के साथ कलाकारी की है। पहलगाम में नाम और धर्म पूछकर हिंदुओं का नर संहार किया गया और 28 लोगों को सरेआम हत्या कर दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी आतंकी को बख्शा नहीं जाएगा और उनकी उम्मीद से बढ़कर सजा दी जाएगी।

इस खबर का हिंदू अखबार के लिए कम महत्व है। उसके लिए ज्यादा महत्व पाकिस्तान की खबरों का है। इसलिए उसने प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी से ऊपर पाकिस्तान की खबर को तरजीह दी। उसने लीड खबर में लिखा, ‘पाकिस्तान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद किया और भारत के साथ अपने व्यापारिक संबंध को तोड़ा’। वहीं, उसके नीचे सिर्फ दो कॉलम में प्रधानमंत्री मोदी के छापा।

अखबार के इस बौद्धिक बदमाशी का सोशल मीडिया में जमकर आलोचना हो रही है। हिंदू पब्लिशिंग ग्रुप के डायरेक्टर एन. राम को टैग करते हुए सोशल मीडिया यूजर अंकुर सिंह ने लिखा, “एन. राम और कितना नीचे गिरोगे? द हिंदू तो पाकिस्तान के ‘द डॉन’ से भी बदतर हो गया है। देखिए, कितनी बेशर्मी से यह पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा चला रहा है।” वहीं, अनुपम मिश्रा नाम के एक यूजर ने लिखा कि अखबार में पाकिस्तान की ख़बर लीड लगी है और प्रधानमंत्री का बयान उसके नीचे है।

वामपंथी सोच वाला द हिंदू अखबार चीन का प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए भी कुख्यात रहा है। जून 2022 में चीन के राजदूत सन वेइदॉन्ग (Chinese Ambassador Sun Weidong) ने वामपंथी आउटलेट द हिंदू के मुख्यालय का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने संपादक सुरेश नंबथ और स्टाफ के अन्य सदस्यों से मुलाकात की थी। वेइदॉन्ग ने इस मुलाकात का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर भी शेयर किया था।

इतना ही नहीं, अखबार द हिंदू ने 1 जुलाई 2021 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की शताब्दी की वर्षगाँठ पर पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित किया था। यह पेड कंटेंट समाचार पत्र के तीसरे पेज पर था। दिलचस्प बात यह है कि चीन द्वारा जो पेड कंटेंट प्रकाशित किया गया था, वह नियमित रिपोर्ट की तरह ही दिखाई दे रहा था, लेकिन बारीकी से देखने पर पता चला कि यह चीन द्वारा पेड कंटेंट था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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