गाजा में इजरायल की कार्रवाई का उन्होंने हमेशा विरोध किया और इसे ‘नरसंहार’ और ‘इंटरनेशनल कानून’ का उल्लंघन करार दिया। यहाँ तक कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने जब गिरफ्तारी वारंट जारी किया तो उन्होंने उसका भी समर्थन किया।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फ्रांसेस्का अल्बानीज पर लगे प्रतिबंध पर कहा है कि उन्होंने आईसीसी को मजबूर करने की कोशिश की कि वह अमेरिका और इजरायल के अधिकारियों पर कार्रवाई करे। अमेरिकी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है, ” अमेरिका और इजरायल के खिलाफ उनके अभियान को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए हमेशा खड़े रहेंगे।”
Today I am imposing sanctions on UN Human Rights Council Special Rapporteur Francesca Albanese for her illegitimate and shameful efforts to prompt @IntlCrimCourt action against U.S. and Israeli officials, companies, and executives.
— Secretary Marco Rubio (@SecRubio) July 9, 2025
Albanese’s campaign of political and economic…
अल्बनीज ने अमेरिकी एक्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ताकतवर लोग कमजोर की पैरवी करने वालों को सजा दे रहे हैं।” उन्होंने कहा कि ” ये ताकत की नहीं, बल्कि कमजोरी की निशानी है।”
"The powerful punishing those who speak for the powerless, it is not a sign of strength, but of guilt".
— Francesca Albanese, UN Special Rapporteur oPt (@FranceskAlbs) July 10, 2025
Let's stand tall, together. https://t.co/7D1vrNRGS7
मिडिल ईस्ट आई से बात करते हुए अल्बनीज ने कहा, ” ऐसा लगता है कि मैंने दुखती रग पर पैर रख दिया है। जब मैं और आप बात कर रहे हैं तब भी गाजा में लोग मर रहे हैं और यूएन कुछ नहीं कर पा रहा।”
उन्होंने अपने पिछले पोस्ट में लिखा था कि सबको गाजा की स्थिति के बारे में सोचना चाहिए। हर हाल में वहाँ नरसंहार रुकना चाहिए।
I ? sensible lawyers as much as I?principled politicians. Right now, we need both fully engaged, 200% committed, to stopping the genocide.
— Francesca Albanese, UN Special Rapporteur oPt (@FranceskAlbs) July 10, 2025
All eyes must remain on Gaza, where children are dying of starvation in their mothers’ arms, while their fathers and siblings are bombed… https://t.co/rgBFdBDFL2
अल्बनीज के मुताबिक अमेरिकी प्रतिबंध उनके मिशन को कमजोर करने के लिए लगाया गया है। उन्होंने कहा, “मुझे जो करना है वो मैं करती रहूँगी।”
इस बीच संयुक्त राज्य मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने अमेरिका से इन प्रतिबंधों को तुरंत हटाने की माँग की हैं। उन्होंने कहा, “तमाम असहमति के बावजूद यूएन के सदस्य देशों को इस मुद्दे पर बातचीत कर हल निकालना चाहिए। “
गौरतलब है कि व्हाइट हाउस ने पिछले महीने 4 आईसीसी जस्टिस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इन पर अमेरिका के खिलाफ काम करने का लगाया आरोप
क्या थी अल्बनीज की रिपोर्ट?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की सदस्य अल्बनीज एक ऐसे पैनल की सदस्य हैं जो विश्वस्तर पर मानवाधिकार हनन की रिपोर्ट तैयार करता है और उसकी निगरानी करता है। ये संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक प्रवक्ता नहीं होते लेकिन उनके निष्कर्षों पर ध्यान दिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को इससे मदद मिलती है।
परिषद ने खास राष्ट्रों और क्षेत्रों के लिए 13 विशेषज्ञ नियुक्त किए हैं। अफगानिस्तान, बेलारूस, बुरुंडी, कंबोडिया, उत्तर कोरिया, इरिट्रिया, ईरान, म्यांमार और रूस के अलावा सीरिया, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, माली और सोमालिया में इनकी नियुक्ति हुई है।
फिलिस्तीनी क्षेत्र में हाल ही में हुई इजरायली हमले को देखते हुए एक निष्पक्ष विशेषज्ञ को नियुक्त किया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार अल्बानीज अंतर्राष्ट्रीय कानून में विशेषज्ञ हैं और उन्होंने शरणार्थी एवं विस्थापितों के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी के साथ साथ दूसरे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ काम किया है।
फ्रांसेस्का अल्बनीज कौन है?
इटली की मानवाधिकार आयोग की वकील फ्रांसेस्का अल्बनीज गाजा और वेस्ट बैंक क्षेत्र में विशेष दूत हैं। 2022 में उनकी नियुक्ति हुई थी। वह इंटरनेशनल वकील होने के साथ साथ जॉजटाउन विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल प्रवासी स्टडी सेंटर से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने मध्यपूर्व के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाया है। ‘ अंतर्राष्ट्रीय कानून में फिलिस्तीनी शरणार्थी’ किताब की सह लेखिका हैं।
उन्होंने 2003-13 के बीच यूएन के साथ काम किया। 2013-15 के बीच इबोला बीमारी से पश्चिम अफ्रीका को बचाने के मुहिम का हिस्सा रहीं इस दौरान गैर सरकारी संगठन प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल की सुरक्षा सलाहकार थी
उन्होंने कानून में इटली के पीसा विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज से मानवाधिकार में एलएलएम किया है। 2015 तक उनका संबंध अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ बेरूत के इस्साम फारेस इंस्टीट्यूट और आईएसआईएम से था।
इजरायल की मुखर विरोधी रही हैं अल्बनीज
गाजा पर इजरायल के हमले के बाद अल्बनीज लगातार इजरायल की कार्रवाइयों का विरोध करती रही हैं। उन्होंने यूएनएचआरसी में दिए अपने भाषण में इजरायल को ‘आधुनिक इतिहास का क्रूरतम नरसंहारक’ कहा था।
2024 में अल्बनीज ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें इजरायल पर सामूहिक हत्या, फिलिस्तीन का विनाश की चर्चा की। जून 2025 में उन्होंने अपनी रिपोर्ट में उन बैंकों और हथियार निर्माता बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नाम बताए थे जो इजरायल के अभियान का समर्थन कर रहे थे।
अल्बनीज अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए भी सुर्खियों में रही हैं। उन्होंने 2014 में इजराइल -फिलिस्तीन के जंग में यहूदी लॉबी की बात की थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिकी सरकार के फैसलों को “यहूदी लॉबी” प्रभावित कर रही थी। बाद में उन्होंने माफी माँगी थी। इससे उनके ‘यहूदी विरोधी’ रुझान का पता चलता है।
(मूल रूप से इस खबर को अंग्रेजी में रुकमा राठौड़ ने लिखी है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)


