मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार (23 जुलाई 2025) को शिवरात्रि पर दौराला क्षेत्र स्थित शिव मंदिर में भंडारा आयोजित किया गया था। कासिम भी भंडारे में पहुँचा और मंदिर के कमरे के भीतर घुस गया। चोरी के शक से ग्रामीणों ने उसकी धोती खोली और मुस्लिम होने की पहचान होने के बाद पुलिस को बुलाया। तब उसने अपना असली नाम कासिम बताया।
उधर, पुलिस जाँच में सामने आया है कि कासिम के अब्बा मोहम्मद अब्बास बिहार के कोली रायपुर गाँव में मौलवी हैं। उसने दिल्ली के मंदिरों में रहकर पूजा-पाठ और मंत्रोच्चारण सीखा। दिल्ली में ही उसने अपने हाथ पर कृष्ण गुदवाया था। वह खुद को कृष्ण और बाप का नाम संतोष बताता था।
मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने विरोध जताया है। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष आदेश चौधरी ने कहा कि काँवड़ यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने मेरठ में स्पष्ट किया था कि कोई भी अपनी पहचान ना छिपाए। चौधरी ने कहा कि कासिम ने साधु के भेष में रहकर धर्म का अपमान किया है।

