कभी-कभी खेल हमें वह उम्मीद लौटा देते हैं, जिसकी तलाश हम दुनिया की बड़ी-बड़ी खबरों में करते फिरते हैं।
बीते कुछ साल में दुनिया ने युद्ध देखे, राजनीतिक उथल-पुथल देखी, आर्थिक अनिश्चितताएँ देखीं और समाजों के भीतर बढ़ती बेचैनियाँ भी देखीं। ऐसे दौर में जब बहुत से लोगों को लग रहा था कि फीफा विश्व कप-2026 शायद पिछले संस्करणों जैसी ऊर्जा और उत्साह नहीं जगा पाएगा, तब इस प्रतियोगिता ने धीरे-धीरे अपनी असली ताकत दिखानी शुरू कर दी है।
यह फीफा विश्व कप अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन मैदान पर जो कहानियाँ जन्म ले रही हैं, वे बता रही हैं कि फुटबॉल सिर्फ़ एक खेल नहीं है। यह उम्मीद का उत्सव है। यह उन राष्ट्रों का मंच है जो अपने सपनों के साथ यहाँ पहुँचे हैं। और यह उन करोड़ों लोगों का साझा अनुभव है जो नब्बे मिनट के भीतर हार, जीत, साहस और चमत्कार, सब कुछ एक साथ देख लेते हैं।
इसी क्रम में ग्रुप ई में चार बार की विश्व विजेता जर्मनी ने विश्व कप पदार्पण कर रहे कुराकाओ के विरुद्ध अपने अभियान की शुरुआत की…
शुरू के तीस मिनट तक मैच बेहद ही रोमांचक रहा। मैच के छठे मिनट में ही पच्चीस वर्षीय मिडफील्डर फेलिक्स न्मेचा ने गोल दाग जर्मनी को जरूरी बढ़त दिला दी थी। जर्मन खेमा मैदान के दोनों छोरों से लगातार विरोधी गोलपोस्ट पर हमले किये जा रहा था। परन्तु कुराकाओ की टीम बेहतरीन तरीके से अपने गोलपोस्ट की रक्षा कर रही थी। मजा तो तब आ गया जब कुराकाओ के लिए उनके अटैकिंग मिडफील्डर कोमेनेन्सिया ने मैच के इक्कीसवें मिनट में एक मौका मिलते ही गेंद को गोलपोस्ट के भीतर सरका दिया। हालाँकि तभी हाइड्रेशन ब्रेक हो गया और इस ब्रेक ने कुराकाओ की लय तोड़ दी। डिफेंस लाइन के खिलाड़ी श्लौटरबैक ने बेहतरीन हेडर लगा जर्मनी को पुनः बढ़त दिला दी और स्कोर 2-1 हो गया।
फिर तो जर्मन टीम ने ताबड़तोड़ हमलों की बरसात कर दी। इन हमलों का कुराकाओ की टीम के पास कोई जवाब न था। जर्मन खिलाड़ी थोड़ी-थोड़ी देर बाद लगातार गोल स्कोर करते रहे। मैच का फाइनल स्कोर रहा 7-1। जर्मनी ने इस विश्व कप में एक शानदार जीत से शुरुआत की।
ग्रुप स्टेज के सबसे बेहतरीन मैचों में से एक बीती रात जापान और हॉलेंड के मध्य खेला गया। टेक्सास प्रांत के डल्लास के किसी विशालकाय पॉलिहाऊस से दिखने वाले स्टेडियम में एक ओर गहरी नीली जर्सी पहने जापान की टीम खड़ी थी, जिनका सामना था अपने पारंपरिक गहरी नारंगी रंग की जर्सी में मैदान में उतरी ‘रोनाल्ड कोमान’ की नीदरलैंड्स से। रोनाल्ड कोमान की नीदरलैंड्स कई अहम खिलाड़ियों के चोटिल होने के चलते अपेक्षाकृत एक कमजोर खेमे के संग विश्व कप में पहुँची है। डीप लाइंग मिडफील्डर की भूमिका में अपने जादूगर फ्रैंकी डी यांग को रख कोमान ने 4-1-2-3 की फॉर्मेशन के संग टीम को मैदान में उतारा। नीदरलैंड्स शुरू से ही गेंद को अपने कब्जे में रख रही थी। जापान ने पिछले विश्व कप की ही भांति यहाँ भी शुरुआती व्हिस्ल बजते ही अपना दमखम दिखाया और नीदरलैंड्स को अपने हमलों को गोल में तब्दील नहीं करने दिया। पहले हाफ की समाप्ति तक स्कोर 0-0 था।
कप्तान विरज़िल लॉन जिक ने मैच के पचासवें मिनट पर गोल लगा कर अपनी टीम को काँटे की टक्कर वाले इस मुकाबले में अहम बढ़त दिलाई। परन्तु विरज़िल लॉन ज़िक के इस गोल के ठीक छह मिनट बाद ही नाकामुरा ने मैदान की बाई छोर से मूव बनाकर एक बेहद शानदार गोल स्कोर कर अपनी टीम की इस मैच में वापसी करा दी। परन्तु ऐसे ही थोड़ी ग्रुप स्टेज के इस मैच की सभी को प्रतिक्षा थी। फिर सात मिनट बाद ही ग्रेवनबर्च ने गेंद को सौमरविल की ओर बढ़ाया जिन्होंने गोल स्कोर कर वापस मैच में नीदरलैंड्स को बढ़त दिला दी। किसी नारंगी समंदर सी प्रतीत होती नीदरलैंड्स के समर्थकों की भीड़ झूमने लगी।
मैच आगे बढ़ रहा था। अब कभी भी रेफरी अंतिम व्हिस्ल बजा सकते थे। तभी अचानक ही जापान की आक्रामक पंक्ति तेज गति से सधे हुए तरीके से विरोधी गोलपोस्ट की ओर बढ़ी। उनके अटैक के चलते जापान को एक कॉर्नर किक मिली। और मैच के अंतिम क्षणों में दाईची कमाडा ने खूबसूरत हेडर लगा जापान के लिए गोल दाग स्कोर बराबर कर दिया। दाईची कमाडा का अंतिम क्षणों में दागा गया यह गोल किसी कटार की भांति था। इस गोल के चलते ग्रुप एफ के इस मैच में रैंकिंग में अपने से काफी बेहतर विरोधी के विरुद्ध जापान ने एक जरूरी अंक जुटा लिया। नीदरलैंड्स ने जहाँ गोल पर ग्यारह शॉट लगाए पर निशाने पर मात्र सात शॉट रहे। उसमें भी वह दो ही शॉट पर गोल स्कोर कर सके। वहीं जापान ने गोलपोस्ट पर कुल तीन ही शॉट लगाए और उनमें से भी दो शॉट को सफलतापूर्वक गोल में तब्दील किया। इसका ही नतीजा रहा कि नीदरलैंड्स जीत से वंचित रह गया।
उधर फिलाडेल्फिया में खेले गए ग्रुप ई के एक मुकाबले में आइवरी कोस्ट ने 1-0 से इक्वाडोर को मात दे ग्रुप में अपनी स्थिति मजबूत की। वहीं ग्रुप एफ के एक और मुकाबले में स्वीडन का सामना ट्यूनीशिया से था। स्वीडन की अटैकिंग लाइन में विक्टर ग्योकेरेज़ व एलेक्सैंडर आइसैक जैसे तेजतर्रार खिलाड़ी मौजूद हैं। लुकास बर्गवाल व एंथोनी इलांगा सरीखे होनहार खिलाड़ी बेंच पर थे। स्वीडन ने 5-1 से ट्यूनीशिया को इस मुकाबले में रौंद डाला।
ग्रुप एफ में जापान व नीदरलैंड्स के मैच के ड्रॉ रहने के चलते, इस जीत ने इस ग्रुप में स्वीडन को अच्छी बढ़त दिला दी है।
अब आने वाली रात यूरोपीयन फुटबॉल के महाकाव्य का रचयिता स्पेन अपने अभियान की शुरुआत करेगा। रात जब आसमान में तारे टिमटिमाने लगेंगे, भारतीय समयानुसार रात साढ़े नौ बजे स्पेन अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में क्षेत्रफल व जनसंख्या के आधार पर विश्व कप के संपूर्ण इतिहास में मुख्य ड्रॉ के लिए क्वालीफाई करने वाले दूसरे सबसे छोटे राष्ट्र काबो-वर्दे के खिलाफ मैदान में उतरेगी। ग्रुप एच के इस मुकाबले पर आपकी नजर जरूर होनी चाहिए।
आगे भारतीय समयानुसार रात साढ़े बारह बजे केविन डि ब्रुएना की बेल्जियम का मुकाबला होगा मोहम्मद सालाह की इजिप्ट से तो वहीं रात साढ़े तीन बजे उरुग्वे सऊदी अरब के खिलाफ अपने सफर की शुरुआत करेगा।
शायद फुटबॉल का सबसे बड़ा जादू यही है कि यह हमें केवल गोल और परिणाम नहीं देता, बल्कि इंसानी जज़्बे की ऐसी कहानियाँ भी देता है जो स्कोरबोर्ड से कहीं बड़ी होती हैं।
कुछ ही दिन पहले ऑस्ट्रेलिया ने अपने से कहीं अधिक मजबूत मानी जा रही तुर्की की टीम को 2-0 से हराकर पूरे टूर्नामेंट को चौंका दिया था। और बीती रात जर्मनी से 7-1 की करारी हार झेलने के बावजूद कुराकाओ के समर्थक मैच खत्म होने के बाद भी अपनी टीम के लिए तालियाँ बजाते रहे। उनके लिए हार से बड़ा तथ्य यह था कि उनका छोटा-सा द्वीपीय राष्ट्र पहली बार विश्व कप के मंच पर खड़ा था।
मैच के बाद एक समर्थक ने कहा, “आज हमारा छोटा-सा देश दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच का हिस्सा है। क्या खुश होने के लिए इतना काफी नहीं? वी हैव अराइव्ड, एंड वी शैल रीजॉइस दिस मोमेंट।”
यही विश्व कप की खूबसूरती है।
यह केवल ट्रॉफी जीतने वालों की कहानी नहीं है। यह उन लोगों की भी कहानी है जो यहाँ तक पहुँचने भर को अपनी सबसे बड़ी जीत मानते हैं।
टूर्नामेंट अभी लंबा है। कई दिग्गज अपनी यात्रा शुरू करने वाले हैं, कई नए नायक जन्म लेंगे, कई सपने टूटेंगे और कई उम्मीदें परवान चढ़ेंगी।
फिलहाल तो यह बस शुरुआत है।
और अगर शुरुआती दिनों ने कुछ साबित किया है, तो वह यह कि आने वाले दिनों में यह विश्व कप हमें और भी यादगार कहानियाँ देने वाला है।
बने रहिए साथ, क्योंकि फुटबॉल का यह महाकाव्य अभी अपने शुरुआती अध्यायों में ही है।


