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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता शुरू, 50% टैरिफ का मुद्दा सुलझाने की कोशिश: दिल्ली में US के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच, जानिए उनके बारे में सबकुछ

ब्रेंडन लिंच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के सहायक व्यापार प्रतिनिधि हैं, जो दक्षिण और मध्य एशिया के लिए जिम्मेदार हैं।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते पिछले कुछ महीनों से काफी तनावपूर्ण हो चुके थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाली चीजों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, जिससे दोनों देशों की बातचीत रुक गई। लेकिन अब लगता है कि हालात बदल रहे हैं। अमेरिकी मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच सोमवार रात (15 सितंबर 2025) से दिल्ली में हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (16 सितंबर 2025) से दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बातचीत फिर से शुरू हो जाएगी। यह छठे दौर की वार्ता से पहले की तैयारी वाली मीटिंग होगी। भारत की तरफ से मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल हैं, जो वाणिज्य विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी हैं। यह कदम दिखाता है कि अमेरिका अब नरम रुख अपना रहा है, जबकि भारत सरकार कड़ी सौदेबाजी करके अपने हितों की रक्षा करेगी।

भारत-अमेरिका में कैसे और कब बढ़ा तनाव, जानें- पूरी टाइमलाइन

सबसे पहले तो समझते हैं कि यह तनाव कैसे शुरू हुआ। इस साल मार्च में भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत शुरू की थी। मकसद था कि अक्टूबर-नवंबर 2025 तक पहले चरण को पूरा कर लिया जाए। तब तक पाँच दौर की वार्ता हो चुकी थी। लेकिन मुख्य समस्या यह थी कि अमेरिका भारत के कृषि और डेयरी बाजारों में घुसना चाहता था।

भारत ने साफ मना कर दिया, क्योंकि ये सेक्टर यहाँ लाखों लोगों की आजीविका का आधार हैं। साथ ही अमेरिकी डेयरी में जानवरों को GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फीड देने की बात है, जो भारत की संस्कृति, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए ठीक नहीं लगती। भारत ने कहा कि हम अपने किसानों और छोटे डेयरी उत्पादकों को खतरे में नहीं डाल सकते।

इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया। फिर भारत के रूस से तेल खरीदने की वजह से और 25 प्रतिशत जोड़ दिया, कुल 50 प्रतिशत हो गया। यह टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार घाटा होने वाले देशों पर ऐसा ही करना पड़ेगा, ताकि ‘फेयर ट्रेड’ हो।

लेकिन भारत ने इन टैरिफ को ‘अनुचित’ बताया। इससे भारत का अमेरिका को निर्यात कम हो गया, खासकर कपड़ा, ज्वेलरी और फार्मा जैसी चीजों का। राजनीतिक स्तर पर भी तनाव बढ़ा। ट्रंप और उनके अधिकारियों ने भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना की। छठा दौर 25-29 अगस्त को होना था, लेकिन टैरिफ की वजह से टल गया।

अब हाल ही में दोनों तरफ से नरमी के संकेत मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के भारत-अमेरिका रिश्तों को ‘स्पेशल’ बताने पर धन्यवाद दिया। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया कि वे ट्रंप के विचारों की सराहना करते हैं और भारत-अमेरिका का रिश्ता एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। ट्रंप ने भी कहा कि मोदी के साथ उनका दोस्ताना रिश्ता हमेशा रहेगा और चिंता की कोई बात नहीं।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले हफ्ते कहा कि दोनों देश सक्रिय संवाद में हैं और गिरावट तक डील हो सकती है। यह दिखाता है कि ट्रंप के सख्त तेवर अब काम नहीं आ रहे, इसलिए अमेरिका ने अपना मुख्य वार्ताकार भेजने का फैसला किया। भारत सरकार भी खुश है, क्योंकि इससे साफ है कि हमारी कड़ी नीति के सामने अमेरिका को झुकना पड़ रहा है।

ब्रेंडन लिंच की दिल्ली यात्रा इसी नई शुरुआत का हिस्सा है। वे अमेरिका के सहायक व्यापार प्रतिनिधि (दक्षिण और मध्य एशिया) हैं। उनका काम है इस क्षेत्र के 15 देशों के साथ अमेरिकी व्यापार नीति बनाना और लागू करना। इसमें भारत-अमेरिका व्यापार नीति फोरम का प्रबंधन भी शामिल है।

किन मुद्दों पर हैं मतभेद, अमेरिका को चाहिए भारतीय बाजार

लिंच मंगलवार को भारतीय अधिकारियों से मिलेंगे और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। लेकिन चुनौतियाँ अभी भी बरकरार हैं। अमेरिका अभी भी कृषि और डेयरी में एंट्री चाहता है, लेकिन हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे अब बड़े बाजार की बजाय प्रीमियम चीज जैसे ब्लू-वेन, आर्टिसनल या पाउडर्ड चीज पर फोकस कर रहे हैं। भारत में ये चीजें सिर्फ 2-5 प्रतिशत अमीर लोगों द्वारा इस्तेमाल होती हैं।

भारत पहले से ही लिथुआनिया, एस्टोनिया, इटली और यूके से थोड़ी मात्रा में ऐसी चीज इंपोर्ट करता है, जिस पर 30-40 प्रतिशत ड्यूटी लगती है। पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 10.8 मिलियन डॉलर की ऐसी चीजें आईं। अगर अमेरिका इसी छोटे सेगमेंट तक सीमित रहे, तो भारत सहमत हो सकता है, क्योंकि इससे हमारे छोटे किसानों को नुकसान नहीं होगा।

एक और मुद्दा है GMO वाले कृषि उत्पाद। भारत ने हमेशा GMO फूड को मना किया है, स्वास्थ्य और पर्यावरण की वजह से। लेकिन बातचीत में एक बीच का रास्ता निकल सकता है। पहले दौरों में चर्चा हुई थी कि भारत GMO कॉर्न को इथेनॉल बनाने के लिए इंपोर्ट करने की इजाजत दे सकता है। चूँकि ये सीधे इंसानों के खाने के लिए नहीं है, इसलिए सख्त नियम लागू नहीं होंगे।

इसी तरह GMO एनिमल फॉडर की भी बात चली। अगर अमेरिका इन छोटे समझौतों पर राजी हो जाता है, तो भारत भी कुछ रियायत दे सकता है। लेकिन 50 प्रतिशत टैरिफ हटाने का कोई साफ संकेत अभी नहीं है। शायद अगर बातचीत अच्छी चली, तो धीरे-धीरे टैरिफ कम हो जाएँ। भारत की तरफ से साफ है कि हम अपने संवेदनशील सेक्टरों की रक्षा करेंगे, लेकिन विन-विन सॉल्यूशन ढूँढेंगे।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता बेहद महत्वपूर्ण

इस बातचीत का महत्व बहुत बड़ा है। भारत और अमेरिका दोनों को एक-दूसरे से फायदा है। अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा बाजार है और एशिया में रणनीतिक साझेदार। भारत के लिए अमेरिका तकनीक, निवेश और चीन के खिलाफ बैलेंस का स्रोत है। पिछले महीनों का तनाव दोनों को नुकसान पहुँचा रहा था। भारत का निर्यात प्रभावित हुआ, अमेरिका को भी भारतीय बाजार से वंचित रहना पड़ा।

अब अगर दोनों तरफ समझदारी बरती गई, तो अक्टूबर-नवंबर तक पहले चरण का समझौता हो सकता है। मोदी सरकार कड़ी सौदेबाजी करेगी, ताकि भारत के हित सुरक्षित रहें। ट्रंप प्रशासन को भी लग रहा होगा कि सख्ती से ज्यादा फायदा बातचीत से है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील सीमित लेकिन सार्थक हो सकती है, बिना किसी की लाल लकीर पार किए।

भारत सरकार का रुख साफ है। हम रूस से तेल खरीदना जारी रखेंगे, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा जरूरी है। लेकिन अमेरिका के साथ रिश्ते भी महत्वपूर्ण हैं। पीयूष गोयल ने कहा है कि हम संतुलित और पारस्परिक फायदे वाला समझौता चाहते हैं।

अगर अमेरिका प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर अड़े रहता है और GMO को गैर-खाद्य उपयोग तक सीमित रखता है, तो रास्ता निकल सकता है। भारत पहले से ही कई देशों के साथ ऐसे समझौते कर चुका है। यह वार्ता न सिर्फ व्यापार को पटरी पर लाएगी, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाएगी। वैश्विक हालात में जैसे चीन का बढ़ता प्रभाव, दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है। लिंच की यात्रा इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उम्मीद है कि कल की मीटिंग से सकारात्मक परिणाम निकलेंगे।

अब देखते हैं कि क्या अमेरिका टैरिफ हटाने को तैयार होता है। अभी तो कोई पक्का ऐलान नहीं, लेकिन अगर भारत छोटी रियायतें देता है, जैसे प्रीमियम चीज इंपोर्ट बढ़ाना, तो अमेरिका भी पीछे हट सकता है। भारत के लिए यह मौका है कि हम अमेरिका को ‘फेस-सेविंग’ दें, लेकिन अपने किसानों की रक्षा करें।

कुल मिलाकर यह बातचीत भारत-अमेरिका रिश्तों में नया मोड़ ला सकती है। ट्रंप के सख्त तेवर अब पीछे छूट रहे हैं और व्यावहारिक दृष्टिकोण आगे आ रहा है। अगर सब ठीक रहा, तो यह डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगी।

कौन हैं अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच?

ब्रेंडन लिंच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के सहायक व्यापार प्रतिनिधि हैं, जो दक्षिण और मध्य एशिया के लिए जिम्मेदार हैं। उनका जन्म अमेरिका में हुआ और उन्होंने बोस्टन कॉलेज से बीएस की डिग्री हासिल की, उसके बाद जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से एमबीए किया।

साल 2013 में वे USTR में शामिल हुए, जहाँ पहले कृषि मामलों के ऑफिस में काम किया। वहाँ उन्होंने अमेरिकी कृषि उत्पादों के हितों को बढ़ावा दिया और कई देशों जैसे ताइवान, इजराइल, मध्य अमेरिका, कैरिबियन, मैक्सिको, कनाडा और रूस के साथ द्विपक्षीय वार्ताएँ कीं।

बाद में वे भारत के डायरेक्टर बने, जहाँ भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का प्रबंधन किया। फिर डिप्टी असिस्टेंट के रूप में प्रमोशन मिला, जहाँ उन्होंने कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी जैसे सेक्टरों में नेगोशिएशंस हैंडल कीं। मार्च 2023 से वे एक्टिंग असिस्टेंट थे और 2024 में स्थाई रूप से इस पद पर नियुक्त हुए।

लिंच का मुख्य काम इस क्षेत्र के 15 देशों (जैसे भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान आदि) के साथ अमेरिकी व्यापार नीति बनाना और लागू करना है। वे यूएस-इंडिया ट्रेड पॉलिसी फोरम को मैनेज करते हैं और ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क एग्रीमेंट्स (TIFAs) के तहत गतिविधियों का समन्वय करते हैं।

USTR जॉइन करने से पहले वे यूएस इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन में इंटरनेशनल ट्रेड एनालिस्ट थे, जहाँ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का आर्थिक विश्लेषण किया और कॉन्ग्रेस कमेटियों व USTR को व्यापार बाधाओं पर सलाह दी। लिंच को दक्षिण एशिया के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है, खासकर भारत के साथ डीलिंग में।

यूएस ट्रेड प्रतिनिधि कैथरीन ताई ने उनकी 10 साल की सेवा की तारीफ की है। उनकी यात्राएँ और वार्ताएँ अमेरिकी हितों को मजबूत करने पर फोकस्ड रहती हैं लेकिन वे समझौतावादी रुख के लिए भी मशहूर हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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