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जिस प्रोफेसर ने हनुमान जी की प्रतिमा के लिए लिखा- तोड़ दो, उस पर कानूनी एक्शन के विकल्प तलाश रही सूरत की यूनिवर्सिटी: कहा- हमसे नहीं वास्ता, 2021 में दे दिया था इस्तीफा

हनुमानजी की प्रतिमा पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर प्रोफेसर मधुसूदन राज विवादों में घिरे, सोशल मीडिया पर आक्रोश और विश्वविद्यालय ने तुरंत दी सफाई।

गुजरात के सूरत में स्थित वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी (VNSGU) को सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बाद सफाई देनी पड़ी है। दरअसल, यूनिवर्सिटी से जुड़े बताए जा रहे प्रोफेसर मधुसूदन राज के कई ट्वीट वायरल हुए, जिन्हें यूजर्स ने हिंदू-विरोधी करार देते हुए गुजरात पुलिस को टैग कर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

विवाद तब भड़का जब अमेरिका के टेक्सास में बनी हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर मधुसूदन राज का ट्वीट सामने आया। एक अमेरिकी अकाउंट ने 20 सितंबर को हनुमान जी की मूर्ति की तस्वीर साझा करते हुए लिखा था, “अब जब हम H1B वीजा वाले भारतीयों को यहाँ से निकाल रहे हैं, तो टेक्सास के फोर्ट बेंड काउंटी में लगी इस ‘हिंदू डेमन मंकी गॉड’ की मूर्ति को हटाना भी सरकार के लिए मुश्किल काम नहीं होगा।”

इस शर्मनाक पोस्ट को मधुसूदन राज ने रीट्वीट करते हुए लिखा ‘Smash it’ यानी ‘इसे तोड़ डालो।’

यही दो शब्द आग में घी का काम कर गए और सोशल मीडिया पर जबरदस्त आक्रोश फूट पड़ा। लोग इसे हिंदू आस्था पर सीधा हमला मानकर VNSGU को घेरने लगे। कई यूजर्स ने दावा किया कि वह अब भी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

हालाँकि, यूनिवर्सिटी के मानव संसाधन विभाग ने तुरंत बयान जारी कर स्पष्ट किया कि मधुसूदन राज पहले यहाँ कार्यरत थे, लेकिन उन्होंने 2021 में इस्तीफा दे दिया था। तब से उनका विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि वे मामले की जाँच कर रहे हैं और विस्तृत बयान भी जारी किया जाएगा, लेकिन साफ है कि राज के निजी विचारों और गतिविधियों से संस्थान का कोई लेना-देना नहीं है।

खबरों के मुताबिक, मधुसूदन राज इस समय विदेश में रह रहे हैं। उनके एक्स प्रोफाइल में वह खुद को ‘Born again Christian’ बताते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके बयान विवादों में आए हों।

पहले भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हिंदुओं और गुजरातियों के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी हैं। कभी पीएम मोदी को ‘जोकर’ बताया तो कभी भारत की स्थिति की तुलना तानाशाही से की। इतना ही नहीं, धार्मिक आस्था, मंदिरों और परंपराओं का मजाक उड़ाना भी उनकी पोस्ट्स का हिस्सा रहा है, जिसे लोगों ने बेहद अपमानजनक माना।

इन सबको देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, भले ही राज अब वहाँ के कर्मचारी न हों।

(मूल रूप से यह रिपोर्ट गुजराती में मेघल सिंह परमार ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है।)

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મેઘલસિંહ પરમાર
મેઘલસિંહ પરમાર
ઇતિહાસ-રાજકારણમાં રુચિ ધરાવતો, ઘટનાઓના ઊંડાણમાં જઈને બૃહદ પરિપેક્ષથી જોવામાં-લખવામાં વિશેષ રસ ધરાવતો પત્રકાર. ક્યારેક લેખક, ક્યારેક રિસર્ચર, ક્યારેક ફેક્ટચેકર.

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