Homeदेश-समाजस्टालिन सरकार के निशाने पर हिंदूवादी यूट्यूबर मरीदास, जोसेफ विजय की रैली में भगदड़...

स्टालिन सरकार के निशाने पर हिंदूवादी यूट्यूबर मरीदास, जोसेफ विजय की रैली में भगदड़ पर बनाए गए वीडियो को लेकर किया गिरफ्तार: मंत्री सेंथिल की भूमिका पर उठाए थे सवाल

यह पहली बार नहीं है जब मरीदास स्टालिन सरकार के निशाने पर आए हों, इससे पहले भी तमिलनाडु सरकार उन्हें 2021 में गिरफ्तार कर चुकी है

तमिलनाडु में विरोध को दबाने की सरकार की आदत का एक और उदाहरण देखने को मिला है। मशहूर यूट्यूबर मरीदास को शनिवार (4 अक्टूबर 2025) को DMK सरकार ने गिरफ्तार कर लिया क्योंकि उन्होंने करूर में तमिलागा वेत्रि कझागम (TVK) नेता और अभिनेता जोसेफ विजय की रैली में हुई भगदड़ पर अपने वीडियो में सवाल उठाए थे। इस भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो चुकी है।

यह पहली बार नहीं है जब मरीदास स्टालिन सरकार के निशाने पर आए हों, इससे पहले भी तमिलनाडु सरकार उन्हें 2021 में गिरफ्तार कर चुकी है। शनिवार को मरीदास के अपने गिरफ्तारी को लेकर एक ट्वीट भी किया है।

इस मामले में स्टालिन की पुलिस का दावा है कि मरीदास ने अपने वीडियो में गुमराह करने वाले और झूठे बयान दिए हैं, जिसके चलते उनके खिलाफ आईपीसी और आईटी एक्ट की कई धाराओं के तहत केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

मौजूदा मामला: करूर भगदड़ और साजिश का आरोप

मरीदास को चेन्नई के नीलंकरई स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, “पूरे नाटक को डीएमके गैंग ने अदालत में रचा है, मैं इसे उजागर करने वाला हूँ।” उनका वीडियो वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री स्टालिन ने सख्त संदेश जारी करते हुए कहा था कि सोशल मीडिया पर अपमानजनक और भ्रामक टिप्पणी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

अपने यूट्यूब वीडियो में मरीदास ने सीधे तौर पर डीएमके के वरिष्ठ नेता और मंत्री सेंथिल बालाजी पर उंगली उठाई थी। उन्होंने कहा कि करूर बालाजी का गढ़ है और विजय की रैली के दौरान भगदड़ स्वाभाविक नहीं बल्कि जानबूझकर पैदा की गई अफरातफरी का नतीजा हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेंथिल बालाजी सत्ता परिवार के बेहद करीबी और ऐसे राजनेता हैं जो किसी भी हद तक जा सकते हैं।

मरीदास ने भगदड़ में साजिश की संभावना जताते हुए तीन बिंदुओं का जिक्र किया-

  1. रैली में लगातार घूमती एक एंबुलेंस और उसे लेकर सन टीवी की कवरेज।
  2. एक ऐसा व्यक्ति, जो सेंथिल बालाजी का करीबी बताया जा रहा था, उसकी बाइट का इस्तेमाल।
  3. कार्यक्रम के दौरान अचानक काटी गई बिजली, जिसे जाँच आयोग ने नजरअंदाज कर दिया।

उन्होंने इस हादसे की जाँच के लिए बनाए गए अरुणा जगदीशन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और इसे सिर्फ दिखावा करार दिया। मरीदास का कहना था कि आयोग असली विफलताओं और संभावित षड्यंत्र को ढकने के लिए बनाया गया है।

2021 में गिरफ्तारी का कारण बना सोशल मीडिया पोस्ट

यह पहली बार नहीं है जब मरीदास को उनकी टिप्पणियों के कारण गिरफ्तार किया गया। दिसंबर 2021 में भी उन्हें साइबर क्राइम पुलिस ने मदुरै से गिरफ्तार किया था। उस समय उन्होंने कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे पर सवाल उठाए थे जिसमें तत्कालीन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और 13 अन्य लोगों की मौत हुई थी।

मरीदास ने ट्वीट कर पूछा था कि क्या ‘तमिलनाडु कश्मीर बनता जा रहा है’ और आरोप लगाया था कि डीएमके की शह पर देशद्रोही ताकतें सक्रिय हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि डीएमके समर्थक सोशल मीडिया पर रावत की मौत पर मजाक उड़ा रहे हैं और यही वजह है कि पार्टी अलगाववादी ताकतों के लिए सबसे अच्छा विकल्प है।

इस ट्वीट को आधार बनाकर मरीदास पर आईपीसी की धारा 153 और 505(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। उनकी गिरफ्तारी के विरोध में उस समय भाजपा समर्थक बड़ी संख्या में पुलिस थाने पहुँचे थे। यह गिरफ्तारी भी सोशल मीडिया पोस्ट को आधार बनाकर की गई थी, जबकि अदालतें बार-बार कह चुकी हैं कि सिर्फ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी के लिए गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए।

अपनी जड़ों पर है गर्व

डीएमके और उसके समर्थक लंबे समय से मरीदास पर साम्प्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाते रहे हैं। पार्टी का कहना है कि उनके वीडियो हिंदू-मुस्लिमो के बीच शत्रुता भड़काते हैं और समाज में तनाव पैदा करते हैं। मरीदास ने कई मौकों पर डीएमके की राजनीति पर सवाल उठाए हैं।

चाहे वह अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले का विरोध हो या फिर जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर पार्टी का रुख। उन्होंने खुले तौर पर कहा था कि डीएमके का विरोध आतंकी संगठनों का समर्थन करने जैसा है और सवाल उठाया था कि क्या पार्टी ने पाकिस्तान या आतंकियों से समझौता किया है। डीएमके ने इसे देश विरोधी बयान करार देते हुए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

दिलचस्प बात यह है कि मरीदास अपनी हिंदू पहचान को लेकर खुलकर बोलते हैं और इसे अपनी ताकत मानते हैं। उनका कहना है, “हिंदू जड़ों पर गर्व करना सांप्रदायिकता नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की बुनियाद है।” यही कारण है कि उनके वीडियो अक्सर विवादों में आ जाते हैं और उन्हें हिंदूवादी यूट्यूबर के रूप में देखा जाता है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -