यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तानी आतंकियों के ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर किया था। इसके बाद पाकिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में हमले की कोशिश की, जिसे भारत ने नाकाम कर दिया। इस दरम्यान तुर्की और अजरबैजान ने पाकिस्तान का खुल कर साथ दिया।
इन देशों के रुख ने भारतीय जनता के बीच असंतोष पैदा किया, जिसका सीधा असर इनकी पर्यटन आय पर पड़ा। भारत जैसे बड़े बाजार से आने वाले पर्यटकों की कमी ने दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और उनकी पर्यटन रणनीति को हिला कर रख दिया है।
बयानबाजी का तुर्की और अजरबैजान पर असर
कश्मीर के पहलगाम में मई 2025 में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। भारत ने जवाबी कार्रवाई के तहत ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जो चार दिनों तक चला। इस दौरान, तुर्की और अजरबैजान ने पाकिस्तान के समर्थन में बयान दिए और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस्लामाबाद के पक्ष में खड़े दिखाई दिए।
यहीं से भारतीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ने लगी। सोशल मीडिया पर #BoycottTurkey और #BoycottAzerbaijan जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। बड़ी संख्या में लोगों ने इन देशों की यात्रा रद्द करने की अपील की और पर्यटन एजेंसियों पर भी दबाव पड़ा कि वे अपनी सेवाएँ रोक दें।
जिसके बाद, भारतीय ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स ने भी राष्ट्रीय भावना का सम्मान करते हुए इन देशों के लिए बुकिंग्स बंद करनी शुरू कर दीं। MakeMyTrip और EaseMyTrip जैसी कंपनियों ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि वे गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दे रही हैं। MakeMyTrip ने तो यहाँ तक कहा कि “हम अपने देश और सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अज़रबैजान और तुर्की के लिए प्रमोशनल ऑफर बंद कर रहे हैं।”
अजरबैजान पर बयान का असर
ऑपरेशन सिंदूर से पहले अजरबैजान भारतीय यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा था। जनवरी से अप्रैल 2025 तक भारत से अजरबैजान जाने वाले सैलानियों की संख्या में 33% की वृद्धि हुई थी। लेकिन मई आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
मई से अगस्त के बीच भारत से अजरबैजान जाने वाले पर्यटकों की संख्या 1 लाख से घटकर सिर्फ 44,000 रह गई। यह 56 प्रतिशत की भारी गिरावट थी, जो किसी भी देश के लिए एक बड़ा झटका मानी जाती है।
अजरबैजान पर्यटन बोर्ड के अनुसार, 2025 के पहले आठ महीनों में भारत से वहाँ आने वाले कुल यात्रियों की संख्या 1.25 लाख रही, जो पिछले साल की तुलना में 22% कम है। यह वही अजरबैजान था जिसने कुछ महीने पहले तक भारत को अपने टॉप-5 प्राथमिक पर्यटन बाजारों में शामिल किया था।
लेकिन अगस्त 2025 तक भारत की रैंक फिसलकर 11वें स्थान पर पहुँच गई। यह गिरावट केवल संख्याओं की नहीं बल्कि एक चेतावनी है कि किसी देश की विदेश नीति उसके पर्यटन पर कितना गहरा असर डाल सकती है।
तुर्की: इस्तांबुल और कप्पाडोसिया में घटती भारतीय रौनक
तुर्की लंबे समय से भारतीयों के बीच पसंदीदा पर्यटन स्थल रहा है। इस्तांबुल, कप्पाडोसिया, अंताल्या जैसे स्थान भारतीय कपल्स, फिल्म शूटरों और हनीमून ट्रैवलर्स के लिए आकर्षण का केंद्र रहे हैं। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद तुर्की की पाकिस्तान समर्थक स्थिति ने इस छवि को गहरा नुकसान पहुँचाया।
मई से अगस्त 2025 के बीच तुर्की जाने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या 1.36 लाख से घटकर 90,400 रह गई, यानी 33.3% की गिरावट। इस साल के पहले चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) में यह संख्या लगभग स्थिर थी (83,300 बनाम 84,500), लेकिन मई के बाद गिरावट तेज हो गई।
जनवरी से अगस्त 2025 में भारत से तुर्की जाने वाले कुल पर्यटकों की संख्या 21% घटकर 1.74 लाख रह गई। पिछले साल यानी 2024 में इसी वक्त के दौरान तुर्की में भारतीय पर्यटकों की संख्या में 28.5% की वृद्धि दर्ज की गई थी। यानी एक साल के भीतर पूरा ट्रेंड पलट गया।
यह गिरावट तुर्की की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर है, क्योंकि वहाँ का पर्यटन क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 12% तक योगदान देता है। भारतीय सैलानियों की कमी से न केवल होटल और एयरलाइन कंपनियाँ प्रभावित हुईं, बल्कि स्थानीय व्यापारियों और टूर ऑपरेटर्स को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा।
आर्थिक और कूटनीतिक असर: पर्यटन से परे की कहानी
यह घटना यह दर्शाती है कि आज के समय में कूटनीति और पर्यटन एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। भारत जैसे विशाल बाजार के सैलानियों की नाराजगी का असर किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा पड़ सकता है।
पहला असर आर्थिक है, होटल बुकिंग्स, एयरलाइंस की टिकट सेल, ट्रैवल गाइड, टैक्सी सर्विस और स्मारिका बाजारों में गिरावट। जब लाखों पर्यटक एक साथ किसी देश की यात्रा रद्द करते हैं, तो स्थानीय रोजगार पर इसका सीधा असर होता है।
दूसरा सामाजिक और मानसिक असर है, अब भारतीय यात्रियों की सोच बदल रही है। वे किसी देश की यात्रा करने से पहले सिर्फ सुंदर जगह या सस्ता पैकेज नहीं देखते, बल्कि यह भी ध्यान रखते हैं कि उस देश का भारत के प्रति रवैया कैसा है। सोशल मीडिया पर ऐसे ट्रेंड बनना अब सामान्य बात हो गई है, जो ट्रैवल ट्रेंड्स को प्रभावित करते हैं।
तीसरा असर कूटनीतिक है, तुर्की और अजरबैजान जैसे देशों को यह समझना होगा कि भारत का जनसमर्थन अब किसी भी राजनीतिक रुख से प्रभावित हो सकता है। यदि कोई देश पाकिस्तान जैसे भारत-विरोधी देश का खुलकर साथ देता है, तो उसकी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद की यह पूरी कहानी इस बात की मिसाल है कि आज की वैश्विक दुनिया में राष्ट्रीय भावना एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर चुकी है। अजरबैजान में 56% और तुर्की में 33% की गिरावट केवल संख्याएँ नहीं, बल्कि यह दिखाती हैं कि भारतीय यात्रियों की सोच अब पहले से कहीं अधिक संवेदनशील और जागरूक हो चुकी है। भारत जैसे बड़े टूरिस्ट मार्केट को खोना किसी भी देश के लिए बड़ा झटका है।


