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चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 3.96 करोड़ वोटर्स का डाटा वेबसाइट पर डाला, SIR के दौरान कटेंगे फर्जी नाम: विरोध में उतरी TMC तो BJP ने दिखाया आईना, कहा- घुसपैठियों की पहचान जरूरी

चुनाव आयोग ने SIR के लिए अब तक 3.96 करोड़ डाटा अपलोड कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती डाटा में लगभग 3.48 करोड़ नाम साल 2002 के SIR डाटा से मेल खाते पाए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 44 से 45 प्रतिशत हिस्सा है जबकि राज्य में वर्तमान में कुल पंजीकृत मतदाता लगभग 7.6 करोड़ है।

चुनाव आयोग ने देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू की है। प्रक्रिया की शुरुआत बिहार चुनाव 2025 से हुई। इसी कड़ी में अब पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले SIR प्रक्रिया जारी है। लेकिन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों का विरोध और तीखी बयानबाजी देखने को मिली है।

बंगाल में SIR का विरोध

बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर प्रदेश में तीव्र राजनीतिक विरोध और बयानबाजी का दौर जारी है। SIR पर सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह BJP के दबाव में काम कर रहा और SIR को NRC के समान लागू करने की साजिश कर रहा है।

सीएम ने दावा किया कि जैसे NRC में नागरिकों और घुसपैठियों की पहचान की गई थी, उसी तरह SIR के माध्यम से मतदाता सूची से कुछ लोगों को बाहर किया जा सकता है, खासकर उन समुदायों के मतदाता जिन्हें बीजेपी ‘अवैध’ मान सकती है।

इतना ही नहीं बंगाल में SIR का इस स्तर पर विरोध हुआ कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने 12 अक्टूबर 2025 को प्रदेशभर में 100 ‘बिजया सम्मिलनी’ कार्यक्रम आयोजित किए। ये कार्यक्रम विशेष रूप से मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया के विरोध में थे, जिसे पार्टी ने बीजेपी की राजनीतिक साजिश के रूप में पेश किया। TMC नेताओं ने आरोप लगाया कि SIR के माध्यम से विशेष समुदायों के मतदाताओं को जानबूझकर सूची से हटाया जा रहा है, जिससे चुनावी ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है।

हालाँकि इन सभी विवादों पर चुनाव आयोग स्पष्ट कर चुका है बंगाल में SIR के दौरान कोई भी वैध मतदाता सूची से बाहर नहीं होगा। यह आश्वासन राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने दिया। उन्होंने कहा कि कानून के निर्धारित की प्रक्रिया की जाएगी

बंगाल SIR का डाटा

बंगाल में SIR के विरोध के बीच भी चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को तेज करने में लगा हुआ है। चुनाव आयोग ने SIR के लिए अब तक 3.96 करोड़ डाटा अपलोड कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती डाटा में लगभग 3.48 करोड़ नाम साल 2002 के SIR डाटा से मेल खाते पाए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 44 से 45 प्रतिशत हिस्सा है जबकि राज्य में वर्तमान में कुल पंजीकृत मतदाता लगभग 7.6 करोड़ है।

कालिमपोंग, पश्चिम मिदनापुर, पुरूलिया, कोलकाता उत्तर, मालदा, आलीपुरदुआर, झारग्राम समेत सात जिलों में किए गए शुरुआती मिलान में यह देखा गया कि 51 प्रतिशत से 65 प्रतिशत नाम 2002 के SIR रिकॉर्ड से मेल खाते हैं। इसका मतलब यह है कि इन जिलों में आधे से अधिक मतदाता पुराने रिकॉर्ड से जुड़े हुए हैं। हालाँकि कुछ क्षेत्रों में और सुधार की आवश्यकता हो सकती है।

चुनाव आयोग ने इस डाटा को EC पोर्टल पर अपलोड किया है। हालाँकि जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलो में प्राकृतिक आपदाओं के कारण इसमें देरी हुई है। इसके साथ ही बूथ स्तर पर BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) ऐप के माध्यम से नामों की सत्यता की जाँच भी की जा रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में दोहराव, फर्जी नाम और त्रुटियों की पहचान करना है ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची पूरी तरह से अपडेट और पारदर्शी हो।

बंगाल में SIR क्यों जरूरी?

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जरूरी माना जा रहा है। खासकर राज्य में बढ़ते घुसपैठ के मामलों को देखते हुए। बंगाल में आए दिन घुसपैठ और अवैध मतदाता शामिल होने के मामले सामने आते रहते हैं।

ताजा मामला 22 अक्टूबर 2025 का है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया, जिसमें 400 बांग्लादेशी घुसपैठियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाए थे। ऐसे कई मामले हर दूसरे दिन सामने आते हैं। बंगाल में SIR प्रकिया का विशेष कारण यही है।

जुलाई 2025 में भी बीजेपी नेता शुभेंदु अदिकारी ने आरोप लगाया था कि बंगाल में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को निवास प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं, जिससे उनकी पहचान मतदाता सूची में शामिल हो रही है।

बंगाल BJP का SIR को समर्थन

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बंगाल में SIR प्रक्रिया का खुलकर समर्थन किया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि SIR पार्टी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें कोई भी लापरवाही 2026 के चुनावों में नुकसान पहुँचा सकती है।

वहीं सांसद और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने SIR के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान 1 से डेढ़ करोड़ अवैध मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं, जिनमें रोहिंग्या, घुसपैठिए और काल्पनिक मतदाता शामिल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक शरणार्थियों को नागरिकता मिलने पर उनका मतदान का अधिकार सुरक्षित रहेगा।

बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने SIR को आगामी चुनावों के ‘सेमीफाइनल’ के रूप में बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर SIR समय पर पूरा नहीं हुआ तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की नौबत आ सकती है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में 2.4 करोड़ अवैध मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं, जो चुनावी निष्पक्षता के लिए बेहद जरूरी हैं।

BJP प्रवक्ता कीया घोष ने TMC के मंत्रियों के विवादास्पद बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि वे बयान राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ सकते हैं। उनका कहना है कि SIR जैसी प्रक्रिया के माध्यम से ही राज्य में अवैध मतदाता और घुसपैठियों की पहचान की जा सकती है, जिससे चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी होंगे।

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पूजा राणा
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