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₹1200 में ताबीज, ₹850 का टिकट, माओ के देश में कुत्ते का मंदिर: बौद्ध पैगोडा में ‘दीटिंग देवता’ की पूजा से स्वस्थ-सलामत रहते हैं पेट डॉग्स, जुड़ी है पौराणिक कहानी

दीटिंग के मंदिर में दूर दूर से लोग अपने पालतू जानवरों को लेकर आते हैं। यहाँ पर लोग देवता को श्रद्धांजलि देकर अपने पालतू कुत्तों की बीमारी, उनके न खोने और दीर्घायु होने के लिए मन्नत माँगते हैं।

चीन में ‘कुत्तों के देवता’ का एक मंदिर है। बीते कुछ दिनों से ये मंदिर काफी चर्चा में है। यहाँ पालतू कुत्तों के मालिक अपने पालतू जानवरों को ‘दीटिंग देवता’ की पूजा के लिए लेकर आते हैं।

देवता को कुत्तों का खाना चढ़ाया जाता है और उनके पट्टे (leashes) को अगरबत्ती की राख में रखकर अपने पालतू जानवरों की सेहत और सुरक्षा की कामना की जाती है। सोशल मीडिया पर इस मंदिर की चर्चा ट्रेंड में है।

पूर्वी चीन में अनहुई प्रांत के चिझोउ शहर में जिउहुआ पर्वत स्थित है। ये चीन के चार प्रमुख बौद्ध पर्वतों में से एक है। इन्हीं में से एक पर अनोखा स्तूप (pagoda) बना है, जो ‘कुत्तों के देवता दीटिंग’ को समर्पित है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (एससीएमपी) की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के लोगों का कहना है कि यह देश का एकमात्र स्तूप है जो किसी जानवर के सम्मान में बनाया गया है। स्तूप के सामने कुत्तों का भोजन और स्नैक्स भेंट स्वरूप रखा जाता है।

दीटिंग के मंदिर में दूर दूर से लोग अपने पालतू जानवरों को लेकर आ रहे हैं। मान्यता के अनुसार, यहाँ पर लोग देवता को श्रद्धांजलि देकर अपने पालतू कुत्तों की बीमारी, उनके न खोने और दीर्घायु होने के लिए मन्नत माँगते हैं।

दिव्य ज्ञान पाकर दीटिंग का हुआ अवतरण

रिपोर्ट के अनुसार, दीटिंग को लेकर यहाँ एक कहानी प्रचलित है। कहानी में बताया गया है कि आत्माओं की रक्षा करने और आपदाओं को नियंत्रित करते वाले पृथ्वी के रक्षक बोधिसत्व ‘क्षितिगर्भ’ ने एक सफेद कुत्ते को पाला था जो उनके आध्यात्मिक सफर में साथ चलता था।

जिउहुआ पर्वत पर बोधिसत्व के ज्ञान प्राप्त करने के बाद वह कुत्ता दिव्य रूप में बदलकर ‘दीटिंग’ नामक एक पौराणिक प्राणी बन गया। इस पौराणिक प्राणी के सिर पर बाघ का चेहरा, एक सींग, कुत्ते के कान, ड्रैगन जैसा शरीर और शेर की पूंछ थी।

दीटिंग को बुद्धिमत्ता, न्याय और निष्ठा का प्रतीक माना गया है। लोगों का ऐसा मानना है कि उसमें इंसानों के दिल को पढ़ लेने के कारण अच्छाई और बुराई को पहचानने की असीम शक्ति थी।

दीटिंग को लेकर प्रचलित इस कहानी के कारण ही देश भर से लोग इस मंदिर में अपने पालतू जानवरों के साथ आते हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यहाँ पर जालतू जानवरों का प्रवेश निःशुल्क है लेकिन लोगों को अंदर आने के लिए 70 युआन (लगभग 850 रुपए) का टिकट लगता है।

हालाँकि यहाँ लोगों का अपने पालतू जानवरों को लाने का सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि जिन लोगों के पालतू जानवर खो गए हैं, वे लोग उनकी तस्वीर लेकर आते हैं। तस्वीर को दीटिंग को दिखाकर वे देवता से उनके मिल जाने की दुआ भी माँगते हैं।

केवल लोगों की आस्था के लिहाज से ही नहीं बल्कि एक दर्शनीय स्थल के तौर पर भी काफी प्रसिद्ध है। यहाँ कुत्तों के लिए लगभग 1200 रुपए में ताबीज मिलता है। इसके अलावा ट्राम में कुत्तों के लिए खास तौर पर सीटें बनाई गई हैं।

इस स्तूप की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे लेकर नेटिजन्स का कहना है कि ये सभी जीवों के समान होने का प्रतीक है। साथ ही ये इंसान और कुत्तों के बीच के प्यार के लिए ये सबसे बेहतर उदाहरण है।

चीन में दीटिंग को लेकर कई धार्मिक मान्यताएँ भी हैं। दीटिंग के प्रतीक को घरों में सुख समृद्धि के लिए रखा जाता है। दीटिंग को बुराई से रक्षा करने वाला और सुख देने वाला शुभ प्रतीक माना जाता है।

इसके अलावा कहा जाता है कि जिन बच्चों के पास दीटिंग का प्रतीक होता है, वे बुद्धिमान, ईमानदार और ज्ञानी बनते हैं। बड़े-बुजुर्गों को दीटिंग के माध्यम से प्रार्थनाओं के उत्तर मिलते हैं।

दीटिंग को लेकर एक नहीं कई किंवदंतियाँ हैं प्रचलित

दीटिंग को लेकर चीन में कई किंवदंतियाँ प्रचलित हैं। एक अन्य कहानी सिल्ला (वर्तमान कोरिया) के 24 वर्षीय राजकुमार गिम ग्यो-गाक से जुड़ी हुई है। ये राजकुमार चीन के तांग वंश के समय में थे। उन्होंने सांसारिक जीवन से ऊबकर साधु बनने का निर्णय लिया। यात्रा में उनका अपना सफेद कुत्ता भी साथ था।

कहानी के अनुसार, गिम ग्यो-गाक का कुत्ता हमेशा उनके साथ रहा। लोगों का मानना है कि उस कुत्ते में दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की असीम शक्ति थी। वर्ष 794 में गिम ग्यो-गाक की ध्यान मुद्रा (zazen position) के दौरान ही मृत्यु हुई थी। उस समय भी उनका सफेद कुत्ता वहाँ पर उपस्थित था।

ऐसा कहा जाता है कि उनके शव को 3 वर्ष बाद खोलने पर भी उनका चेहरा ऐसा लग रहा था कि जैसे वे जीवित हों। उनके शव की रहस्मयी हालत को देखकर लोग गिम ग्यो-गाक को बोधिसत्व क्षितिगर्भ का अवतार मानने लगे। बाद में उनके लिए एक मंदिर बनाया गया। इस मंदिर में उनके साथ उनके कुत्ते को भी प्रतिष्ठित किया गया।

बौद्ध अनुयायियों ने गिम ग्यो-गाक को गिम क्षितिगर्भ नाम दिया और उनके कुत्ते को एक देवता का रूप मानते हैं। दीटिंग को एक शुभ देवता कुत्ता माना जाने लगा। ये बौद्ध शिक्षाओं का प्रतीक है, जीवन के मार्गदर्शन करता है और बुराई से रक्षा करता है।

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