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बम-बंदूक की जगह सड़क, रोजगार और 4G नेटवर्क: बस्तर में खत्म हुआ ‘लाल आतंक’ तो बहने लगी विकास की बयार, जानें कैसे डबल इंजन की सरकार की रणनीति ने बदली तस्वीर

बस्तर में जो बदलाव हो रहा है, वह एक बड़ा परिवर्तन है। यह दिखाता है कि नक्सलवाद या वामपंथी उग्रवाद का स्थायी हल केवल सुरक्षा बलों और हथियारों में नहीं है। असली समाधान है सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएँ लोगों तक पहुँचाना।

छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका कई सालों से नक्सल हिंसा और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। सुरक्षा में सुधार और लगातार विकास के कामों ने इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर के 250 गाँवों के लिए ग्रामीण बस सेवा शुरू की है। वहीं, बीजापुर के कोंडापल्ली गाँव में पहली बार 4G मोबाइल नेटवर्क पहुँचा है। यह दोनों बातें दिखाती हैं कि बस्तर अब धीरे-धीरे बाकी दुनिया से जुड़ रहा है।

यह बदलाव सिर्फ नई सुविधाएँ देने तक सीमित नहीं है। यह राज्य सरकार की ‘समन्वित विकास और सुरक्षा’ नीति का सीधा नतीजा है। ताजा आँकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2023 से अब तक चलाए गए अभियानों में 445 नक्सली मारे गए हैं और 1588 ने आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षाबलों की इस सफलता के बाद ‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाएँ तेजी से आगे बढ़ पाई हैं। इन योजनाओं की मदद से सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएँ अब उन जंगलों तक पहुँच रही हैं, जहाँ पहले पहुँचना लगभग असंभव था।

ये बदलाव लोगों में भरोसा बढ़ा रहे हैं और उन्हें सरकार व मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। यही वह चीज है जो लंबे समय से नक्सली प्रभाव को कमजोर करने के लिए सबसे जरूरी थी। अब बस्तर के लोग खुद अपने जीवन में विकास को महसूस कर रहे हैं और यही असली बदलाव है।

सुरक्षा अभियानों की सफलता और विकास का खुलता रास्ता

बस्तर में विकास की शुरुआत तभी हुई, जब सरकार ने नक्सलवाद से निपटने पर मजबूत पकड़ बनाई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गृह मंत्री अमित शाह को बताया था कि राज्य सरकार ‘समन्वित विकास और सुरक्षा’ की नीति पर काम कर रही है। मतलब साफ है, सिर्फ बंदूक से नक्सलवाद खत्म नहीं होंगे, इसके लिए लोगों की जिंदगी में विकास पहुँचाना भी उतना ही जरूरी है।

दिसंबर 2023 से अब तक सरकार को बड़ी सफलता मिली है। 33 बड़ी मुठभेड़ों में 445 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें कई बड़े नेता भी थे। लगभग 1554 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं और 1588 ने आत्मसमर्पण किया है। ये आँकड़े दिखाते हैं कि नक्सलवाद का नेटवर्क अब पहले जितना मजबूत नहीं रहा।

संवेदनशील इलाकों में नए सुरक्षा कैम्प बनाए गए हैं। इन कैम्पों की वजह से नक्सली हमले कम हुए और सरकार के अधिकारी उन गाँवों तक पहुँच पाए, जहाँ पहले जाना मुश्किल था। इसी से कोंडापल्ली जैसे गाँवों में सड़क, बिजली और नेटवर्क जैसी सुविधाएँ पहुँचना संभव हुआ।

वहीं, सुकमा के कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने बताया कि CRPF और पुलिस के साथ मिलकर प्रशासन ‘सिविक एक्शन प्रोग्राम’ चला रहा है। इसके तहत, गाँव वालों को साइकिलें दी जा रही हैं। पहले लोगों को राशन या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचने के लिए 5-10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, लेकिन अब साइकिल से उनकी जिंदगी बहुत आसान हो गई है।

जब सुरक्षा मिली, तब लोगों में भी हिम्मत आई। जो गाँव पहले डर के कारण नक्सलियों का साथ देने को मजबूर थे, अब खुलकर सरकार के साथ खड़े हैं। यही भरोसा इस लड़ाई की सबसे बड़ी जीत है। यह बदलाव दिखाता है कि बस्तर अब धीरे-धीरे डर से निकलकर विकास की राह पकड़ रहा है।

विकास के माध्यम से मुख्यधारा से जुड़ाव

सरकार ने पहले सुरक्षा को मजबूत बनाया और उसी भरोसे के साथ ‘नियद नेल्ला नार’ योजना को कामयाब बनाया। इस योजना का मकसद है कि 403 गाँवों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाई जाएँ, जो 69 नए सुरक्षा कैम्पों के आसपास बसे हैं।

इस योजना के तहत, 9 विभागों की 18 सामुदायिक सेवाएँ और 11 विभागों की 25 लाभकारी योजनाएँ सीधे लोगों तक पहुँच रही हैं। इसमें सड़क बनाना, बिजली कनेक्शन, स्कूल और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ और पीने का पानी जैसी जरूरी सुविधाएँ शामिल हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर के 250 गाँवों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा शुरू की। पहले नक्सलवाद खतरे की वजह से इन गाँवों में बस नहीं आती थी। अब 36 नई बसें शुरू होने से ये गाँव शहरों, अस्पतालों और जिला मुख्यालयों से सीधे जुड़ गए हैं। इससे लोगों का आवागमन आसान हुआ है और स्थानीय कारोबार और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

कोंडापल्ली की कहानी: डिजिटल कनेक्टिविटी का उत्सव

कोंडापल्ली गाँव की कहानी बस्तर में हो रहे बदलाव को बहुत अच्छे से दिखाती है। यह गाँव तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर घने जंगलों में है, जहाँ दशकों तक सड़क, बिजली या पानी जैसी कोई सुविधा नहीं थी। जब पूरे देश में लोग 5G नेटवर्क की बातें कर रहे हैं, तब कोंडापल्ली में पहली बार 4G मोबाइल नेटवर्क आना एक बड़ी बदलाव है। नक्सली हिंसा के कारण यह गाँव सालों तक बाहर की दुनिया से कटा हुआ था।

जैसे ही मोबाइल टावर चालू हुआ, गाँव वाले इसे सिर्फ तकनीकी सुविधा नहीं बल्कि ‘दुनिया से जुड़ने का पहला असली रास्ता’ मानने लगे। महिलाएँ, पुरुष और बच्चे मिलकर रैली निकाले, टावर की पूजा की और मांदर की थाप पर नाचने लगे। सुरक्षा बलों ने भी इसमें हिस्सा लिया और मिठाइयाँ बाँटी। यह दिखाता है कि विकास ने लोगों में उम्मीद और खुशी जगाई है।

अब मोबाइल नेटवर्क से गाँव वाले डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठा पाएँगे। वे अब बैंकिंग, आधार, राशन, पेंशन, ऑनलाइन पढ़ाई और टेलीमेडिसिन जैसी सेवाएँ घर बैठे इस्तेमाल कर सकेंगे। पहले इसके लिए उन्हें मीलों दूर जंगलों में पैदल जाना पड़ता था।

कोंडापल्ली गाँव में मोबाइल नेटवर्क आने के साथ-साथ अन्य विकास के काम भी तेजी से चल रहे हैं। केवल दो महीने पहले ही गाँव में पहली बार बिजली लाइन पहुँची। इससे बच्चों की पढ़ाई आसान हुई है और छोटे व्यवसाय भी चलाने में मदद मिली है।

सुरक्षा कैंप बनने के बाद बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) लगभग 50 किलोमीटर सड़क का निर्माण तेजी से कर रही है। इसके अलावा, सेचुरेशन शिविरों के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर परिवार को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ बिना किसी रुकावट के मिले।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सही कहा है कि कोंडापल्ली में मोबाइल नेटवर्क का पहुँचना ‘सिर्फ एक टावर का खड़ा होना नहीं है, यह उन लोगों के सपनों का उठ खड़ा होना है जो वर्षों से दुनिया से कटे हुए थे।’

विश्वास, बदलाव और बस्तर का भविष्य

बस्तर में जो बदलाव हो रहा है, वह एक बड़ा परिवर्तन है। यह दिखाता है कि नक्सलवाद या वामपंथी उग्रवाद का स्थायी हल केवल सुरक्षा बलों और हथियारों में नहीं है। असली समाधान है सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएँ लोगों तक पहुँचाना। जब नक्सली ग्रामीणों को विकास से दूर रखने की कोशिश करते हैं, तो सरकार का यह कदम उनकी सोच और ताकत को कम करता है।

यहाँ केंद्रीय और राज्य सरकार की ‘डबल इंजन’ नीति साफ नजर आती है। केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में सुरक्षा अभियान तेज हुए, जिससे नक्सली प्रभावित इलाकों में उनका दबदबा कम हुआ। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाएँ तेजी से विकास के काम कर रही हैं। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और संचार के इन कामों ने लोगों का भरोसा जीतकर नक्सली प्रभाव को कमजोर किया।

बस्तर का यह मॉडल सिर्फ छत्तीसगढ़ के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के उन क्षेत्रों के लिए उदाहरण है जहाँ नक्सली या अन्य उग्रवादी हैं। यह दिखाता है कि जब सरकार स्थानीय लोगों का भरोसा जीत लेती है, तो विकास खुद ही एक क्रांति बन जाता है। जैसे डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि आज भी हमारे राज्य में ऐसे युवा हैं जिन्होंने कभी टीवी नहीं देखा, लेकिन अब उनके गाँव में 4G मोबाइल टावर खड़े हैं। यह केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में नए अवसर और गौरव की बहाली है।

आज बस्तर ‘भरोसा, बदलाव और नई संभावनाओं’ के युग में कदम रख रहा है। यह बताता है कि सुरक्षा, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और तीव्र विकास नीति के साथ सबसे कठिन इलाकों में भी शांति और समृद्धि लाई जा सकती है। अब बस्तर के हर गाँव के लोग मुख्यधारा से जुड़ने और राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनने के लिए तैयार हैं।

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