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वक्फ कानून का विरोध बहाना था, पूरी प्लानिंग के साथ की गई हिंदू पिता-पुत्र की हत्या: बंगाल की अदालत ने 13 मुस्लिमों को दी उम्रकैद, ममता का प्रोपेगेंडा भी किया ध्वस्त

मुर्शिदाबाद में वक्फ विरोधी हिंसा की आड़ में निर्दोष पिता-पुत्र की हत्या हुई, लेकिन कानून-व्यवस्था की विफलता पर जवाबदेही तय करने के बजाए ममता सरकार ने भाजपा-आरएसएस पर आरोप लगाए।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर की एक ट्रायल कोर्ट ने सोमवार (22 दिसंबर 2025) को 72 साल के हरगोबिंदो दास और उनके 40 साल के बेटे चंदन दास की हत्या के मामले में 13 मुस्लिमों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह घटना 12 अप्रैल 2025 को मुर्शिदाबाद के धुलिया जिले की है, जब भीड़ ने बाप और बेटे को घर से खींचकर बेरहमी से हत्या कर दी थी।

आरोपितों की पहचान दिलदार नदाब, अस्माउल नदाब उर्फ कालू नदाब, इंजामुल हक, जियाउल हक, फेकारुल शेख, अजफरुल शेख उर्फ बिलाई, मोनिरुल शेख, एकबाल शेख, नुरुल शेख, सबा करीम, हजरत शेख, हरजत अली, अकबर अली उर्फ एकबर शेख और यूसुफ शेख उर्फ शेख यूसुप के रूप में की गई।

इन सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(2), 310(2), 331(5), 191(3), 115(2), 126(2), 332(a) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर दोषी ठहराया गया। जांगीपुर उपमंडल न्यायालय के न्यायाधीश अमिताभ मुखोपाध्याय ने 23 दिसंबर 2025 को इन सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

विशेष लोक अभियोजक बिवास चटर्जी ने बताया, “सभी 13 आरोपितों को हत्या, डकैती, जबरन प्रवेश, घातक हथियार से दंगा, चोट पहुँचाने और अवैध रूप से बँधक बनाने सहित अन्य BNS धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है। बंगाल में दोहरे हत्याकांड के मामले में यह सबसे तेज सजाओं में से एक है।”

आरोपितों को हत्या, लूट, घर में घुसपैठ, घातक हथियारों से दंगा और मारपीट सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में दोषी पाया गया। मामले की जाँच 25 सदस्यीय SIT ने की थी, जिसने तीन राज्यों में छापेमारी कर 983 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।

परिवार ने कलकत्ता HC का दरवाजा खटखटाया, फैसले के बाद BJP नेता ने दी प्रतिक्रिया

कलकत्ता हाईकोर्ट में इस मामले की जाँच CBI से कराने की माँग को लेकर पीड़ित परिवार की याचिका पहले से दाखिल है, जिस पर सुनवाई अभी लंबित है। हरगोबिंदो दास की पत्नी ने कहा है कि आरोपितों को सजा सुनाए जाने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

वहीं, फैसले के बाद BJP नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता बनर्जी के शासन में पश्चिम बंगाल हिंदू बंगालियों के लिए लगातार असुरक्षित होता जा रहा है और उन्हें निशाना बनाकर हिंसा की जा रही है। उन्होंने पिता-पुत्र की भीड़ द्वारा की गई हत्या को इस गंभीर स्थिति का दुखद और चिंताजनक उदाहरण बताया।

यह दिल दहला देने वाली घटना इलाके में वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ हुई हिंसक आंदोलन के बाद सामने आई थी। हालाँकि, BJP नेता अमित मालवीय ने कहा कि कोर्ट के जज ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा है कि इस हत्या का वक्फ से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर लोगों को गुमराह करने और असली जिम्मेदारी से ध्यान हटाने की कोशिश की गई।

मालवीय ने आगे कहा कि सजा मिलने से पीड़ित परिवार का नुकसान पूरा नहीं हो सकता और इससे राज्य में रह रहे हिंदुओं के मन से डर खत्म नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून-व्यवस्था, सभी को समान सुरक्षा और सच्चाई से किसी भी राजनीतिक फायदे के लिए समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

हरगोबिंदो दास की पत्नी पारुल दास ने याद किया वो भयावह मंजर

दिवंगत हरगोबिंदो दास की पत्नी पारुल दास ने मई महीने में घटना का आँखों देखा हाल बताया था। उन्होंने कहा, “सबसे पहले भीड़ ने हमारी दुकान तोड़ी, सारा सामान लूट लिया और चली गई। बाद में लौटकर उन्होंने हमारी रसोई को तोड़ दिया। फिर छत पर पत्थर, काँच और बोतलें फेंकी गईं। बाड़ के दूसरी तरफ से ईंट-पत्थर बरसाए गए। तीसरी बार जब वे आए, तो उनके हाथों में फावड़े, बेलचे और धारदार हथियार थे।”

पारुल दास ने आगे बताया, “पिता और बेटा वहीं खड़े थे। भीड़ ने दोनों को घसीटकर बाहर निकाला। मेरे पति को नाले के पास मार डाला गया और मेरे बेटे को उस पेड़ के नीचे।” जब उनसे पूछा गया कि क्या पुलिस मदद के लिए आई थी, तो उन्होंने कहा, “नहीं, कुछ भी नहीं। अगर तीसरी बार पुलिस आ जाती, तो यह हत्या नहीं होती। पुलिस चार घंटे बाद आई।” उन्होंने बताया कि टीवी पर दिखाई गई तस्वीरों से ही वह हमलावरों को पहचान सकीं।

पारुल दास ने कहा, “हम डर के साए में जी रहे हैं। हमें यहाँ BSF कैंप चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें आज तक समझ नहीं आया कि उनके परिवार के साथ इतनी क्रूरता क्यों की गई, क्योंकि “हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी।” इसके साथ ही पारुल दास और उनकी बहू पिंकी दास ने पश्चिम बंगाल पुलिस और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कुछ लोगों पर उन्हें परेशान करने का आरोप भी लगाया।

घटना के समय पश्चिम बंगाल में वक्फ संशोधन कानून को लेकर भारी हिंसा फैल रही थी और मुर्शिदाबाद जिला भी इससे बचा हुआ नहीं था। 11 और 12 अप्रैल को समसेरगंज के धुलियान नगरपालिका और तीनपाकुड़िया ग्राम पंचायत इलाके में हालात इतने बिगड़ गए कि कई लोगों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा। इस दौरान घरों और गाड़ियों में आग लगा दी गई और जमकर तोड़फोड़ हुई।

इसी माहौल का फायदा उठाकर उसी इलाके के रहने वाले 13 आरोपितों ने इस वारदात को अंजाम दिया, जबकि यह हत्या सीधे तौर पर आंदोलन से जुड़ी नहीं थी। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, हमलावर तलवारों और लाठियों से लैस थे।

बाद में जो हथियार बरामद हुआ, वह तलवार जैसा एक धारदार औजार था, जिसके ऊपरी हिस्से में 90 डिग्री का मोड़ था। वहीं, SIT की चार्जशीट में बताया गया है कि पास की एक मस्जिद पर सुरक्षाबलों द्वारा फायरिंग की अफवाह फैल गई थी। इसी अफवाह के बाद नाराज भीड़ बेकाबू हो गई, घरों में आगजनी की गई और इसी हिंसा के दौरान पिता-पुत्र की बेरहमी से हत्या कर दी गई।

ममता बनर्जी की राजनीतिक साजिशें खोजने की कोशिश

यह साफ है कि यह हत्या एक नाराज और हिंसक भीड़ की दरिंदगी का नतीजा थी और इसका केंद्र सरकार के किसी कानून से सीधा कोई संबंध नहीं था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्दोष हिंदुओं की सुरक्षा में राज्य सरकार की नाकामी स्वीकार करने के बजाए इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी करना चुना।

इस्लामी इमामों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद की हिंसा को पूर्व-नियोजित बताया और इसके लिए BJP को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “कल मैंने ANI पर एक ट्वीट देखा, जिसमें गृह मंत्रालय के हवाले से कहा गया था कि इसमें बांग्लादेश की भूमिका है। अगर यह सच है, तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की बनती है। सीमा की सुरक्षा BSF करती है, राज्य सरकार नहीं। फिर आपने BJP के लोगों को बाहर से आकर यहाँ अशांति फैलाने और भाग जाने की इजाजत क्यों दी?”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाते हुए कहा कि हिंसा के लिए केंद्र दोषी है। उन्होंने दावा किया कि वह यह पता लगाएँगी कि सीमा क्षेत्रों में BSF ने किन स्थानीय युवकों को पैसे देकर पत्थरबाजी करवाई।

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए कहा कि वक्फ संशोधन कानून खतरनाक है और देश को बांट देगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस कानून को लागू न करने की अपील की। साथ ही, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए देश को नुकसान पहुँचा रहे हैं और प्रधानमंत्री से उन्हें रोकने की माँग भी की। ममता ने यह भी दोहराया कि उनकी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस वक्फ कानून के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे है।

आलोचकों का कहना है कि बंगाल में फैली हिंसा को ममता बनर्जी और TMC नेताओं के भड़काऊ और विभाजनकारी बयानों ने और हवा दी। इसके बावजूद, ममता ने अशांति के लिए सभी को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन न तो कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस की जवाबदेही तय की और न ही अपनी सरकार की विफलता स्वीकार की।

राज्य सरकार की नाकामी SIT की चार्जशीट में भी साफ नजर आती है। प्रशासन न तो अफवाहों को रोक सका और न ही हिंसक तत्वों पर काबू पा सका, जो पूरे इलाके में उत्पात मचाते रहे। पीड़िता पारुल दास ने भी पुलिस की गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करते हुए कहा था कि अगर पुलिस चार घंटे देर से नहीं आती, तो उनके पति और बेटे की जान बच सकती थी।

इसके बावजूद, वक्फ संशोधन कानून के नाम पर जब बंगाल में कट्टरपंथी हिंसा फैला रहे थे, तब भी TMC प्रमुख ममता बनर्जी लगातार ऐसे बयान देती रहीं जो इन तत्वों की भाषा से मेल खाते थे और साथ ही BJP पर हमले करती रहीं।

ममता बनर्जी ने RSS पर जमकर निशाना साधा

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा को लेकर BJP के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP, उसके सहयोगी दल और RSS राज्य में हिंसा को लेकर झूठ और भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।

ममता बनर्जी ने कहा, “BJP और उसके सहयोगी जो फैला रहे हैं, वह पूरी तरह गलत और संकीर्ण सोच पर आधारित है। उनकी बातें झूठ और गलत व्याख्याओं से भरी हैं। लोगों को उन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। वे दंगे भड़काना चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि BJP पश्चिम बंगाल में अचानक बहुत आक्रामक हो गई है और RSS भी उनके साथ शामिल है। “पहले मैंने RSS का नाम नहीं लिया था, लेकिन अब कहना पड़ रहा है कि राज्य में फैलाए जा रहे इन बदसूरत झूठों की जड़ में RSS भी है,” उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि BJP और RSS एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना का राजनीतिक फायदा उठाकर समाज को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे विभाजन की राजनीति करना चाहते हैं और ‘फूट डालो, राज करो’ का खेल खेल रहे हैं, जो बेहद खतरनाक है।”

ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि BJP और RSS उस सार्वभौमिक हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें उनके अनुसार सभी धर्म शामिल हैं, हिंदू, इस्लाम, ईसाई, बौद्ध, जैन और यहूदी धर्म।

ममता की यह प्रतिक्रिया उस समय आई, जब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने राज्य में फैली अराजकता को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए हालात को अजीब और बर्बर बताया था। वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी कहा कि राज्य सरकार हिंसा को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही।

निष्कर्ष

वक्फ संशोधन कानून के विरोध में हुई हिंसक प्रदर्शन को बहाना बनाकर दास परिवार के दो लोगों की हत्या की गई, जबकि उनका इस आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था। इस दौरान नाराज भीड़ ने पिता और बेटे की जान ले ली।

लेकिन इस घटना के बाद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाने या कानून-व्यवस्था पर सख्ती करने के बजाय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने BJP और RSS पर निशाना साधा। आलोचकों का कहना है कि वह अपने वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहती थीं, जबकि उसी दौरान राज्य में हिंसा और अराजकता फैली हुई थी।

राज्य में दंगे हो रहे थे, हिंदुओं की जान जा रही थी, लेकिन ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता व्यवस्था बहाल करने के बजाय वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी में लगे रहे।

बाद में जब हालात की गंभीरता सामने आई, तो मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार और प्रशासन की कमियों पर ध्यान देने के बजाय BJP और RSS पर आरोप लगाना शुरू कर दिया, मानो जमीनी हालात उनकी सरकार की नाकामी का नतीजा न हों।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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