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शेख हसीना की विदाई के बाद पाकिस्तान की राह चला बांग्लादेश, दिसंबर 2025 में 9 हिंदुओं की नृशंस हत्याएँ: जानें कौन थे पीड़ित और हालात कैसे हुए भयावह?

जून 2025 में OpIndia ने कम से कम 13 ऐसे मामलों की रिपोर्ट की थी, जिनमें हिंदुओं को झूठे ईशनिंदा आरोपों, भीड़ की हिंसा और सुनियोजित हमलों का शिकार बनाया गया। यानी यह हिंसा कोई अचानक पैदा हुई स्थिति नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही एक गंभीर समस्या का हिस्सा है।

बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद से देश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति लगातार अस्थिर बनी हुई है। अंतरिम शासन और आने वाले संघीय चुनावों के बीच, अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हिंसा, उत्पीड़न और हत्याओं की घटनाएँ दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।

संघीय चुनाव नजदीक होने के कारण, मुहम्मद यूनुस शासन ने हिंसक मुस्लिम भीड़ और कट्टरपंथी तत्वों को देश में अराजकता और अशांति फैलाने की खुली छूट दे दी है। दिसंबर 2025 में ही हिंदुओं की कम से कम 9 नृशंस हत्याएँ सामने आ चुकी हैं।

स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आए मामलों के अनुसार, हालात इतने गंभीर हैं कि यह आँकड़ा वास्तविक संख्या से कहीं अधिक हो सकता है। नीचे दिसंबर में सामने आए 9 प्रमुख मामलों का विवरण दिया जा रहा है, जो बांग्लादेश में हिंदुओं की मौजूदा स्थिति को उजागर करता है।

नरसिंदी में प्रांतोस कर्मकार की हत्या

2 दिसंबर को नरसिंदी जिले में 42 वर्षीय हिंदू व्यवसायी प्रांतोस कर्मकार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह एक ज्वेलरी की दुकान के चलाते थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नकाबपोश हमलावरों ने उन्हें घर से बाहर बुलाया, स्कूल के मैदान में ले जाकर सीने में गोली मार दी और फरार हो गए।

प्रांतोष कर्मकार (फोटो साभार: देशशक्ल न्यूज)

बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस अब तक न तो हत्यारों की पहचान कर पाई है और न ही हत्या के मकसद का खुलासा हुआ है।

फरीदपुर में उत्पल सरकार की हत्या

5 दिसंबर की सुबह फरीदपुर जिले में 35 वर्षीय हिंदू मछली व्यापारी उत्पल सरकार की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उनकी वैन रोकी, सीने में वार किया और नकदी लूटकर फरार हो गए।

दिलचस्प बात यह है कि हमलावरों ने वैन चालक फिरोज मोल्ला को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। उन्हें केवल आँखों पर पट्टी बाँधकर पुल से बाँध दिया गया था। बाद में स्थानीय लोगों ने मोल्ला को बचाया और पुलिस को सूचना दी।

इसके बाद पुलिस ने हिंदू मछली व्यापारी के रक्तरक्त से लथपथ शव को फरीदपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया। पुलिस के अनुसार, उत्पल सरकार की हत्या में 2-3 लोग शामिल थे और मामले की जाँच की जा रही है।

रंगपुर में जोगेश चंद्र रॉय और सुबर्णा रॉय की हत्या

7 दिसंबर की रात रंगपुर जिले में 75 वर्षीय जोगेश चंद्र रॉय और उनकी 60 वर्षीय पत्नी सुबर्णा रॉय की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जोगेश रॉय 1971 के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। पड़ोसियों ने सुबह उनके शव (गले कटे हुए) बरामद किए। अवामी लीग ने इस हत्याकांड के पीछे जमात-ए-इस्लामी का हाथ होने का आरोप लगाया है।

जोगेश चंद्र रॉय शव (फोटो साभार:ढाका ट्रिब्यून)

जोगेश चंद्र रॉय का शव डाइनिंग रुम में मिला जबकि सुबर्णा रॉय का शव रसोई में मिला। बता दें कि जोगेश चंद्र रॉय और सुबर्णा रॉय के दो बच्चे बांग्लादेश पुलिस बल में काम करते हैं।

कोमिल्ला में शांतो दास की हत्या

12 दिसंबर को कोमिल्ला जिले के होमना उपजिला में शांतो दास नामक एक हिंदू युवक का शव मकई के खेत से बरामद हुआ। वह ऑटो-रिक्शा चालक और ग्राम पुलिस बल के सदस्य थे। इस घटना के बारे में बात करते हुए उनके पिता अरुण चंद्र दास ने कहा था, “मेरा बेटा शांतो ऑटो रिक्शा चलाता था। गुरुवार शाम के बाद से हम उससे संपर्क नहीं कर पा रहे थे।”

(फोटो साभार: बीडीन्यूज24)

उन्होंने आगे कहा, “सुबह हमें पता चला कि उसका शव एक खेत में मिला है। हमने सुना है कि उसका ऑटो रिक्शा अभी तक नहीं मिला है। मुझे लगता है कि उन्होंने मेरे बेटे की हत्या उसका ऑटो रिक्शा चुराने के लिए की।”

पीड़ित का गला कटा हुआ था और गर्दन पर चाकू के कई घाव थे। पुलिस ने शांतो दास का शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए कोमिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया।

मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की हत्या

18 दिसंबर को बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका गाँव में एक हिंसक मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी । मृतक की पहचान 27 वर्षीय दीपू चंद्र दास के रूप में हुई है। पीड़ित को बुरी तरह पीटा गया, पेड़ से बाँध दिया गया और फिर आग लगा दी गई। इस घटना का दिल दहला देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।

दीपू चंद्र दास एक कपड़ा कारखाने में मजदूर के रूप में काम करते थे। विवाद के बाद, उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया।

(फोटो साभार: इंडिया टूडे)

फैक्ट्री के मैनेजर ने दास को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया और उसे एक हिंसक मुस्लिम भीड़ के हवाले कर दिया जिसने उसकी हत्या कर दी। हिंदू व्यक्ति की निर्मम लिंचिंग की घटना पाकिस्तान में हुई भीड़ हिंसा की एक ऐसी ही घटना की याद दिलाती है।

बोगुरा में पिंटू अकांडा की हत्या

23 दिसंबर को बांग्लादेश के बोगुरा जिले के आदमदिघी उपजिला में एक माइक्रोबस से पिंटू अकांडा नामक 35 वर्षीय हिंदू व्यक्ति का शव बरामद किया गया। उन्हें एक दिन पहले चार अज्ञात हमलावरों ने बंदूक की नोक पर अगवा कर लिया था। पीड़ित एक व्यवसायी और लॉटरी शोरूम के मालिक थे।

पिंटू अकांडा (फोटो साभार: प्रोथोम अलो)

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, पिंटू अकांडा की गला घोंटकर हत्या की गई थी। एक बयान में, एएसपी आसिफ हुसैन ने कहा, “हमारा प्राथमिक संदेह है कि पिंटू को बंदूक की नोक पर अगवा करने के बाद गला घोंटकर मार डाला गया था। हम फिलहाल जाँच कर रहे हैं।”

पीड़ित परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अपहरण का सीसीटीवी फुटेज अब सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में चार नकाबपोश लोग पिंटू पर हथियार ताने हुए और उसे उसके शोरूम से बाहर ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद पीड़ित को जबरन गाड़ी में बैठाया गया।

राजबाड़ी में अमृत मंडल की हत्या

24 दिसंबर को अमृत मंडल नामक एक अन्य हिंदू व्यक्ति को उन्मादी भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। यह घटना बांग्लादेश के राजबारी जिले के पांग्शा उपजिला में घटी। पीड़ित की उम्र महज 29 वर्ष थी। वह होसेनडांगा गाँव का निवासी था। अमृत मंडल को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया लेकिन चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

मृत मंडल (फोटो साभार: एनडीटीवी)

बाद में उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए राजबारी सदर अस्पताल के मुर्दाघर भेजा गया। हिंदू व्यक्ति की हत्या के बाद, मोहम्मद यूनुस ने अमृत मंडल को ‘अपराधी’ बताकर उसकी पीट-पीटकर हत्या को उचित ठहराने की कोशिश की। इसके अलावा अंतरिम सरकार के ‘मुख्य सलाहकार’ ने भी इस मामले में ‘सांप्रदायिक पहलू’ को कम करके आँका।

हबीगंज में कामदेव दास की हत्या

हबीगंज जिले में 18 वर्षीय हिंदू युवक कामदेव दास की हत्या ने इलाके में दहशत फैला दी। वह 25 दिसंबर से लापता था और 27 दिसंबर को उसका शव तालाब से मिला। उसके गले पर निशान भी मिले हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों ने इस हत्या के पीछे इस्लामी कट्टरपंथियों का आरोप लगाया है।

मृतक कामदेव दास (फोटो साभार: एक्स @colchaubey)

स्थानीय लोगों के अनुसार, कामदेव गुरुवार (25 दिसंबर 2025) से लापता था। उसके पिता ने थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन परिवार का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

उत्पीड़न और हमलों की अन्य घटनाएँ

हत्याओं के अलावा दिसंबर में हिंदुओं पर हमले और उत्पीड़न की कई घटनाएँ सामने आईं। 19 दिसंबर को सिलहट में एक हिंदू पत्रकार सुशांत दासगुप्ता के घर पर हमला किया गया, वहीं एक रिक्शा चालक को कलावा पहनने पर पीटा गया। उस पर RA&W एजेंट होने का आरोप लगाया गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

दिसंबर 2025 में सामने आए ये 9 हत्याकांड बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की लगातार बिगड़ती स्थिति की एक भयावह तस्वीर पेश करते हैं। ये सभी मामले स्थानीय मीडिया में रिपोर्ट हुए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं अधिक गंभीर मानी जा रही है।

कई घटनाएँ ऐसी भी हैं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर तो सामने आए हैं, लेकिन वे अब तक आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बन सकी हैं। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि वास्तविक आँकड़े कहीं अधिक हो सकते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले जून 2025 में OpIndia ने कम से कम 13 ऐसे मामलों की रिपोर्ट की थी, जिनमें हिंदुओं को झूठे ईशनिंदा आरोपों, भीड़ की हिंसा और सुनियोजित हमलों का शिकार बनाया गया। यानी यह हिंसा कोई अचानक पैदा हुई स्थिति नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही एक गंभीर समस्या का हिस्सा है जो अब और अधिक उग्र रूप लेती जा रही है।

राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर कानून-व्यवस्था और कट्टरपंथी तत्वों को मिल रही खुली छूट ने हिंदू समुदाय को भय और असुरक्षा के माहौल में जीने के लिए मजबूर कर दिया है। अंतरिम सरकार द्वारा कई मामलों में सांप्रदायिक एंगल को नकारना या हिंसा को सामान्य अपराध बताकर टाल देना स्थिति की गंभीरता को और बढ़ाता है। यदि इस बढ़ती कट्टरता पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है।

(यह रिपोर्ट मूल रुप से अंग्रेजी में दिवाकर दत्ता ने लिखी है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

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Dibakar Dutta
Dibakar Duttahttps://dibakardutta.in/
Centre-Right. Political analyst. Assistant Editor @Opindia. Reach me at [email protected]

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