कई वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर होने का खिताब जीत रहा मध्य प्रदेश का इंदौर 2026 की शुरुआत में गंभीर स्वास्थ्य संकट की स्थिति में पहुँच गया है। जिले के भगीरथपुरा इलाके में पानी दूषित होने के कारण कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से ज्यादा लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं।
लोगों ने बताया कि नगर निगम के नल से आने वाला पानी बदबू मार रहा था और दिखने में भी गंदा था। इसी पानी को पीने के बाद लोगों की तबीयत खराब होने लगी। बीमार लोगों में उल्टी, दस्त, बुखार और शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण देखे गए। दूषित पानी पीने की वजह से यह बीमारी तेजी से फैली और कई लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
संकट कैसे बढ़ा: जानें पूरी टाइमलाइन
दिसंबर 2025 के मध्य में सबसे पहले भगीरथपुरा इलाके के लोगों को अपने नल के पानी में गड़बड़ी महसूस हुई। करीब 15 हजार आबादी वाले इस इलाके में नल का पानी रंग बदला हुआ था, उसमें सीवर जैसी बदबू आ रही थी और स्वाद भी कड़वा था। लोगों ने नगर निगम के अधिकारियों से लगातार शिकायत की लेकिन समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 25 दिसंबर तक भी मजबूरी में कई परिवार इसी पानी का इस्तेमाल खाना बनाने और पीने के लिए करते रहे।
27 और 28 दिसंबर को हालात तेजी से बिगड़ गए। दूषित पानी पीने से लोगों को पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ होने लगीं। स्थानीय क्लीनिकों में कमजोरी और डिहाइड्रेशन से जूझते मरीज पहुँचने लगे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घर-घर जाकर जाँच करनी शुरू की। इसके बाद 29 दिसंबर को मामलों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि खराब पानी से फैले दस्त के कारण कम से कम तीन लोगों की मौत हुई जबकि बड़ी संख्या में मरीजों को बड़े अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
30 दिसंबर तक 100 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा और रिपोर्ट्स के अनुसार कुल मिलाकर 1,100 से ज्यादा लोग बीमार हो चुके थे। मरीजों के लक्षण साफ तौर पर पानी से फैलने वाली बीमारियों की ओर इशारा कर रहे थे। इसके बाद घर-घर सर्वे और तेज कर दिए गए। 31 दिसंबर तक मौतों की संख्या को लेकर स्थिति साफ नहीं थी। अधिकारियों ने 4 से 7 मौतों की बात कही जबकि कुछ परिवारों ने छह महीने के एक बच्चे की मौत को भी उसी दूषित पानी से बने दूध से जोड़कर देखा।
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजन को 2 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की। प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई। एक जोनल अधिकारी और एक सहायक इंजीनियर को निलंबित किया गया जबकि एक सब-इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया गया।
1 और 2 जनवरी को लैब की रिपोर्ट से स्थिति पूरी तरह साफ हुई। पानी की सप्लाई में ई. कोलाई, साल्मोनेला और विब्रियो कॉलरा जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए। जाँच में पता चला कि पास के पुलिस चौकी के नजदीक एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही करीब 30 साल पुरानी पाइपलाइन टूट गई थी, जिससे सीवर का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल गया।
इसके बाद टूटी पाइपलाइन को ठीक किया गया, उस हिस्से को अलग कर सफाई का काम शुरू हुआ। इलाके में रोजाना 20 से ज्यादा टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति की गई। अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी कि जाँच पूरी तरह साफ होने तक नल का पानी उबालकर ही इस्तेमाल करें या उसका उपयोग न करें। कुल मिलाकर 1,400 से 2,000 लोग इस संकट से प्रभावित हुए और लोगों को राज्यभर में पानी की व्यवस्था को ठीक करने का का भरोसा दिया गया।
NHRC ने लिया संज्ञान
1 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मीडिया में आई खबरों के आधार पर इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने कहा कि अगर खबरें सही हैं, तो यह पीड़ितों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। एनएचआरसी ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्ते के भीतर पूरी रिपोर्ट माँगी है। आयोग ने माना कि इस तरह की लापरवाही ने लोगों उनमें भी खासकर कमजोर वर्गों के ‘सुरक्षित जीवन’ के अधिकार को नुकसान पहुँचाया है।
जल जीवन मिशन की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता
इसी बीच केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन के तहत जारी एक नई रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पेयजल की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रविवार (4 जनवरी 2026) को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों से लिए गए पानी के सैंपल में से 36.7% पीने के लायक नहीं पाए गए। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब इंदौर में शहर की जल आपूर्ति से जुड़ी समस्या के कारण अब तक 15 मौतों की पुष्टि हो चुकी है।
इंदौर जिले के ग्रामीण इलाकों में केवल 33% घरों तक ही सुरक्षित पीने का पानी पहँच रहा है और यह तय मानकों से काफी कम है। कुछ जिलों जैसे अलीराजपुर में स्थिति बेहतर रही और 100% घरों में पानी मिला जबकि अनूपपुर में यह आँकड़ा शून्य रहा। ग्वालियर में 20.9%, मुरैना में 25.2% घरों को ही पीने लायक पानी मिला। भोपाल में यह आँकड़ा 56.9% और जबलपुर में 54.3% रहा।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि करीब 23.4% घरों को नियमित जल आपूर्ति नहीं मिल रही थी। जाँच के दौरान 36.7 प्रतिशत जगहों पर नल खराब पाए गए। हालाँकि सिर्फ 3.7% लोगों ने पानी के स्वाद की शिकायत की लेकिन 22% लोगों ने कहा कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेतावनियाँ वर्षों तक रहीं अनसुनी
यह संकट अचानक नहीं आया। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साल 2016-17 में इंदौर में 60 जगहों पर भूजल की जाँच की थी, जिनमें भगीरथपुरा भी शामिल था। जाँच में लगभग सभी जगहों पर टोटल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा 100 मिलीलीटर में 10 MPN से ज्यादा पाई गई। यह साफ संकेत था कि खराब पाइपलाइन और ड्रेनेज के जरिए मल-मूत्र से जुड़ा सीवर का पानी पीने के पानी में मिल रहा है।
बोर्ड ने इंदौर नगर निगम को साफ निर्देश दिए थे कि इन हैंडपंपों और कुओं को असुरक्षित घोषित किया जाए, वहाँ चेतावनी बोर्ड लगाए जाएँ और सीवर के पानी को सप्लाई लाइन में मिलने से रोका जाए। इसके बावजूद शहर के बड़े हिस्से में लगातार दिक्कतें बनी रहीं।
इंदौर की जल व्यवस्था पर चिंता 2019 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में भी सामने आई थी। यह रिपोर्ट इंदौर और भोपाल के जल प्रबंधन पर थी। इसमें बताया गया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक से 200 मिलियन डॉलर का कर्ज मंजूर किया गया था ताकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में पानी और स्वच्छता ढाँचे को सुधारा जा सके और सभी को साफ व नियमित पानी मिले।
2019 की कैग रिपोर्ट ने हालात की पोल खोल दी। रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर में रोजाना सिर्फ 4 जोन में ही पानी की सप्लाई होती थी, जबकि भोपाल में यह संख्या 5 जोन तक सीमित थी। कुल 9.41 लाख परिवारों में से करीब 5.30 लाख परिवारों के पास ही नल कनेक्शन था।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पानी की लीकेज ठीक करने में 22 से लेकर 108 दिन तक लग जाते थे। साल 2013 से 2018 के बीच 4,481 पानी के सैंपल खराब पाए गए। इसी दौरान भोपाल में 3.62 लाख और इंदौर में 5.33 लाख परिवारों को साफ पानी नहीं मिला। इन वर्षों में पानी से फैलने वाली बीमारियों के करीब 5.45 लाख मामले दर्ज हुए।
पानी की भारी बर्बादी भी सामने आई। नगर निकायों की टैक्स वसूली भी कमजोर रही और बकाया राशि 470 करोड़ रुपए तक पहुँच गई। पानी की उपलब्धता भी बेहद कम थी। भोपाल में प्रति व्यक्ति रोजाना सिर्फ 9 से 20 लीटर और इंदौर में 36 से 62 लीटर पानी की सप्लाई हो रही थी।
कैग रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पानी की टंकियों की नियमित सफाई नहीं होती थी और न ही पानी की बर्बादी रोकने के लिए कोई ऑडिट किया गया। विशेषज्ञों ने इसे आपराधिक लापरवाही बताया। उनका कहना है कि सीवर लाइनों को पीने के पानी की पाइपलाइनों के बेहद पास और लापरवाही से बिछाया गया। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि अगर सिर्फ एक भी पाइपलाइन सही हालत में होती, तो शायद किसी की जान नहीं जाती।
सरकारी कार्रवाई और आधिकारिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी लेते हुए X पर सख्त कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने इंदौर नगर निगम आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए। साथ ही अतिरिक्त आयुक्त को पद से हटा दिया गया और जल कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंता (सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर) को भी उनके पद से हटा दिया गया। खाली हुए पदों पर तुरंत अधिकारियों की तैनाती कर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए।
आज सुबह मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ इंदौर के दूषित पेयजल प्रकरण में राज्य शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी चर्चा की।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) January 2, 2026
इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस…
31 दिसंबर को शुरुआती स्तर पर ही मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी माधव प्रसाद हसानी ने कहा कि मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज देना सरकार की प्राथमिकता है। दूषित पाइपलाइन को तुरंत ठीक किया गया और रोजाना 20 से ज्यादा टैंकरों के जरिए सुरक्षित पानी की सप्लाई शुरू की गई। घर-घर जाकर जाँच करने पर सैकड़ों नए मरीज सामने आए जबकि अस्पतालों में अब भी करीब 200 मरीज भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है।
हसानी ने ANI से कहा, “फिलहाल वरिष्ठ डॉक्टर और जिला प्रशासन के अधिकारी लगातार अस्पतालों में हालात पर नजर रखे हुए हैं और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मरीजों को सही इलाज मिले। अभी रिकॉर्ड के अनुसार चार मौतें हुई हैं। हालाँकि, अगर आगे कोई अतिरिक्त डेटा या सबूत मिलता है तो आँकड़ों को अपडेट किया जाएगा।”
(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में श्रीति सागर ने लिखी है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।)


