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प्रतीक जैन पर ED की स्ट्राइक और ममता बनर्जी की छटपटाहट: जानें कोयला घोटाले से लेकर शेल कंपनियों तक, कैसे भ्रष्टाचार के दलदल में धंसी है I-PAC

ED की जाँच में पता चला कि कोयला खनन घोटाले में शामिल हवाला ऑपरेटरों में से एक ने I-PAC को करोड़ों रुपए ट्रांसफर करने में मदद की थी।

भारतीय राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC के सह-संस्थापक प्रतीक जैन अब कोयला खनन घोटाले से जुड़े कथित संबंधों के कारण जाँच के घेरे में आ गए हैं। इसी सिलसिले में 8 जनवरी 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता और बिधाननगर में कई ठिकानों पर छापेमारी की।

ED की टीम ने साल्ट लेक स्थित एक इमारत की 11वीं मंजिल पर मौजूद I-PAC के दफ्तर की तलाशी ली। इसके साथ ही I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और कोलकाता के बड़ाबाजार (पोस्ता इलाके) में एक व्यापारी के कार्यालय पर भी छापेमारी की गई।

प्रतीक जैन तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के IT सेल के प्रमुख भी हैं। यही वजह है कि प्रतीक जैन के खिलाफ ED की इस कार्रवाई से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुरी तरह भड़क गईं और छापेमारी के दौरान काफी हंगामा देखने को मिला।

जब ED की तलाशी चल रही थी, तब ममता बनर्जी अचानक प्रतीक जैन के घर पहुँच गईं। उन्होंने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ED ने हमारे आईटी विंग और उसके प्रमुख के घर और दफ्तर पर छापा मारा है। वे हर तरह की जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं।” ममता बनर्जी ने आगे बताया कि उन्होंने प्रतीक जैन से बात की है और वे उनकी पार्टी के काम के इंचार्ज हैं।

I-PAC, कोयला घोटाला और TMC के गोवा चुनाव अभियान का कनेक्शन

I-PAC की स्थापना 2013 में चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने की थी, जो ‘सिटिजन्स फॉर एकाउंटेबल गवर्नेंस’ (CAG) की उत्तराधिकारी संस्था है। I-PAC एक राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म है जो भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति, डेटा विश्लेषण और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने जैसी सेवाएँ देती है। साल 2019 से ही I-PAC के तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के साथ बेहद करीबी रिश्ते रहे हैं और इसी फर्म ने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी को एक निर्णायक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

हालाँकि, 2021 में प्रशांत किशोर के बाहर होने और ऋषि राज सिंह, प्रतीक जैन व विनेश चंदेल द्वारा निदेशक के रूप में कमान संभालने के बाद, I-PAC को चुनावी झटके झेलने पड़े हैं। साल 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में I-PAC की क्लाइंट ‘आम आदमी पार्टी’ को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले, 2024 में आंध्र प्रदेश में भी I-PAC अपनी क्लाइंट ‘YSRCP’ के पक्ष में माहौल बनाने में नाकाम रही, जहाँ भाजपा-तेलुगु देशम पार्टी (TDP) गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की थी।

(फोटो साभार: I-PAC website)

इसके अलावा, I-PAC वित्तीय अनियमितताओं, संदिग्ध फंडिंग और राजनीतिक भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के कारण जाँच के घेरे में आ गई है। ED की मौजूदा कार्रवाई उन सबूतों पर आधारित है, जो पश्चिम बंगाल के कोयला खनन घोटाले से जुड़े हवाला लेन-देन में प्रतीक जैन की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।

जाँच एजेंसी का कहना है कि कोयला तस्करी से हुई अवैध कमाई को ठिकाने लगाने वाले एक हवाला ऑपरेटर ने ‘इंडियन पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड’ (I-PAC) को कई करोड़ रुपए पहुँचाने में मदद की थी। ED ने स्पष्ट किया कि ये छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही जाँच का हिस्सा है।

साल 2020 में अवैध कोयला खनन घोटाले के मामले में एक FIR दर्ज की गई थी। जाँच में खुलासा हुआ कि पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले और उसके आसपास ‘ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड’ (ECL) के लीज क्षेत्र से बड़े पैमाने पर कोयला निकाला और चुराया जा रहा था। यह पूरा खेल रेलवे, CISF के अधिकारियों और अन्य संबंधित विभागों की मिलीभगत से चल रहा था। आगे की जाँच में इस मामले में हवाला ऑपरेटरों की मौजूदगी के सबूत भी मिले।

जाँच में यह बात सामने आई कि अवैध रूप से निकाले गए और चोरी किए गए इस कोयले को बर्धमान, पुरुलिया, बांकुरा और पश्चिम बंगाल के अन्य जिलों के प्लांटों में बेचा जा रहा था। जाँचकर्ताओं के अनुसार, इस कोयले का बड़ा हिस्सा ‘शाकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनीज’ को बेचा गया था। जाँच में पाया गया कि दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2020 के बीच ECL के लीज क्षेत्र में अवैध खनन के जरिए टैक्स और रॉयल्टी सहित लगभग ₹2,742.32 करोड़ का गबन किया गया था।

ED की जाँच में यह बात सामने आई है कि इस अवैध खनन सिंडिकेट ने करीब 25.51 लाख मीट्रिक टन (MT) कोयला गैर-कानूनी तरीके से निकाला था, जिसकी कुल कीमत लगभग ₹1,114.35 करोड़ आँकी गई है।

इस पूरे कोयला खनन घोटाले का मास्टरमाइंड अनूप माजी नाम का व्यक्ति बताया जा रहा है। अनूप माजी के आपराधिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि साल 2000 से 2015 के बीच ही उसके खिलाफ करीब 16 FIR दर्ज की जा चुकी थीं।

साल 2020 में CBI ने कोयला चोरी और तस्करी का एक नया मामला दर्ज किया था। जाँच में सामने आया कि मास्टरमाइंड अनूप माजी ने चोरी के कोयले और विभिन्न कंपनियों को की गई उसकी बिक्री का पूरा हिसाब-किताब रखने के लिए कई कर्मचारी तैनात कर रखे थे। जाँच में आगे यह भी खुलासा हुआ कि अनूप माजी के करीबियों के जरिए ‘गुनापद माजी’ नाम के एक व्यक्ति ने 2017 से 2020 के बीच अपराध की कमाई के ₹89 करोड़ ट्रांसफर किए थे। वहीं, एक अन्य आरोपित ‘जयदेव मंडल’ ने भी इसी तरह अवैध कमाई के ₹58 करोड़ इधर-उधर पहुँचाए थे।

जनवरी और अप्रैल 2021 के बीच, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत आरोपितों से जुड़े 46 ठिकानों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की थी। इस पूरे मामले में I-PAC का नाम तब सामने आया, जब ED की जाँच में यह खुलासा हुआ कि कोयला खनन घोटाले से जुड़े एक हवाला ऑपरेटर ने I-PAC को करोड़ों रुपए ट्रांसफर करने में मदद की थी। इस बड़े खुलासे के बाद ही, ED ने I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी शुरू की।

यह आरोप लगाया गया है कि अनूप माजी से मिली कोयला घोटाले की रकम को हवाला के जरिए I-PAC तक पहुँचाया गया था, जिसका इस्तेमाल तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गोवा चुनाव अभियान के लिए किया गया। इस तरह, कोयला घोटाले के पैसों और TMC के गोवा चुनाव की फंडिंग के बीच एक कथित सीधा संबंध सामने आया है। ED का दावा है कि TMC ने 2021 और 2022 के बीच गोवा में ‘20 करोड़ रुपए की अपराध की कमाई‘ का इस्तेमाल किया। जाँच एजेंसी ने इस बात का जिक्र 9 जनवरी 2026 को कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर एक रिट याचिका में किया है।

कोयला खनन घोटाले से हुई काली कमाई को I-PAC और इसके निदेशक प्रतीक जैन तक पहुँचाने के लिए कोलकाता की एक फर्म ‘आर कांति लाल’ और कुछ अन्य हवाला ऑपरेटरों का सहारा लिया गया था। ED का आरोप है कि एक बार जब यह पैसा I-PAC तक पहुँच गया, तो इसका इस्तेमाल 2022 में गोवा में TMC की चुनावी रणनीति और अभियान के लिए किया गया। खास बात यह है कि गुरुवार (8 जनवरी 2026) को हुई छापेमारी के दौरान, ED की टीम ने कोलकाता स्थित ‘आर कांति लाल’ फर्म के दफ्तर पर भी धावा बोला और वहाँ गहन तलाशी ली।

ED के अनुसार, मास्टरमाइंड अनूप माजी के अकाउंटेंट नीरज सिंह और बांकुरा पुलिस के पूर्व प्रभारी अशोक कुमार मिश्रा के बीच 26 अगस्त 2020 को हुई व्हाट्सएप बातचीत से एक बड़ा सुराग मिला है। इस चैट से पता चलता है कि ‘आर कांति लाल’ नाम की फर्म का इस्तेमाल अवैध रास्तों से करोड़ों रुपए की काली कमाई ट्रांसफर करने के लिए किया गया था। गौरतलब है कि बांकुरा के तत्कालीन पुलिस प्रभारी अशोक कुमार मिश्रा को ED ने 2021 में ही गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल मिश्रा जमानत पर बाहर हैं।

ED ने अपनी याचिका में खुलासा किया है कि, “ऐसी खुफिया जानकारी मिली थी कि कोलकाता से गोवा के लिए करीब ₹20 करोड़ की अवैध कमाई ‘आर कांति लाल’ फर्म के जरिए ट्रांसफर की गई थी। गोवा में इन हवाला ट्रांजेक्शन को संभालने वाला कर्मचारी सागर कुमार पटेल है।”

जाँच एजेंसी ने आगे बताया कि पूछताछ के दौरान पटेल ने ‘अक्षय कुमार’ नाम के एक व्यक्ति का जिक्र किया। अक्षय ने खुद यह कबूल किया है कि उसने ‘एएसएम इवेंट टेक्नोलॉजी’ (ASM Event Technology) के मालिक पंकज मलिक द्वारा व्यवस्थित किए गए हवाला चैनल के जरिए गोवा में नकद रकम हासिल की थी। ED के अनुसार, अक्षय कुमार ‘एएसएम इवेंट टेक्नोलॉजी’ के साथ-साथ ‘हर्ट्ज’ और ‘पिक्सेल्स’ जैसी इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों का कर्मचारी है।

इसके अलावा, ED ने खुलासा किया कि अक्षय कुमार से 26 अक्टूबर 2023 और 10 जनवरी 2024 को दो बार पूछताछ की गई थी। इस दौरान अक्षय कुमार ने बताया कि दो इवेंट मैनेजमेंट कंपनियाँ- ‘एएसएम इवेंट टेक्नोलॉजी’ और ‘हर्ट्ज एंड पिक्सेल्स’ I-PAC के लिए काम करती थीं। इन्हीं कंपनियों ने साल 2021 और 2022 के दौरान I-PAC के सभी आयोजनों का प्रबंधन संभाला था।

पूछताछ के दौरान ‘आर कांति लाल’ फर्म के कर्मचारी अल्पेश पटेल ने भी यह कबूल किया कि उसने कोलकाता से गोवा में ₹20 करोड़ नकद की व्यवस्था की थी और यह रकम अक्षय कुमार को दी गई थी। जाँच में यह भी सामने आया कि यह सारा फंड ‘राजेश मगनलाल’ फर्म के मालिक मुकेश पटेल के कहने पर व्यवस्थित किया गया था।

मुकेश पटेल से हुई पूछताछ ने ED के जाँचकर्ताओं को मुकेश ठक्कर उर्फ मुन्ना तक पहुँचा दिया। ED के मुताबिक, मुकेश पटेल ने मुकेश ठक्कर के कहने पर ही इन अवैध फंड्स का इंतजाम किया था। ठक्कर ने खुलासा किया कि कोलकाता में एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) चलाने वाले जितेंद्र मेहता ने कोयला खनन घोटाले से जुड़ी इस काली कमाई को ट्रांसफर करने में मदद की थी।

ED ने अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा है, “जितेंद्र मेहता ने हवाला के जरिए कोलकाता से गोवा तक अपराध की कमाई को पहुँचाने में सहायता की है। उन्होंने गोवा में I-PAC द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ₹20 करोड़ को ट्रांसफर करने में मदद की। जानकारी के अनुसार, I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर प्रतीक जैन ने ही गोवा में I-PAC के ऑपरेशन्स संभाले थे। यह फंड अक्षय कुमार को सौंपा गया था, जो हर्ट्ज एंड पिक्सेल और ASM इवेंट टेक्नोलॉजी का कर्मचारी है- इन कंपनियों ने खुद यह स्वीकार किया है कि उन्होंने गोवा में I-PAC के लिए काम किया था।”

कौन हैं प्रतीक जैन?

प्रतीक जैन एक इंजीनियर हैं, जो बाद में राजनीतिक सलाहकार बन गए। वे I-PAC के सह-संस्थापक हैं। जैन ने साल 2012 में IIT बॉम्बे से अपनी B.Tech की डिग्री पूरी की थी। राजनीति में आने से पहले उन्होंने ‘एक्सिस म्यूचुअल फंड’ (Axis Mutual Fund) में इंटर्नशिप की और कुछ समय तक प्रसिद्ध फर्म ‘डेलॉयट’ (Deloitte) में भी काम किया। इसके बाद वे ‘सिटिजन्स फॉर एकाउंटेबल गवर्नेंस’ (CAG) नामक NGO के संस्थापक सदस्य बने।

महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतीक जैन पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC के आईटी सेल के प्रमुख भी हैं। साल 2021 के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की पार्टी की बड़ी जीत के पीछे प्रतीक जैन की संस्था I-PAC की बहुत अहम भूमिका मानी जाती है।

गुरुवार (8 जनवरी 2026) को हुई ED की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाटकीय ढंग से वहाँ पहुँचना और अपने साथ कुछ फाइलें और एक हार्ड डिस्क ले जाना चर्चा का विषय बन गया है। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या मुख्यमंत्री ने यह कदम किसी डर या घबराहट में उठाया था? क्या यह उस घोटाले पर पर्दा डालने की एक हताश कोशिश थी, जिसकी पूरी सच्चाई अभी सामने आना बाकी है?

9 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और महुआ मोइत्रा जैसे मुखर TMC नेताओं ने प्रतीक जैन के आवास पर हुई ED की छापेमारी के खिलाफ केंद्र सरकार के विरोध में धरना दिया और रैली निकाली। हद तो तब हो गई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कोलकाता के शेक्सपियर सारणी थाने में ED के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि आखिर एक निजी कंसल्टेंसी फर्म के खिलाफ जाँच एजेंसी की कार्रवाई से टीएमसी इतनी बेचैन और डरी हुई क्यों है?

YSRCP सरकार ने जनता के ₹274 करोड़ I-PAC को गैर-कानूनी तरीके से दिए: TDP आरोप

साल 2023 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की सरकार पर जनता के ₹274 करोड़ अवैध रूप से प्रतीक जैन की संस्था I-PAC को देने का आरोप लगाया था। आरोप था कि विलेज और वार्ड वॉलंटियर्स की निगरानी के बहाने जगन सरकार ने सरकारी खजाने से यह बड़ी रकम I-PAC की तरफ मोड़ दी थी।

TDP प्रवक्ता नीलायपलेम विजय कुमार ने दावा किया था कि जुलाई 2021 में आंध्र प्रदेश सरकार ने एक सरकारी आदेश (GO) जारी कर ‘राम इंफो’, ‘वुपाधि इंफोटेक’ और ‘मैक्स सिक्योरिटी डिटेक्टिव एजेंसी’ के समूह को राज्यभर के वॉलंटियर्स की निगरानी का काम सौंपा था। TDP का आरोप था कि ‘राम इंफो’ में काम करने वाले कर्मचारी असल में I-PAC के ही लोग थे।

इतना ही नहीं, यह भी आरोप लगाया गया कि YSRCP सरकार ने जून 2020 से ‘फील्ड ऑपरेशन एजेंसी’ (FPO) नाम के एक समूह को सालाना ₹68.02 करोड़ का भुगतान करने के लिए एक पिछला आदेश (Post-facto GO) जारी किया था, ताकि इस पूरे लेन-देन को कानूनी जामा पहनाया जा सके।

TDP ने आरोप लगाया कि वॉलंटियर्स की निगरानी के लिए किसी निजी एजेंसी को नियुक्त करना पूरी तरह से अवैध था, क्योंकि ये वॉलंटियर्स सरकारी तंत्र का हिस्सा थे। इसके अलावा, बिना कोई टेंडर बुलाए सीधे सरकारी आदेश (GO) जारी करना YSRCP सरकार द्वारा कानून का एक और बड़ा उल्लंघन था।

TDP के अनुसार, यह तो एक बहुत बड़े घोटाले का महज एक हिस्सा भर था। साल 2023 में TDP नेता ने आरोप लगाया था, “इस पूरे खेल का असली मकसद I-PAC को फायदा पहुँचाना था, जो YSRCP के लिए राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम करती है। ‘राम इंफो’ में काम करने वाले लोग असल में I-PAC के कर्मचारी हैं। यह पूरी साजिश इसलिए रची गई ताकि शेल कंपनियाँ बनाकर I-PAC की चुनावी सेवाओं का बिल जनता के पैसे (सरकारी खजाने) से भरा जा सके।”

(यह रिपोर्ट मूल रुप से अंग्रेजी में श्रद्धा पांडेय ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

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Shraddha Pandey
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