भारत और मलेशिया के रिश्तों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (7 फरवरी 2026) को दो दिवसीय दौरे पर कुआलालंपुर पहुँचेंगे। यह PM मोदी की करीब 8 साल बाद मलेशिया की यात्रा है और इस दौरान व्यापार और अर्थव्यवस्थ से लेकर तकनीक, ऊर्जा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में समझौते होने की उम्मीद है। चर्चा है कि इस यात्रा के दौरान मलेशिया में रह रहे भगौड़े इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक को लेकर भी दोनों देशों के बीच चर्चा हो सकती है।
PM मोदी के इस दौरे से पहले जाकिर नाइक का शागिर्द और हिंदू विरोधी इस्लामी कट्टरंपथी मोहम्मद जमरी विनोद बिलबिला रहा है। मोहम्मद जमरी ने आज (7 फरवरी) रात 8 बजे कुआलालंपुर के सोगो इलाके में ‘मंदिरों’ के खिलाफ रैली करने की चेतावनी दी है। इन मंदिरों को जमरी अवैध बताता है। जमरी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपने समर्थकों को खुला आह्वान करते हुए कहा, “सरकार के प्रचार और चालों में मत आओ। हम घुसपैठियों के खिलाफ लड़ेंगे।” हर कट्टरपंथी की तरह इस कट्टरपंथी जमरी का भी दावा है कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा।
PM मोदी का दौरा और प्रदर्शन
यह रैली में करीब 141 गैर-सरकारी संगठनों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। इसका मकसद सरकार पर दबाव डालना है ताकि वह कथित तौर पर अवैध बताए जा रहे इन धार्मिक स्थलों के खिलाफ कार्रवाई करे।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब मलेशिया के गृह मंत्रालय ने घोषणा की थी कि पुलिस प्रदर्शन के आयोजकों से मुलाकात कर उन्हें रैली रद्द करने के लिए मनाने की कोशिश करेगी। मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मलेशिया दौरे के कारण स्थिति संवेदनशील है।
गृह मंत्रालय ने जनता से अपील की है, “PM मोदी के दौरे की अवधि के दौरान किसी भी सार्वजनिक सभा या प्रदर्शन में हिस्सा न लें।” सरकार को आशंका है कि इस तरह की रैली देश की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को खतरे में डाल सकती है।
मलेशिया सरकार के प्रवक्ता फहमी फजिल ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम किसी भी कीमत पर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे, खासकर ऐसे समय में जब एक महत्वपूर्ण विदेशी नेता (PM मोदी) मलेशिया के दौरे पर आ रहे हैं।
कौन है जाकिर नाइक का कट्टरपंथी शागिर्द जमरी?
जमरी खुद कन्वर्टेड मुस्लिम है और उसकी जड़े तमिल संस्कृति से जुड़ी रही है। 41 वर्षीय जमरी मलेशियाई तमिल मूल का है और उसका जन्म मूल रूप से एक हिंदू परिवार में हुआ था। पहले उसका नाम विनोथ कालिमुथु था। हालाँकि, इस्लाम अपनाने के बाद वो कट्टरपंथी बन गया और तब से ही हिंदू धर्म के खिलाफ जहरीले बयान दे रहा है।
जाकिर नाइक का शागिर्द और कट्टर समर्थक जमरी हिंदू समुदाय के साथ विवाद में उलझा हुआ है। वह उन कट्टरपंथी मुस्लिम समूहों के साथ खड़ा है, जो दावा करते हैं कि मलेशिया में कई हिंदू मंदिर और धार्मिक स्थल ‘अवैध भूमि’ पर बने हुए हैं।
कुछ दिनों पहले Thaipusam पर्व के अवसर पर 31 जनवरी रात 12 बजे से 2 फरवरी सुबह 3 बजे तक मुफ्त फेरी सेवा की घोषणा के बाद भी उसने हिंदू धर्म को लेकिन विवादित टिप्पणियाँ की थीं। इसके बाद डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी सोशलिस्ट यूथ (DAPSY) के सेपुतेह अध्यक्ष डिक्कैम लूर्डेस ने उसे आड़े हाथों लिया था। डिक्कैम लूर्डेस ने कहा था, “तुम्हारा इस्लाम में धर्मांतरण तुम्हारा निजी फैसला हो सकता है लेकिन उस धर्मांतरण को हिंदू त्योहारों का मजाक उड़ाने और हिंदू आस्था का अपमान करने का लाइसेंस समझना घिनौना है।”
अक्सर हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान देने वाले जमरी के खिलाफ 890 से अधिक पुलिस शिकायतें दर्ज हैं। डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी (DAP) के सांसद आरएसएन रायर ने गृह मंत्री सैफुद्दीन नास्यूशन इस्माइल से इस मामले में कुछ दिनों पहले जवाब देने को भी कहा था। रायर ने दावा किया कि आदतन अपराधी के खिलाफ अब तक 890 से ज्यादा पुलिस शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पूछा, “जब उसके बयान बार-बार समाज में तनाव पैदा कर रहे हैं, तो अब तक उस पर मुकदमा क्यों नहीं चलाया गया?”
पिछले साल मार्च 2025 में जमरी को फेसबुक पर मंदिर से जुड़ी एक पोस्ट के कारण गिरफ्तार किया गया था। यह पोस्ट कुआलालंपुर में एक मंदिर को हटाकर उसकी जगह मस्जिद बनाने से जुड़ी हुई थी। उसी महीने की शुरुआत में जमरी ने फेसबुक पर हिंदू श्रद्धालुओं के कवाड़ी अनुष्ठान को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
जमरी ने फेसबुक पोस्ट में कहा था कि कवाड़ी अनुष्ठान करने वाले हिंदू भक्त ‘वेल वेल’ कहते हुए ऐसे दिखाई देते हैं, जैसे वे किसी नशे में हों या उन पर किसी तरह का असर हो गया हो। इसे अलावा उसने टिकटॉक पर वीडियो बनाकर भगवान शिव का भी अपमान किया था।
इससे पहले 2019 में भी मोहम्मद जमरी को पुलिस ने हिंदुओं के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार किया था। उसने अपने भाषण के दौरान हिंदू धर्म को लेकर आपत्तिजनक शब्द कहे थे जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा बन गया था। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए 70 सेकंड के वीडियो में जमरी ने हिंदू धर्म के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक बयान दिए थे। इस मामले में उसके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की गईं।
जाकिर के लिए मलेशियाई नागरिकता छोड़ने को था तैयार
जाकिर का यह शार्गिद इस्लामी कट्टरपंथी के पीछे इस हद तक पागल था कि उसने मलेशियाई नागरिकता तक छोड़ने की बात कह दी थी। जमरी ने कहा था कि अगर जाकिर नाइक को भारत प्रत्यर्पित (सौंपा) किया जाता है, तो वह अपनी मलेशियाई नागरिकता छोड़ने के लिए तैयार है। उसने कहा था, “अगर सरकार ज़ाकिर नाइक को वापस भेजना चाहती है या उसका प्रत्यर्पण करती है, तो मैं बिना किसी हिचकिचाहट के अपना पहचान पत्र (आईसी) सौंप दूँगा।” अब जब एक बार फिर जाकिर नाइक को लेकर चर्चा होने की संभावना है तो यह कट्टरपंथी बिलबिला रहा है।
जाकिर नाइक के समर्थन में नागरिकता छोड़ने तक की घोषणा करने वाला जमरी दरअसल एक व्यक्ति नहीं बल्कि उस वैचारिक नेटवर्क का प्रतिनिधि है, जो धार्मिक उन्माद के जरिए राजनीतिक दबाव बनाना चाहता है। उसका आक्रोश इस बात का प्रमाण है कि भारत और मलेशिया के रिश्तों में मजबूती कट्टरपंथी ताकतों के लिए असहज होती जा रही है।
हालाँकि, कई सवाल भी हैं। जमरी के खिलाफ 890 से अधिक पुलिस शिकायतें दर्ज हैं, वह पहले भी हिंदू विरोधी बयान और सोशल मीडिया पोस्ट के कारण गिरफ्तार हो चुका है और उसने भगवान शिव से लेकर हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों तक का सार्वजनिक रूप से अपमान किया है। इसके बावजूद उसके खिलाफ निर्णायक कानूनी कार्रवाई का अभाव यह सवाल खड़ा करता है कि क्या कट्टरपंथियों के लिए मलेशिया में कानून अलग है?


