विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि ये भारत की कूटनीति है, इसकी वजह से भारत आने वाले जहाज सुरक्षित हॉर्मुज से निकल कर आए। सरकार पूरी जी जान से गैस और तेल की कमी को दूर करने में लगी है। लेकिन प्रोपेगेंडा फैलाने वाले कह रहे हैं कि सरकार ने चाइनीज युआन में हॉर्मुज से गुजरने की कीमत चुकाई है। ये सरासर गलत है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसका खंडन भी किया है।
प्रोपेगेंडा फैलाने वालों ने क्या- क्या लिखा
आरजेडी प्रवक्ता प्रियंका भारती ने एक्स पर दावा किया है कि भारतीय जहाज को सुरक्षित हॉर्मुज स्ट्रेट से निकलने दिया गया है तो इसकी वजह चीनी ‘युआन’ में मुद्रा का भुगतान है। वहीं एक कॉन्ग्रेस प्रवक्ता और पूर्व सेना अधिकारी अनुमा आचार्या ने कहा है कि भारतीय तेल टेंकर को चीनी युआन में भुगतान करने के बाद होर्मूज स्ट्रेट से गुजरने की परमिशन मिली। उनका ये भी दावा है कि ये ईरान के जमीर की सराहना करने वाली भारत की जनता की वजह से हुआ। मोदी सरकार की वजह से कुछ भी नहीं हुआ।
It's not an Oil Tanker. It's an LPG Tanker. An ex IAF officer shouldn't post propaganda. https://t.co/XcHAqexVAC
— Pramod Kumar Singh (@SinghPramod2784) March 23, 2026
सोशल मीडिया में ये भी कहा गया है कि ईरान ने अल्टीमेटम दिया था कि वह उन्हीं तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति देगा, जो चाइनीज युआन में पेमेंट करेंगे। सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि इसके लिए 20 लाख डॉलर ईरान वसूल रहा है।
भारतीय तेल टैंकर स्ट्रेट का होर्मूज से निकला चीनी युआन में भुगतान करके 🙏 pic.twitter.com/QLo9Eoup2m
— Atul Londhe Patil (INDIA Ka Parivar)🇮🇳 (@atullondhe) March 23, 2026
विदेश मंत्रालय ने कर दिया साफ
भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर गैर जिम्मेदाराना तरीके से ये प्रचारित करने की कोशिश की जा रही है कि भारत के जहाज को युआन में पेमेंट करने पर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी गई, जो सरासर गलत है। इसमें आरजेडी नेता प्रियंका
भारती का पोस्ट भी दिखा कर फेक बताया है।
Fake News Alert!
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) March 23, 2026
Please stay alert against such false and baseless claims and posts on social media! pic.twitter.com/GugIoBhihE
दरअसल ये मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष में भारत की कूटनीतिक सफलता का ही कमाल है कि होर्मूज स्ट्रेट से भारत के जहाज सुरक्षित आ जा पा रहे हैं। भारत का तिरंगा लगा जहाज जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहुँचा, तो उसे सुरक्षित पार कराने की जिम्मेदारी खुद ईरानी नौसेना ने उठाई। ईरान इससे मित्र देशों जैसे भारत रूस चीन आदि के जहाजों को यहाँ से जाने की इजाजत दे रहा है। यही वजह है कि विदेश मंत्रालय ने गैस और तेल के जहाज को होर्मुज से निकालने का श्रेय भारत की कूटनीति को दिया था।
यही वजह है कि लोग सोशल मीडिया पर देश विरोधी प्रोपेगेंडा करने वालों से पूछ रहे हैं कि आखिर इतने देशों के जहाज वहाँ खड़े हैं। क्या वे युआन नहीं दे सकते हैं। आखिर ईरानी सेना उन्हें क्यों जाने नहीं दे रही है। लोग तो यहाँ तक कह रहे हैं कि आखिर इतना ही ज्यादा जनता की फिक्र है तो खुद आने बढ़ कर गैस-तेल का इंतजाम कर सकती है कॉन्ग्रेस। आखिर देश में सालों तक राज किया है। इतने कनेक्शन हैं कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के। जनता की भलाई के लिए इतनी मेहनत तो कर ही सकते हैं।
जो दूसरे देशों को टैंकर वहां फंसे हुए है, उन्हें क्या चीनी युआन मिल नहीं रहा है भुगतान के लिए, जो अभी तक वहां पर फंसे हुए है
— Sachin Gupta (સચિન) (@sachingupta1999) March 23, 2026
दरअसल ईरान हर देश से अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहता। भारत इस युद्ध में मध्यस्थता की भूमिका भी निभा सकता है। पीएम मोदी ने हाल ही में मध्यपूर्व देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात की है और शांति का रास्ता अपनाने पर बल दिया है। भारत के संबंध अमेरिका के साथ भी अच्छे हैं। यही वजह है कि ईरान ने भारत को विशेष छूट दी है।


