Homeविचारराजनैतिक मुद्देजिस सनातन को 'डेंगू-मलेरिया' कह करना चाहते थे खत्म, अब उसके दर पर सिर...

जिस सनातन को ‘डेंगू-मलेरिया’ कह करना चाहते थे खत्म, अब उसके दर पर सिर झुका रहे उदयनिधि स्टालिन: वोट के लिए आस्था की नौटंकी कर रही DMK?

तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके सनातन विरोधी रही है। करुणानिधि के पोते और राज्य के डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने सनातन विरोधी सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए इस धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया से की थी। अब मंदिर में पूजा-अर्चना करते नजर आ रहे हैं। इसे 'चुनावी लीला' कहा जा सकता है।

चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों की पैंतरे बाजी शुरू हो जाती है। तमिलनाडु चुनाव से पहले अब तमिलनाडु के डिप्टी सीएम और एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन को मंदिर की याद आने लगी है। वह मंदिरों की खाक छानते घूम रहे हैं। ये वही स्टालिन हैं, जिन्होंने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही थी और इसकी की तुलना डेंगू-मलेरिया से की थी।

उदयनिधि स्टालिन पहुंचे मंदिर

करुणानिधि के पोते उदयनिधि स्टालिन कई बार कह चुके हैं कि वह पूजा-पाठ नहीं करते। वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के सेंजेनियमन मंदिर में पूजा करते दिखे गए। उनके साथ सांसद दयानिधि मारण भी मौजूद थे।

पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व सांसद डॉक्टर सेंथिल कुमार भी पारंपरिक पूजा-अर्चना के विरोध में बोलते रहे हैं। वह सड़क परियोजना के दौरान सबसे पहले होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम और पूजा-पाठ का विरोध किया था। वह भी अब मंदिरों के दर पर शीश झुकाते नजर आ रहे हैं। मंदिर-मंदिर अपनी ‘जीत’ ढूँढ रहे हैं। दरअसल डीएमके इस चुनाव में हिन्दुत्व के प्रति ‘सॉफ्ट रणनीति’ अपना कर बहुसंख्यक हिन्दुओं को खुश करने की कोशिश में जुट गई है।

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीजेपी तमिलनाडु में अन्नामलाई के नेतृत्व में अपनी पैठ बढ़ा चुकी है। एआईएडीएएमके और छोटी-छोटी पार्टियों के साथ मिल कर एनडीए चुनाव में डीएमके-कॉन्ग्रेस गठबंधन को पटखनी देने के लिए बेताब है। इसलिए, डीएमके को अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए ‘धार्मिक संतुलन’ बनाना पड़ रहा है।

तमिलनाडु में जाति विभाजन की जड़ें भी काफी गहरी है। इसलिए राज्य के मंत्री थंगम थेनारासु का दलित नेता इमैनुएल सेकरन के स्मारक पर जाना भी चर्चा का विषय बन गया है। आमतौर पर नेता दलित नेताओं के स्मारक पर तभी आते हैं जब जयंती या डेथ एनिवर्सरी होती है। मंत्री थेनारासु दरअसल यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चुनाव में दलित और पिछड़ों का वोट उनसे न छिटके। इससे पता चलता है कि डीएमके चुनाव में हर वह साम दाम दंड भेद अपना रही है, जिससे चुनाव जीता जा सकता है।

उदयनिधि स्टालिन का कोई ह्रदय परिवर्तन नहीं हुआ है। अगर ऐसा होता तो पहले अपने विवादित बयानों की माफी माँगते, सनातन धर्म में आस्था जताते हुए मंदिर जाते। लेकिन मंदिर जाकर फोटो खिंचा कर जनता में प्रचारित करना कि वह पूजा-पाठ में विश्वास करते हैं, सिर्फ चुनावी स्टंट हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं।

अब सत्ता ऐसी चीज ही है, जिसे पाने के लिए राजनेता अपना सबकुछ न्यौछावर करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन इसका ताजा उदाहरण हैं। वे कई बार अपने इंटरव्यू में साफ कर चुके हैं कि वे पूजा-पाठ नहीं करते। वो सनातन धर्म को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने डेंगू-मलेरिया भी सनातन को कह दिया था। ये बयान देशभर में चर्चा का विषय बना था।

उदयनिधि का सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान

उदयनिधि मारने ने 2 सितंबर 2023 को कहा था कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है और इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए, न कि केवल इसका विरोध किया जाना चाहिए। वह सनातन धर्म को मिटाने के लिए आयोजित एक सम्मेलन में ये बातें कही थी।

इतना ही नहीं उन्होंने भाषण का क्लिप एक्स पर साझा करते हुए कहा था, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

अब उसी सनातन के शरण में हैं उदयनिधि। इतना ही नहीं कई रैलियों में मुस्लिम उम्मीदवारों के माथे पर विभूति भी देखे गए। वहीं शिवकाशी उम्मीदवार कीर्तना मस्जिदों में जाकर प्रचार किया। ये सब कुछ चुनाव के रंग हैं। द्रविड़ विचार के प्रबल समर्थक उदयनिधि स्टालिन हमेशा से सनातन धर्म और पारंपराओं से दूरी बनाए रखने पर जोर देते रहे हैं।

उन्होंने कई बार कहा है कि धार्मिक अनुष्ठानों में उनका विश्वास नहीं है। वे सनातन धर्म को पानी पी पीकर कोसने वालों में रहे हैं। डेंगू- मलेरिया से सनातन धर्म की तुलना भी कर दी थी। सनातन धर्म को खत्म करने का बीड़ा भी उठा लिया था, लेकिन चुनाव से पहले मंदिर दर्शन-पूजन के लिए पहुँचे उदयनिधि के वीडियो और तस्वीरें अब उन पर ही सवाल कर रही हैं। क्या सत्ता परिवर्तन की आहट ने उन्हें ‘ह्रदय परिवर्तन’ के लिए मजबूर कर दिया या डीएमके की ये सियासत तमिलनाडु के लिए ‘नया अध्याय’ है। इसे बदलते माहौल में छवि बदलने की कोशिश कहा जा सकता है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

INDI गठबंधन की बैठक में आई पार्टियाँ बजा रही थी अपनी ढपली अपना राग, उधर एक झटके में 21 सांसद हो गए कम: जानें...

एक तरफ दीदी दिल्ली में विपक्षी एकता की नई स्क्रिप्ट लिख रही थीं, तो दूसरी तरफ एक ही झटके में उनके 21 सांसद कम हो चुके थे।

बंगाल में CAA-विरोधी दंगों की जाँच के आदेश, UP स्टाइल में होगी वसूली: पढ़ें ममता सरकार ने इस्लामी कट्टरपंथियों को कैसे दी थी रेलवे...

बंगाल में 2019 के CAA विरोधी दंगों की जाँच फिर से होगी। सीएम शुभेंदु ने रेलवे को हुए 93 करोड़ के नुकसान और हिंसा की समीक्षा के आदेश दिए हैं।
- विज्ञापन -