मौका कोई भी हो लेकिन एंगल एक ही होना चाहिए- भारत पर उंगली उठाओ। यही पैटर्न बार-बार दिखता है और इस बार भी वही हुआ। इस्लामी पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने ईरान-अमेरिका-इजरायल के अंतरराष्ट्रीय टकराव के बीच अचानक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र छेड़ दिया… जैसे हर वैश्विक घटना का निष्कर्ष भारत की आलोचना ही होना चाहिए।
सोचिए, हजारों किलोमीटर दूर चल रहे संघर्ष में अमेरिका के एयरक्राफ्ट गिरने की खबर है, दुनिया उस पर चर्चा कर रही है और यहाँ से आवाज आती है, “लेकिन तुम्हें ये कभी नहीं पता चलेगा कि ऑपरेशन सिंदूर के वक्त क्या हुआ था।” सवाल यह है कि ये तुलना है या जबरदस्ती खींचा गया नैरेटिव? क्या यह तथ्य है या सिर्फ संदेह का बीज बोने की कोशिश? आरफा टाइम्स नाऊ की एक रिपोर्ट को कोट कर रही थीं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह नहीं कि सवाल पूछा गया है, लोकतंत्र में सवाल जरूरी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे देश की पत्रकारिता और जनता को एक झटके में खारिज कर दिया गया, “भारतीय पत्रकार या आम लोग कभी सवाल नहीं कर सकते थे।” लेफ्ट-लिबरल की चहेती आरफा बीबी का ये बयान सिर्फ एक सरकार पर नहीं बल्कि पूरे भारतीय लोकतंत्र पर आरोप है, उसका अपमान है।
But you will never know what happened during Operation Sindoor.
— Arfa Khanum Sherwani (@khanumarfa) April 5, 2026
Indian journalists or common people can not ask any questions before, during or after the war is over.
It is simply not allowed. https://t.co/c2U4ROzBTX
आपको एक बार को ट्वीट पढ़कर लग सकता है कि आखिर अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच में ऑपरेशन सिंदूर की बात कैसे आ गई, ये तो हजारों किलोमीटर दूर युद्ध से जुड़ी खबर थी। लेकिन हैरान होने की जरूरत नहीं।
अगर आप पत्रकारिता के नाम पर आरफा के किए पुराने कुकर्म को देखेंगे तो तो पता चलेगा कि ये महिला भारत घृणा से लंबे समय से ग्रसित है। इसने आज क्या…उस समय भी अपना रोना रोया था जब पाकिस्तान की फौज और आतंक के गठजोड़ को हमारे सैनिक जवाब दे रहे थे।
एक साल पहले जब पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था उस समय भी आरफा का ऐसा ही रोना छूटा था। उस समय आरफा ने ट्वीट किया था कि शांति ही राष्ट्रवाद है, युद्ध केवल विध्वंस है। आरफा उस समय पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को रोकने के लिए जो कर सकती थीं उन्होंने किया।
Peace is patriotism. War is destruction.
— Arfa Khanum Sherwani (@khanumarfa) May 8, 2025
Borders don’t bleed—people do.
Stop the war.
Deescalate NOW !!!
उन्होंने एक बार भी ये नहीं बताया कि कैसे भारतीय सेना के साहस ने सैंकड़ों आतंकियों को ढेर किया, पाकिस्तान के ईरादों को पस्त किया, वहाँ के राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री तक बंकर में छिपने को मजबूर हो गए, दहशतगर्दों के चेहरे पर दहशत देखने को मिली, वो एयरबेस खंडहर हो गए जहाँ से भारतीयों को निशाना बनाया जा रहा था।
इसके उलट आरफा उस समय पाकिस्तान-भारत युद्ध पर रिपोर्टिंग करते हुए पड़ोसी मुल्क के आर्मी चीफ को आसिम मुनीर ‘साहब’ कहकर रिपोर्टिंग कर रही थीं। अब दोबारा जब सेना के शौर्य को याद करने का दिन नजदीक आ रहा है तो आरफा ने दोबारा ये ओछापन दिखाया है। क्यों? सिर्फ इसलिए ताकि उन्हें फॉलो करने वाले लोग दोबारा से इसी काम में जुट जाएँ और आर्मी पर, ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठने लगे।
आरफा की इन्हीं हरकतों को परिणाम था कि एक बार उन्हें विदेशी क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने लताड़ा था। कनेरिया ने उन्हें यहाँ तक कहा था कि अगर वो भारत में खुश नहीं हैं तो पाकिस्तान आ जाएँ। इस पर जब आरफा ने कम्युनल कहने लगीं और विवाद बढ़ा तो कनेरिया ने उन्हें ये सवाल करके चुप करा दिया था- कि क्या उन्होंने कभी भारत या उसकी संस्कृति की तारीफ की है, एक बार भी?


