‘धुरंधर-2’ जहाँ बॉक्स ऑफिस पर एक के बाद एक रिकॉर्ड ध्वस्त करती जा रही है तो वहीं उसके किरदार देश की राजनीति में भी तहलका मचाए हुए हैं। कुछ दिनों पहले माफिया अतीक अहमद से मिलते जुलते किरदार को लेकर उत्तर प्रदेश में खूब सियासी बवाल हुआ तो अब अखिलेश यादव की ‘धुरंधर तस्वीरों’ को लेकर हंगामा मचा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, सीतापुर, नोएडा और अमेठी समेत 10 जिलों में अखिलेश यादव के खिलाफ होर्डिंग्स लगाए गए हैं।
होर्डिंग्स में लिखा ‘अखिलेश यादव का ल्यारी राज’
‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ (YAM) नाम की संस्था द्वारा लगाए गए इन होर्डिंग में एक तरफ अखिलेश यादव तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की तस्वीरें हैं। अखिलेश यादव की तस्वीर को धुरंधर के विलेन रहमान डकैत की तरह बनाया गया है और उनकी तस्वीर के नीचे लिखा है- ‘अखिलेश का ल्यारी राज’। वहीं, होर्डिंग में दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी की तस्वीर लगी है जिसमें वह कन्या पूजन करते नजर आ रहे हैं और उनकी तस्वीर पर लिखा है- धुरंधर CM। इस होर्डिंग के बीच में बड़े अक्षरों में पूछा गया है-‘आपको क्या चाहिए?’।

इन होर्डिंग में कुछ अखबारों की खबरों की कटिंग भी लगाई गई हैं। इनमें अखिलेश यादव की तस्वीरों के नीचे ‘हिंसा जारी, अब तक 38 मरे’, ‘हिंसा जारी, 17 और मरे’, ‘मरेठ पहुँची दंगों की आग’ और ‘शामली में खूनी संघर्ष: राज्य में बढ़ रहा सांप्रदायिक तनाव’ जैसी खबरें हैं। तो दूसरी तरफ CM योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के नीचे ‘अपराधियों को पालती है सपा, माफिया को मिट्टी में मिला देंगे’, ‘मुख्तार की मौत’ और ‘अतीक और अशरफ भी मारे गए’ जैसी खबरों की कटिंग लगी हैं।
#WATCH | UP: Posters against Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav were put up in Lucknow.
— ANI (@ANI) April 7, 2026
General Secretary, Youth Against Mafia, Abhinav Tiwari says, "We want to create an awareness among the Gen Z through these posters so that they know the time that Uttar Pradesh has seen… pic.twitter.com/aamdqwbauC
साथ ही, होर्डिंग पर ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ के पदाधिकारियों की तस्वीरें भी लगी हैं। कार्यकारी अध्यक्ष आशुतोष सिंह, महामंत्री अभिनव तिवारी, उपाध्यक्ष शिवानी पांडेय जैसे कई पदाधिकारियों की फोटो लगी हैं।
सपा की करतूतों से युवाओं को अवगत कराना मकसद: यूथ अगेंस्ट माफिया
‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ के पदाधिकारियों ने ये होर्डिंग लगाए जाने की वजहों पर भी बात की है। संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष आशुतोष सिंह ने कहा, “हमें जेन-जी को संदेश देना है, उन्हें साथ जोड़ना है और उनको यह बताना है कि जब वो व्यस्क नहीं हुए थे तब प्रदेश में क्या चल रहा था, वो उन्हें नहीं भूलनी चाहिए। हम नई पीढ़ी को समझाएँगे और यह बताएँगे कि AI के दौर में जाति-बिरादरी में फँसे रहना कितनी दिक्कत दे सकती है।”
Lucknow, Uttar Pradesh: Youth Against Mafia Executive President Ashutosh Singh says, "Our message is only for the juveniles – to connect with them and inform them about what was happening in the state when they were not yet adults…." pic.twitter.com/I8Qs0dty14
— IANS (@ians_india) April 7, 2026
वहीं, संगठन के महामंत्री अभिनव तिवारी ने कहा, “इसका मकसद यही था कि हम जेन-जी में जागरूकता फैलाना चाहते थे। ताकि वो जान सकें कि पहले UP ने एक दौर देखा था और एक दौर अब है, एक समय यहाँ मुजफ्फरनगर-शामली जैसे दंगे होते थे और एक आज का समय है।” साथ ही, अभिनव का कहना है कि यह संस्था छात्रों द्वारा चलाई जा रही है और इसका किसी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।
क्या है होर्डिंग्स लगाने वाला ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’?
‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ की वेबसाइट पर संगठन को ‘उत्तर प्रदेश को डर और माफिया के दौर में वापस जाने से रोकने के लिए नागरिकों द्वारा शुरू किया गया एक मंच’ बताया गया है।
वेबसाइट पर कहा गया है, “‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ एक सामाजिक संगठन है, जिसका उद्देश्य है लोगों को जागरूक करना, खासकर युवाओं को शिक्षित करना, अपराध के नुकसान को समझाना और उत्तर प्रदेश को सुरक्षित और विकास की राह पर आगे बढ़ाने के लिए लोगों का समर्थन जुटाना।”
यह संगठन पुराने रिकॉर्ड, अपराध से जुड़ी घटनाओं की टाइमलाइन, निवेश पर पड़े असर, अलग-अलग जिलों के ट्रेंड और लोगों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करता है। साथ ही, कॉलेजों में ग्रुप बनाने, वॉलंटियर अभियान चलाने और युवाओं से संकल्प लेने जैसे कार्यों से युवाओं को संगठन से जोड़ा जाता है।
यह संगठन सिर्फ जानकारी ही नहीं देता बल्कि एक ऐसी सोच बनाना चाहता है जो अपराध के खिलाफ हो। इसके लिए म्यूजिक, रैप, ग्राफिक्स, प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सहारा लिया जाता है।
ऊपर तस्वीर में दिखाया गया कंटेंट ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ द्वारा बनाए जाने वाले कंटेंट का उदाहरण है। इन इन्फोग्राफिक के जरिए दिखाया गया है कि कैसे अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले सपा के शासन में 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में अराजकता का दौर था। इस अवधि में 1 लाख से अधिक नौकरियाँ खत्म हुईं और करीब 27000 करोड़ रुपए के निवेश का नुकसान हुआ जिसके चलते युवाओं के भविष्य और राज्य के विकास पर नकारात्मक असर पड़ा।
वहीं, 2017 के बाद योगी आदित्यनाथ के राज में कैसे प्रदेश की तस्वीर बदली उसकी कहानी भी इसके जरिए दिखाई गई है। इसमें बताया गया है कि 2017 के बाद कानून-व्यवस्था का दौर लौटने से प्रदेश में 7 लाख से अधिक नौकरियाँ पैदा हुईं और 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश आया है।
YAM का कहना है कि उत्तर प्रदेश एक समृद्ध भविष्य नहीं बना सकता अगर लोग अपने अतीत को भूल जाएँ। वेबसाइट पर लिखा गया है, “संगठित अपराध, डर, हिंसा और कमजोर कानून-व्यवस्था का दौर सिर्फ उस समय के पीड़ितों को ही नुकसान नहीं पहुँचाता बल्कि यह निवेश के भरोसे को भी कम करता है, लोगों को व्यापार शुरू करने से रोकता है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करता है, रोजगार के अवसर घटाता है और पूरी एक पीढ़ी के सपनों को नुकसान पहुँचाता है।”
‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ का मकसद इसी याद को एक जिम्मेदार नागरिक पहल में बदलना है। यह संस्था अतीत को बुरे दौर को दर्ज करेगी, वर्तमान को जागरूक करेगी और एक ऐसा भविष्य बनाने में मदद करेगी जहाँ युवा खुद आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश को सुरक्षित और अवसरों से भरा राज्य बनाए रखें।


