असम में 9 अप्रैल 2026 को चुनाव को देखते हुए 7 अप्रैल की शाम 5 बजे चुनाव प्रचार थम गया। राज्य की सभी 126 सीटों पर गुरुवार को एक ही चरण में मतदान होगा। इस चुनाव में असमिया पहचान से लेकर मियाँ तक का मुद्दा राजनीति के केन्द्र में रहा।
Today, the campaigning for the #AssamElections2026 comes to a close.
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) April 7, 2026
Over the last one month, the karyakartas of @BJP4Assam and NDA partners, AGP, BPF and Gana Shakti under the leadership of Adarniya @narendramodi ji have been visiting each door to spread the word about the… pic.twitter.com/o9zvuo8dCV
राज्य में 2023 में हुए परिसीमन के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव हो रहा है। परिसीमन के बाद मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या 29 से घट कर 22 रह गई है। इसका असर भी चुनाव में दिखेगा।
2021 विधानसभा चुनाव में एनडीए को 75 और कॉन्ग्रेस गठबंधन को 50 सीटें मिली थी। उस वक्त बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट कॉन्ग्रेस गठबंधन में शामिल थी, लेकिन इस बार अलग चुनाव लड़ रही है।
असम चुनाव में ‘मियाँ’ बना मुद्दा
असम चुनाव में मियाँ शब्द को लेकर जबरदस्त घमासान मचा। इस शब्द की गूँज कोर्ट में भी सुनाई दी। मुस्लिमों के खिलाफ अभियान चलाने का आरोप लगा कर सीएम हिमंता बिस्वा सरमा को कोर्ट में घसीटा गया। दिल्ली से लेकर असम तक एफआईआर दर्ज करवाई गई।
असम में मियाँ बंगाली मुस्लिम को कहते हैं, जो 150-200 साल पहले अंग्रेजों द्वारा लाकर यहाँ बसाए गए। ये लोग हिन्दू बहुल क्षेत्रों में बस गए और वहाँ की डेमोग्राफी बदल दी। सीएम हिमंता ने चुनाव में मियाँ को बाहर निकालने की अपील की। उन्होंने साफ कहा कि मियाँ लोगों को राज्य से बाहर करना उनका मकसद है। इस पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया।
घुसपैठ और पहचान का मुद्दा
असम में बांग्लादेश से अवैध घुसपैठियों का मुद्दा भी अहम रहा है। यह राज्य में सबसे अधिक भावनात्मक रूप से संवेदनशील और राजनीतिक मुद्दों में से एक है। पीएम मोदी, गृहमंत्री शाह, सीएम हिमंता के साथ-साथ बीजेपी के दूसरे नेताओं ने चुनाव में घुसपैठियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। बांग्लादेश से सीमा पार कर आने वाले लोगों की पहचान करना और उन्हें वापस भेजना बहुत बड़ा मुद्दा है। इसके कारण ही 1985 में असम समझौता हुआ था।
डेमोग्राफी में बदलाव के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने की जद्दोजहद कर रहे असम के मूलनिवासियों को इस मुद्दे ने आकर्षित किया है। जमीन पर इसका असर दिख रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी असम में ये मुद्दा बना था।
एनआरसी और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा
असम के मूल निवासियों का सबसे बड़ा डर भाषाई और सांस्कृतिक अस्तित्व को बचाना है। इसके लिए एनआरसी को अंतिम रूप देना और अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना जरूरी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 2025 में विधानसभा में बताया था कि राज्य में 2017 के बाद से 40 हजार से अधिक विदेशी नागरिकों की पहचान हुई है।
इसी पहचान के सवाल को सुलझाने के लिए असम में एनआरसी की प्रक्रिया शुरू हुई जो अभी तक पूरी नहीं हुई है।नागरिकता का सवाल भी सिर्फ कानूनी नहीं रह गया है, यह असम की राजनीति की धुरी बन गया।
भौगोलिक रूप से ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर और दक्षिण में बँटा असम राजनीतिक रूप से अपर असम, मिडिल असम, लोअर असम और बराक घाटी में विभाजित है।
बराक घाटी के मुसलमान, असमिया मुसलमान और लोअर असम के बांग्लाभाषी मुसलमानों की सामाजिक और राजनीतिक पहचान अलग-अलग है। बीजेपी ने मियाँ शब्द का इस्तेमाल कर बांग्लाभाषी मुसलमानों पर जमकर हमला किया है।
असम में सरकारी जमीनों से मुस्लिम प्रवासियों को बड़े पैमाने पर बेदखल किया गया है। इनमें से ज्यादातर बांग्लादेशी मुस्लिम बताए जाते हैं। इसका असर भी चुनाव में दिखेगा।
विकास का मुद्दा
असम चुनाव में विकास अहम मुद्दा है। केन्द्र की सहायता से राज्य में डबल इंजन सरकार काम कर रही है। विकसित असम के विजन को सरकार ने पेश किया है। राज्य की अर्थव्यवस्था काफी तेजी से आगे बढ़ी है। राज्य में सड़कों, पूलों, बुनियादी परियोजनाओं पर काफी खर्च किया गया है। जागीरोड में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा लगभग ₹27,000 करोड़ के निवेश से सेमीकंडक्टर परियोजना शुरू की गई है यानी राज्य में सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की परियोजनाएँ वोटरों को आकर्षित करेंगी।
असम की पारंपरिक ‘गमोचा’ को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलवाई। अहोम सेनापति लचित बोरफुकन की विरासत का सम्मान किया। राज्य में शिक्षा सुधार के तहत 402 मदरसों को प्राथमिक स्कूल में बदला गया और राज्य में बहुविवाह पर रोक लगाया गया
सीएम हिमंता और सीएम चेहरा गौरव गोगोई और उनकी पत्नियों से जुड़ा मुद्दा
कॉन्ग्रेस के सीएम पद का चेहरा और सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी पर बीजेपी ने पाकिस्तान से कनेक्शन के आरोप लगाए। गौरव गोगोई के पाकिस्तान यात्रा पर बीजेपी ने सवाल पूछे और उनकी पत्नी के पाकिस्तानी फर्म में काम करने और आईएसआई से कनेक्शन का आरोप भी लगाया।
इसके जवाब में चुनाव की तारीख नजदीक आते-आते कॉन्ग्रेस के नेता सीएम हिमंता सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयाँ सरमा पर तीन पासपोर्ट रखने का आरोप लगा दिया। कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीन देशों का पासपोर्ट रखने की बात कही। इसको लेकर हिमंता दंपति ने शिकायत दर्ज कराई। इसपर पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर असम पुलिस पूछताछ के लिए पहुँची। लेकिन पवन खेड़ा घर पर मौजूद नहीं थे।
चुनाव प्रचार थमने तक निजी आरोपों की झड़ी लग गई और कॉन्ग्रेस-बीजेपी के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाते दिखे। पिछले साल सिंगापुर में राज्य के मशहूर गायक जुबीन गर्ग की रहस्यमय हालात में मौत भी इस बार प्रमुख मुद्दा है।
ऑपिनियन पोल में बीजेपी को प्रचंड जीत
असम चुनाव को लेकर दो सर्वे की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। इसमें मैट्रिज और चाणक्य स्ट्रैटजी शामिल हैं। मैट्रिज सर्वे के अनुसार, बीजेपी गठबंधन को वोट शेयर और सीटों दोनों बढ़त मिल रही है। वहीं कॉन्ग्रेस गठबंधन पीछे है, जबकि छोटे दलों का वोट कम है।
वोट शेयर
BJP: 46%
कॉन्ग्रेस: 36%
अन्य: 18%
सीट
BJP: 92-102
कॉन्ग्रेस: 22-32
अन्य: 4-7
चाणक्य के सर्वे के अनुसार, BJP गठबंधन बढ़त बनाता दिख रहा है। वहीं BJP गठबंधन के मुकाबले कॉन्ग्रेस आधी सीटें भी नहीं जीत पा रही है, जबकि छोटे दलों की सीटें इस सर्वे में भी कम ही हैं।
BJP: 83-90 सीटें
कॉन्ग्रेस: 30-36 सीटें
अन्य: 3-6 सीटें
इसके आधार पर कहा जा सकता है कि असम में सीएम हिमंता के नेतृत्व में तीसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी गठबंधन सरकार बनाने जा रही है, लेकिन इसका पता 5 मई 2026 को चलेगा, जब नतीजे आएँगे।


