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‘तिलक-चंदन नहीं लगा पाएँगे पुलिसकर्मी’: बिहार DGP के बयान पर मचा बवाल, जानिए- ‘तिलक’ से जुड़े पुराने विवाद और क्या कहते हैं नियम

बिहार में तैनात एक वरिष्ठ IPS अधिकारी ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि DGP का यह आदेश कोई नया फरमान नहीं है बल्कि यह बिहार पुलिस के 1978 के मैनुअल पर आधारित है। मैनुअल के अनुसार ड्यूटी पर तैनात किसी भी पुलिसकर्मी को किसी भी धर्म के चिह्न, प्रतीक या पहनावे को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है।

बिहार में पुलिस विभाग को लेकर राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार के एक बयान के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। दरअसल, DGP विनय कुमार ने पूरे पुलिस महकमे को सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि ड्यूटी के दौरान वर्दी में माथे पर तिलक, चंदन का टीका या किसी भी तरह के धार्मिक चिह्न लगाने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने इसे पुलिस मैनुअल के खिलाफ बताया है और उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।

क्या है DGP का पूरा आदेश?

डीजीपी विनय कुमार ने स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान निर्धारित ड्रेस कोड का सख्ती से पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस की वर्दी में टोपी और बेल्ट पहनना अनिवार्य है बिना इनके ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई होगी।

इसके साथ ही आदेश में साफ कहा गया कि ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत या धार्मिक पहचान दिखाना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आएगा। महिला पुलिसकर्मियों के लिए भी ड्यूटी के दौरान अत्यधिक श्रृंगार पर रोक लगाई गई है। इन निर्देशों का मकसद पुलिस बल में एकरूपता और पेशेवर छवि बनाए रखना बताया गया है।

DGP का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वह तिलक ना लगाने की बात करते दिख रहे हैं। DGP ने कहा, “वर्दी पहनकर आप टीका चंदन नहीं लगा सकते हैं। यदि आप लगा रहे हैं तो एक सेकेंड के लिए लगाकर उसको हटा दीजिए। वर्दी अगर आपने पहनी है तो आप दसों उँगलियों में अंगूठी नहीं पहन सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “वर्दी के साथ किसी भी प्रकार का अलंकरण वर्जित है।” वो बताते हैं कि महिलाओं के लिए जो आदेश निकाला गया था उसमें वर्दी के साथ महिलाओं के आभूषण पहनने पर भी रोक लगाई गई थी।

DGP के बयान पर भड़के हिंदू संगठन

डीजीपी विनय कुमार के इस बयान पर हिंदू संगठन और कई अन्य लोग भड़क गए हैं। विश्वामित्र सेना ने इस आदेश पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने कहा कि चंदन-तिलक सनातन परंपरा और आस्था का प्रतीक है और इसे वर्दी के साथ जोड़कर प्रतिबंधित करना अनुचित और भेदभावपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है जहां हर नागरिक को अपनी धार्मिक पहचान और आस्था व्यक्त करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक प्रतीक पर रोक लगाने का प्रयास संविधान की भावना के विपरीत है। विश्वामित्र सेना ने बिहार सरकार से माँग की है कि इस मामले में तत्काल स्थिति स्पष्ट की जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इन निर्देशों को वापस नहीं लिया गया तो व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

इस मामले पर सत्तारूढ़ बीजेपी के नेता भी DGP के बयान पर नाराजगी जता रहे हैं। पूर्व विधायक और भाजपा नेता हरिभूषण ठाकुर ‘बचौल’ ने DGP के इस बयान पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे तुष्टिकरण की पराकाष्ठा बताया है। उन्होंने कहा, “DGP ने कहा है कि कोई भी चंदन लगाकर पुलिस की ड्यूटी पर नहीं आएगा। तो फिर कोई भी बुर्का पहनकर, मूँछ छिलाकर या लंबी दाढ़ी रखकर भी पुलिस ड्यूटी में नहीं आना चाहिए। यही लोकतंत्र का असली तकाजा है।”

इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी लोग इस बयान पर नाराजगी जता रहे हैं। एक यूजर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘क्या बिहार पुलिस की ईमानदारी तिलक से तय होती है? क्या भ्रष्टाचार चंदन लगाकर आता है? क्या अपराधी तिलक देखकर बच जाते हैं?” इसके अलावा भी अन्य यूजर्स ने तीखी सवाल उठाए हैं।

DGP-सरकारी कर्मियों के तिलक पर नया नहीं बिहार में विवाद

यह पहली बार नहीं है जब बिहार में सरकारी वर्दी या दफ्तर में तिलक को लेकर बवाल मचा हो। 2007 में बिहार के कृषि विभाग के उप-निदेशक लक्ष्मण मिश्रा को कार्यालय में माथे पर तिलक लगाने के कारण निलंबन की सिफारिश का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा था कि वे 30 साल से तिलक लगाते आए हैं और यह उनका धार्मिक अधिकार है। उस समय पूरे कृषि विभाग के कर्मचारी अगले दिन तिलक लगाकर दफ्तर पहुँचे थे और तत्कालीन कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने भी कहा था कि किसी को तिलक लगाने के कारण निलंबित नहीं किया जाना चाहिए।

दिलचस्प बात यह है कि 2009 में यही विवाद उलटा भी हो चुका है यानी तिलक लगाने वाला खुद DGP था। तब बिहार के पुलिस महानिदेशक आनंद शंकर ड्यूटी के दौरान माथे पर चंदन का तिलक लगाकर दफ्तर आते थे और इसी को लेकर बिहार पुलिसमेन एसोसिएशन ने उन पर निशाना साधा था। एसोसिएशन अध्यक्ष जितेंद्र नारायण सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि DGP का यह आचरण पुलिस मैनुअल की धारा 1061 का उल्लंघन है जो किसी भी पुलिस अधिकारी को ड्यूटी के दौरान तिलक या टीका लगाने से मना करती है।

यानी बिहार में तिलक का यह विवाद न नया है, न एकतरफा। कभी एक कर्मचारी को तिलक लगाने पर निलंबन की धमकी मिली, कभी खुद DGP पर तिलक लगाने के लिए सवाल उठे और अब एक बार फिर DGP ने ही तिलक पर रोक का फरमान जारी किया है। पुलिस मैनुअल की धारा 1061 हर बार बीच में आती है लेकिन उसे लागू करना हमेशा राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता से टकराता रहा है।

2025 में मंगलसूत्र पर भी लगाई गई थी रोक

बिहार पुलिस मुख्यालय के ADG (विधि-व्यवस्था) पंकज दारद ने जुलाई 2025 में एक सर्कुलर जारी कर महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान झुमका, नथिया, चूड़ियां, कंगन, मंगलसूत्र और अन्य भारी गहने पहनने से पूरी तरह मना किया था। इसके साथ ही चटख रंग का लिप बाम और अत्यधिक मेकअप पर भी रोक लगाई गई थी। यह आदेश सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक की सभी महिला पुलिसकर्मियों पर लागू था।

यह आदेश DGP विनय कुमार की 23 जून 2025 को हुई समीक्षा बैठक के बाद आया था जिसमें उन्होंने पुलिस बल के अनुशासन पर चिंता जताई थी। इसके बाद 27 जून को कार्मिक एवं कल्याण प्रभाग ने आधिकारिक ज्ञापन जारी किया और सभी रेंज आईजी, एसएसपी तथा जिलों के एसपी को इसका सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई। नियम तोड़ने पर विभागीय कार्रवाई का प्रावधान रखा गया।

क्या कहते हैं नियम?

बिहार में तैनात एक वरिष्ठ IPS अधिकारी ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि DGP का यह आदेश कोई नया फरमान नहीं है बल्कि यह बिहार पुलिस के 1978 के मैनुअल पर आधारित है। इस मैनुअल में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के आचरण, वर्दी और धार्मिक चिह्नों को लेकर विस्तृत नियम पहले से दर्ज हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की ट्रेनिंग के दौरान ही कर्मियों को इन नियमों की जानकारी दे दी जाती है और यह कोई अचानक थोपा गया नियम नहीं है।

मैनुअल के अनुसार ड्यूटी पर तैनात किसी भी पुलिसकर्मी को किसी भी धर्म के चिह्न, प्रतीक या पहनावे को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है। इसमें हिंदू धर्म का तिलक या चंदन टीका, मुस्लिम धर्म की दाढ़ी सभी पर समान रूप से रोक लागू होती है। नियम का मूल उद्देश्य यही है कि वर्दी में खड़ा पुलिसकर्मी किसी एक धर्म या समुदाय का प्रतिनिधि नहीं बल्कि राज्य का प्रतिनिधि दिखे। हालाँकि, इस नियम में सिख धर्म को एक विशेष छूट दी गई है।

वो बताते हैं कि बाकी धर्मों में भी पूर्ण प्रतिबंध नहीं है लेकिन उसके लिए पहले अनुमति लेना अनिवार्य है। मसलन, नवरात्रि या किसी हिंदू पर्व पर तिलक लगाना हो या किसी मुस्लिम पुलिसकर्मी को रमजान या किसी खास मजहबी जरूरत के चलते दाढ़ी रखनी हो तो उसके लिए पहले वरिष्ठ अधिकारी से लिखित अनुमति लेनी होती है। बिना अनुमति के यह नियम का उल्लंघन माना जाता है।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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