पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य समारोह में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शुभेंदु अधिकारी के साथ ही 5 कद्दावर नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर अपनी जिम्मेदारी संभाली है।
Kolkata | BJP leader Suvendu Adhikari took oath as the first BJP Chief Minister of West Bengal since independence pic.twitter.com/ZoMOINT6RX
— ANI (@ANI) May 9, 2026
बीजेपी ने इस कैबिनेट के जरिए बंगाल के हर कोने- उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल और मतुआ समुदाय तक को साधने की कोशिश की है। आइए जानते हैं शुभेंदु अधिकारी के उन ‘5 सेनापतियों’ के बारे में, जिनके कंधों पर बंगाल को बदलने की जिम्मेदारी है।
दिलीप घोष: संगठन के माहिर खिलाड़ी और जमीनी नेता
दिलीप घोष को बंगाल में BJP की मजबूती का ‘असली आर्किटेक्ट’ माना जाता है। RSS के प्रचारक से लेकर प्रदेश अध्यक्ष और सांसद तक का उनका सफर बहुत प्रभावशाली रहा है। 1 अगस्त 1964 को जन्मे दिलीप घोष ने सालों तक अंडमान-निकोबार में संघ का काम संभाला। वे मेदिनीपुर से सांसद और खड़गपुर से विधायक रह चुके हैं।
दिलीप घोष ने BJP को कोलकाता के ड्राइंग रूम से निकालकर गाँव की झोपड़ियों तक पहुँचाया। उनकी बेबाक बयानबाजी और ‘चाय पे चर्चा’ बंगाल में बेहद मशहूर है। सरकार और संगठन के बीच तालमेल बिठाने में उनका अनुभव नई सरकार के लिए संजीवनी का काम करेगा।

निशीथ प्रमाणिक: उत्तर बंगाल का युवा और प्रखर चेहरा
कूचबिहार के रहने वाले निशीथ प्रमाणिक BJP के सबसे युवा और प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। वे उत्तर बंगाल में पार्टी की जीत के सबसे बड़े नायक माने जाते हैं। निशीथ दलित समाज की ‘राजबंशी’ जाति से आते हैं। वे मोदी सरकार में सबसे युवा मंत्रियों में शामिल थे और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 2026 के चुनाव में उन्होंने माथाभांगा सीट से भारी मतों से जीत दर्ज की।
सीमा सुरक्षा और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर वे काफी मुखर रहे हैं। उन्हें मंत्री बनाकर बीजेपी ने उत्तर बंगाल के विकास और राजबंशी समुदाय को बड़ा सम्मान दिया है। युवाओं के बीच वे एक बड़े आइकन बन चुके हैं।

अग्निमित्रा पॉल: फैशन की दुनिया से राजनीति के अखाड़े तक
अग्निमित्रा पॉल बंगाल में ‘नारी शक्ति’ और आधुनिकता का चेहरा हैं। राजनीति में आने से पहले वे एक मशहूर फैशन डिजाइनर थीं, लेकिन आज वे एक जुझारू नेत्री के रूप में पहचानी जाती हैं। आसनसोल दक्षिण से लगातार दूसरी बार विधायक बनीं अग्निमित्रा बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
अग्निमित्रा पॉल ने संदेशखाली जैसी घटनाओं में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरकर संघर्ष किया। वे शहरी मतदाताओं और महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। कैबिनेट में उनकी मौजूदगी यह साफ करती है कि नई सरकार में महिला सुरक्षा और औद्योगिक विकास प्राथमिकता पर रहेंगे।

अशोक कीर्तनिया: मतुआ समुदाय की बुलंद आवाज
बनगाँव उत्तर (SC) से विधायक अशोक कीर्तनिया को मंत्री बनाना एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। वे मतुआ महासंघ से गहराई से जुड़े हैं और दलित समाज के हितों की बात करते हैं। 52 वर्षीय अशोक कीर्तनिया ग्रेजुएट हैं और करीब 4 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं।
उन्होंने 2026 के चुनाव में 40 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने शरणार्थियों के अधिकारों और CAA (नागरिकता कानून) को लागू कराने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। उन्हें कैबिनेट में शामिल कर बीजेपी ने मतुआ और दलित वोट बैंक को पूरी तरह अपने पाले में मजबूत कर लिया है।

खुदीराम टुडू: जंगलमहल के जनजातियों का गौरव
बांकुरा की रानीबांध (ST) सीट से आने वाले खुदीराम टुडू इस कैबिनेट के सबसे चौंकाने वाले लेकिन महत्वपूर्ण नाम हैं। वे संथाल जनजातीय समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। पेशे से शिक्षक रहे खुदीराम टुडू एक सादगी पसंद नेता हैं।
खुदीराम टुडू ने इस चुनाव में TMC उम्मीदवार को 52 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। जंगलमहल क्षेत्र में TMC के किले को ढहाने में उनकी बड़ी भूमिका रही है।

खुदीराम टुडू को मंत्री पद देकर BJP ने संदेश दिया है कि जनजातीय समाज अब केवल वोटर नहीं, बल्कि सरकार चलाने वाला हिस्सा है। वे जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य के सुधार का चेहरा बनेंगे।


