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टिमोथी इनिशिएटिव के भीतर की कहानी: संस्थापक डेविड नेल्म्स के भारत दौरों और धर्मांतरण के सुरागों की पड़ताल, जानें- मिशनरी कैसे बनाते हैं समाज में पैठ

1992 में भारत की अपनी यात्रा से लेकर 2013, 2016 और 2017 की यात्राओं के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी सोशल मीडिया पर मिलती है। लेकिन इससे पता चलता है कि डेविड नेल्म्स और टीटीआई लंबे वक्त से भारत में धर्मांतरण की गतिविधियों में लगे हुए हैं।

18 और 19 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने द टिमोथी इनिशिएटिव (टीटीआई) नामक ईसाई मिशनरी संगठन से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की । जाँच एजेंसी के मुताबिक, टीटीआई ने महज 6 महीनों में अलग-अलग राज्यों में विदेशी बैंकों के डेबिट कार्डों का इस्तेमाल करके 95 करोड़ रुपए निकाले।

इसमें छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से निकाले गए 6.5 करोड़ रुपए भी शामिल हैं। ऐसा करते हुए टीटीआई ने एफसीआरए नियमों का उल्लंघन किया। गौरतलब है कि यह संगठन एफसीआरए के तहत पंजीकृत नहीं है। इसका मतलब है कि कानूनी रूप से इस संगठन को विदेशी फंडिंग की अनुमति नहीं है।

शुरुआत में इसे ‘प्रोजेक्ट इंडिया’ के नाम से जाना जाता था। इसकी शुरुआत भारत में हुई थी। यह संगठन 2007 से भारत में सक्रिय है, लेकिन देश में इसका इतिहास 1992 से शुरू होता है। इसके संस्थापक डेविड नेल्म्स अपने सहयोगी के साथ भारत आए और ईसायत का प्रचार करने के लिए देशभर के गाँवों में चर्च स्थापित करने का फैसला किया। ऑप इंडिया टीटीआई के कामकाज पर रिपोर्टों की एक सीरीज प्रकाशित कर रहा है।

(स्रोत-टीटीआई)

हमारे रिसर्च के दौरान हमने पाया कि टीटीआई का न केवल भारत और दूसरे देशों में अपना नेटवर्क है, बल्कि यह अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए अन्य चर्चों के साथ भी सहयोग करता है। अपनी पिछली रिपोर्ट में हमने बताया था टीटीआई की नियमावली, किस प्रकार चर्च संस्थापकों को हिंदू बहुल गाँवों में प्रवेश करने, हिंदुओं से संपर्क करने, संदेह से बचने और जातिगत नेताओं का इस्तेमाल कर देश में ईसाइयत का प्रचार करना था।

इस रिपोर्ट में हम टीटीआई की उत्पत्ति के इतिहास और अन्य चर्चों के साथ इसके कामकाज का पता लगाएँगे। टीटीआई का उद्देश्य हिंदुओं और दूसरे धर्म को माननेवालों को ईसाइयत में परिवर्तित करना था। इसका मकसद देश के हर गाँव में कम से कम एक चर्च स्थापित करना है। ईडी की कार्रवाई के बाद भारत में बहुत सारी सामग्री या तो ब्लॉक कर दी गई है या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दी गई है। हालाँकि अभी भी बहुत से सुराग हैं, जिनका पता लगाना अभी भी बाकी है।

(साभार- फेसबुक)

डेविड नेल्म्स की भारत यात्रा के सबूत

जनवरी 2023 में डैन बुरेल नामक ईसाई के प्रचारक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने 1992 में टीटीआई के संस्थापक डेविड नेल्म्स के साथ भारत की अपनी यात्रा के बारे में बताया।

(साभार- टीटीआई ग्लोबल)

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि 1992 की भारत और थाईलैंड की यात्रा उनके जीवन को बदल देने वाली एक मिशन यात्रा थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि 30 वर्षों से अधिक समय से वे और डेविड धर्मांतरण के कार्य में लगे हुए हैं। संभव है कि यही वह यात्रा हो जिसका उल्लेख टीटीआई की वेबसाइट पर किया गया है, जहाँ नेल्म्स भारत में केवल मंदिर और मस्जिदें देखकर ‘दुखी’ दिख रहे थे, क्योंकि वहाँ चर्च नहीं थे। वेबसाइट के अनुसार, इसी यात्रा से टीटीआई की स्थापना का विचार उनके मन में आया।

(बाएँ में डेविड नेल्म्स, साभार- फेसबुक)

यह पोस्ट डेविड की भारत यात्रा और धर्म परिवर्तन की गतिविधियों में उनकी भागीदारी का सबसे पुराना प्रमाण है। इस पोस्ट में डैन और डेविड दोनों की धुंधली तस्वीर थी, जिसे हमने एआई का इस्तेमाल करके स्पष्ट करने की कोशिश की है।

टीटीआई से जुड़े अहम सुराग

संगठन की वेबसाइट भारत में प्रतिबंधित है। इस वेबसाइट के मुताबिक, इसकी स्थापना 2007 में हुई थी। 2009 में टोनी आर्मर ने फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उसने डेविड नेल्म्स को टैग किया था और वीडियो का स्थान बेंगलुरु बताया था। वीडियो का शीर्षक था ‘इंडिया 2009’। वीडियो में दिखाई देने वाली पहली तस्वीर में संभावित भारतीय चर्च संस्थापक डेविड नेल्म्स के साथ खुशी-खुशी एक समूह तस्वीर के लिए बैठे हुए थे।

वीडियो में नेल्म्स और अन्य विदेशी एक उपनगरीय इलाके में घूमते हुए, कमजोर परिवारों से मिलते हुए और बच्चों के साथ काफी समय बिताते हुए दिखाई दिए। ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने धर्मांतरण के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए परिवारों के साथ मेलजोल बढ़ाया। इसके लिए पहले परिवार के बच्चों से दोस्ती की।

खास बात यह है कि अंत में टोनी आर्मर को कर्नाटक के उद्यमी यूबी भट के साथ देखा गया, जो IC814 इंडियन एयरलाइंस अपहरण के पीड़ितों में से एक थे। एक किताब में , टीटीआई ने चर्च संस्थापकों से कहा कि वे स्थानीय लोगों से मेलजोल बढ़ाने के लिए जातिगत नेताओं का इस्तेमाल करें ताकि उन्हें धर्म परिवर्तन कराया जा सके। ऐसा लगता है कि उन्होंने न केवल जातिगत नेताओं का इस्तेमाल किया, बल्कि प्रमुख हस्तियों का भी इस्तेमाल करने की कोशिश की। चाहे वे धर्म परिवर्तन में शामिल हों या नहीं, भारतीयों के बीच टीटीआई की प्रतिष्ठा स्थापित करने के लिए इस्तेमाल किया।

2013 में, डेविड नेल्म्स ने फेसबुक पर पोस्ट किया कि वह 11 से 18 सितंबर तक भारत में रहेंगे और लोगों को आमंत्रित किया कि वे आएँ और देखें कि टीटीआई ने भारत, नेपाल और पाकिस्तान में क्या काम किया है।

(साभार-फेसबुक)

जुलाई 2016 में डेविड ने फेसबुक के माध्यम से यह बताया कि वह भारत जाने वाला है।

डेविड ने जनवरी 2017 में फेसबुक पर एक तस्वीर पोस्ट की। इसका कैप्शन लिखा था, ‘अपने पंजाबी दोस्तों के साथ खूब मस्ती कर रहा हूँ!’ गौरतलब है कि पंजाब उन राज्यों में से शामिल है, जहाँ ईसाइयत का प्रचार तेजी से हुआ है। पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में लाखों हिंदू और सिख अनुयायियों ने धर्मांतरण किया है।

फरवरी 2017 में डेविड नेल्म्स ने फेसबुक पर पोस्ट किया कि वह अमेरिका लौट आए हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि ‘भारत/नेपाल दोनों ही शानदार रहे’। इससे इतना तो अंदाजा लगाया जा ही सकता है कि उन्होंने भारत और नेपाल का दौरा किया था।

डेविड के बेटे जेरेड नेल्म्स वर्तमान में टीटीआई के अध्यक्ष हैं। टीटीआई ने लिंक्डइन पर उनके बारे में एक पोस्ट किया था। पोस्ट में उल्लेख किया गया था कि जेरेड और उनकी पत्नी एम्बर करीब पाँच वर्षों तक भारत में मिशनरी के रूप में सेवा की। पोस्ट से यह संकेत मिलता है कि जेरेड भारत में चर्चों के निर्माण के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए पाँच वर्षों तक रहे।

डेविड नेल्म्स की भारत यात्राओं के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी बहुत कम है। मुख्य रूप से कुछ फेसबुक पोस्ट, एक पुराना टैग किया हुआ वीडियो और कुछ ऐसे संदर्भ हैं जिन्हें सावधानीपूर्वक खोजबीन के बाद ही जोड़ा जा सकता है।

यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि टीटीआई की अधिकांश ऑनलाइन सामग्री भारत में बैन कर दी गई है या सार्वजनिक प्लेटफार्मों से हटा दी गई है। इसलिए, भले ही उपलब्ध रिकॉर्ड छोटा हो, फिर भी यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि भारत नेल्म्स के लिए एक बार की यात्रा नहीं थी, बल्कि टीटीआई की गतिविधियों का एक नियमित और महत्वपूर्ण हिस्सा था।

इन छोटी-छोटी जानकारियों के आधार पर ये पता चलता है कि डेविड नेल्म्स ने कुछ ही सालों के अंदर कई बार भारत का दौरा किया। उनका बेटा जेरेड नेल्म्स भारत में काफी वक्त तक रहा।

खुद टीटीआई ने कहा कि जेरेड और उनकी पत्नी एम्बर ने लगभग पाँच वर्षों तक भारत में मिशनरी के सदस्य के रूप में सेवा की। ये लोग लगातार 5 साल तक भारत में रहे या कई बार भारत आए और गए, यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। लेकिन, इससे यह बात को पूरी तरह साफ है कि नेल्म्स परिवार मिशनरी कार्य को लेकर भारत में लंबे वक्त तक रहा है।

यह मामला तब और भी गंभीर हो जाता है, जब इसे टीटीआई के दावों को जोड़ कर देखा जाता है। अपने ‘किंगडम इम्पैक्ट’ दस्तावेज में उसने दावा किया है कि 2007 से अब तक भारत सहित 50 देशों में उसने 268750 से अधिक चर्च बना दिए हैं और 201954 विधवाओं और अनाथों सहित 2392427 लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित किया है। अगली रिपोर्ट में हम यह पता लगाएँगे कि भारत में चर्चों ने पिछले कुछ सालों में टीटीआई की किस तरह मदद की।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

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Anurag
Anuraghttps://lekhakanurag.com
Anurag is a Chief Sub Editor at OpIndia with over twenty one years of professional experience, including more than five years in journalism. He is known for deep dive, research driven reporting on national security, terrorism cases, judiciary and governance, backed by RTIs, court records and on-ground evidence. He also writes hard hitting op-eds that challenge distorted narratives. Beyond investigations, he explores history, fiction and visual storytelling. Email: [email protected]

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