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तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के ‘घृणा मॉडल’ को अन्नामलाई की चुनौती, पेरियार नहीं, कलाम हैं आदर्श: समझें- ‘We The Change’ से राष्ट्रवाद का शंखनाद कितना अहम

के अन्नामलाई का ये आंदोलन केवल एक नए संगठन का जन्म नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की उस पारंपरिक, संकीर्ण और घृणा-आधारित राजनीति के ताबूत में आखिरी कील ठोकने की शुरुआत है, जिसने दशकों से इस महान धरती को शेष भारत से अलग रखने की साजिश रची थी।

तमिलनाडु की राजनीति में दशकों पुराने द्रविड़ आंदोलनों के ‘घृणा मॉडल’ को सीधी चुनौती देते हुए, पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने एक अभूतपूर्व आंदोलन का शंखनाद किया है। पेरियार, अंबेडकर, उत्तर भारत विरोध और हिंदी विरोध जैसी विभाजनकारी विचारधाराओं पर आधारित राजनीति के विपरीत, अन्नामलाई ने भारत के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श बनाया है। उन्होंने ‘कलाम स्कूल ऑफ आइडियोलॉजी’ के तहत ‘वी द चेंज’ (We The Change) आंदोलन की शुरुआत की है, जिसका प्राथमिक लक्ष्य तमिलनाडु में राष्ट्रवाद और सकारात्मक विकास का बीज बोना है।

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और अपनी बेदाग, साहसी और तेजतर्रार छवि के लिए मशहूर पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने बीजेपी से अपनी राहें आधिकारिक तौर पर अलग कर ली हैं। अन्नामलाई का यह फैसला किसी राजनीतिक द्वेष या आपसी कलह का नतीजा नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की आत्मा को एक नई वैचारिक दिशा देने की एक विराट और दमदार कोशिश है। बिना अपनी पूर्व पार्टी पर कोई निशाना साधे, उन्होंने बेहद गरिमापूर्ण तरीके से इस्तीफा दिया और तुरंत बाद एक नए राजनीतिक आंदोलन की नींव रख दी।

यह आंदोलन केवल एक नए संगठन का जन्म नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की उस पारंपरिक, संकीर्ण और घृणा-आधारित राजनीति के ताबूत में आखिरी कील ठोकने की शुरुआत है, जिसने दशकों से इस महान धरती को शेष भारत से अलग रखने की साजिश रची थी।

अन्नामलाई ने इस आंदोलन के जरिए तमिल गौरव और भारतीय राष्ट्रवाद के अद्भुत संगम की एक नई धारा प्रवाहित की है। इस नए सफर का आगाज होते ही तमिलनाडु की जनता ने जिस तरह इस पर अपना भरोसा जताया है, वह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि राज्य के युवा अब बदलाव के लिए पूरी तरह तड़प रहे हैं।

‘We The Change’ की अद्भुत शुरुआत, महज 10 घंटे में 10 लाख सदस्य

अन्नामलाई ने पारंपरिक राजनीति से बिल्कुल अलग हटकर देश के महानतम सपूत, मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श और वैचारिक प्रतीक बनाया है। उन्होंने कलाम साहब के सिद्धांतों पर आधारित ‘कलाम स्कूल ऑफ आइडियोलॉजी’ के तहत अपने नए आंदोलन ‘We The Change’ (वी द चेंज) की आधिकारिक घोषणा की। यह आंदोलन उनके द्वारा कोयंबटूर में स्थापित किए जाने वाले ‘एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स’ के तहत संचालित होगा।

इस घोषणा का प्रभाव इतना व्यापक और तीव्र था कि महज 10 घंटों के भीतर ही 10 लाख से अधिक लोग, विशेषकर युवा और महिलाएँ इस आंदोलन से जुड़ गए। तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में यह अपने आप में एक अटूट रिकॉर्ड है।

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI ChatGPT)

वैसे, जब दक्षिण की राजनीति में हाल ही में एक अभिनेता की पार्टी ‘टीवीके’ बनी थी, तो उन्होंने मंच से पेरियार और पारंपरिक द्रविड़ प्रतीकों का नाम लेकर वही पुरानी घिसी-पिटी राजनीति की थी। लेकिन अन्नामलाई ने उन सभी विभाजनकारी चेहरों से पूरी तरह दूरी बनाकर यह साबित कर दिया कि वे राज्य में सत्ता बदलने नहीं, बल्कि व्यवस्था और सोच को बदलने आए हैं।

द्रविड़ आंदोलनों का हिंदी, उत्तर भारत और सनातन से घृणा का इतिहास

तमिलनाडु की राजनीति आजादी के पहले से और उसके बाद भी कुछ खास नकारात्मक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। द्रविड़ आंदोलन के नाम पर राज्य में हमेशा हिंदी विरोध, उत्तर भारत विरोध और ब्राह्मण विरोध को ही राजनीति का मूल आधार बनाया गया।

इस द्रविड़ विचारधारा की असलियत बेहद स्याह और समाज को तोड़ने वाली रही है। इसके जनक माने जाने वाले पेरियार का इतिहास देश, संस्कृति और बहुसंख्यक समाज की आस्थाओं के प्रति अत्यंत आक्रामक और घृणा से भरा रहा है। द्रविड़ आंदोलन के नाम पर तमिलनाडु में सनातन धर्म को निशाना बनाया गया, उत्तर भारतीय नागरिकों के खिलाफ नफरत फैलाई गई और भाषा के नाम पर देश को बाँटने की कोशिशें हुईं।

हद तो तब हो गई जब इस विचारधारा के तहत मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के पावन चरित्र तक पर उंगली उठाई गई और जनभावनाओं को आहत किया गया। द्रविड़ राजनीति ने हमेशा तमिल अस्मिता को भारतीयता के विरोधी के रूप में पेश किया, जिससे राज्य का युवा देश की मुख्यधारा से वैचारिक रूप से कटता चला गया। इस घृणा मॉडल के सहारे वहाँ के क्षेत्रीय दलों ने दशकों तक सत्ता सुख भोगा और भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े साम्राज्य खड़े किए।

विडंबना यह रही कि तमिलनाडु की इस जमीन पर राष्ट्रीय पार्टियाँ भी इन द्रविड़ मुद्दों का खुलकर पुरजोर विरोध नहीं कर पाती थीं, क्योंकि उन्हें राज्य में गठबंधन की बैसाखियों की जरूरत होती थी। लेकिन अन्नामलाई ने इस कायरतापूर्ण राजनीति को लात मारकर सीधे सच का रास्ता चुना है।

कलाम कार्ड क्यों है अन्नामलाई का सबसे दमदार मास्टरस्ट्रोक?

ऐसे नफरत भरे और कट्टर माहौल में अन्नामलाई द्वारा डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना वैचारिक प्रतीक चुनना भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा और सकारात्मक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। डॉ. कलाम एक ऐसे अजातशत्रु नेता और वैज्ञानिक रहे हैं, जिनका सम्मान द्रविड़ समर्थक, राष्ट्रवादी, अल्पसंख्यक, अगड़े, पिछड़े और समाज के हर वर्ग के लोग समान रूप से करते हैं।

रामेश्वरम के एक साधारण तमिल परिवार में जन्मे कलाम साहब ने कभी भी खुद को किसी विक्टिम कार्ड या अल्पसंख्यक पहचान के सहारे आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने शिक्षा, कड़ी मेहनत, देशभक्ति और विज्ञान के बल पर देश के शीर्ष वैज्ञानिक और राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त किया।

अन्नामलाई ने कलाम साहब को आगे रखकर द्रविड़ राजनीति के उस नैरेटिव को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, जो कहता था कि एक सच्चा तमिल राष्ट्रवादी नहीं हो सकता। अन्नामलाई का यह कदम समाज को जोड़ने वाला है। यह आंदोलन किसी खास जाति, धर्म या संप्रदाय को बढ़ावा देने के बजाय देश और राज्य के सामूहिक और समग्र विकास पर केंद्रित है।

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI ChatGPT)

अन्नामलाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तमिल संस्कृति और भाषा पर अगाध गर्व करना और भारत माता के प्रति पूरी तरह समर्पित रहना एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

संस्थान के बेस पर राजनीति का महाप्लान किया तैयार

अन्नामलाई एक बेहद पढ़े-लिखे, पूर्व नौकरशाह और दूरदर्शी राजनेता हैं, जो आक्रामक राजनीति करने के साथ-साथ गंभीर मुद्दों पर बात करने से कभी नहीं घबराते। उन्होंने अपनी इस राजनीतिक यात्रा की शुरुआत अचानक नहीं की, बल्कि इसके पीछे उनकी एक गहरी संस्थागत तैयारी है।

अन्नामलाई ने कोयंबटूर में जिस कलाम सेंटर की स्थापना की है, उसे बेस बनाकर वे पूरे तमिलनाडु में गवर्नेंस, शिक्षा, विज्ञान और तकनीक आधारित राजनीति को आगे बढ़ाएंगे। यह संस्थान राज्य के उन युवाओं को प्रशिक्षित करेगा जो राजनीति में आना चाहते हैं लेकिन जिनके पास कोई पारिवारिक गॉडफादर नहीं है।

अन्नामलाई की नजर बहुत दूरदर्शी है और उनका लक्ष्य साल 2031 का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव है। अपने दीर्घकालिक विजन को समझाते हुए उन्होंने बेहद व्यावहारिक बात कही कि केवल एक मुख्यमंत्री, 234 विधायक या 39 सांसद मिलकर तमिलनाडु की इस सड़ चुकी मौजूदा व्यवस्था को नहीं बदल सकते। अगर हमें वाकई पूरी व्यवस्था को बदलना है, तो हमें पंचायत स्तर से लेकर पार्षद, मेयर और शीर्ष पदों तक करीब 30,000 ईमानदार, कर्मठ और राष्ट्रभक्त नए लोगों की एक पूरी फौज तैयार करनी होगी। उनका यह आंदोलन आने वाले वर्षों में धीरे-धीरे एक राजनीतिक दल का रूप लेगा और राज्य की भ्रष्ट पारिवारिक राजनीति को उखाड़ फेंकेगा।

कैप्टन विजयकांत के साथ वो अनुभव और राष्ट्रवाद का असली दर्द

अपने इस विजन के पीछे के अनुभव को साझा करते हुए अन्नामलाई ने अपने जीवन के एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि साल 2009 में जब वे देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईएम (IIM) लखनऊ से एमबीए कर रहे थे, तब उन्होंने विशेष अनुमति लेकर डीएमडीके (DMDK) के संस्थापक और दिवंगत अभिनेता-राजनेता कैप्टन विजयकांत के साथ तीन महीने की जमीनी इंटर्नशिप की थी।

लोकसभा चुनाव के दौरान ग्रामीण इलाकों में धूल फाँकते हुए और जमीनी स्तर पर काम करते हुए उन्होंने चुनावी राजनीति और सार्वजनिक सेवा की वास्तविक समझ हासिल की थी। यही जमीनी अनुभव आज उनके काम आ रहा है।

नितिन नवीन को भेजे अपने गरिमापूर्ण इस्तीफे में अन्नामलाई ने राष्ट्रीय पार्टियों के उस कड़वे सच और दर्द को भी बयाँ किया, जिससे वे लंबे समय से जूझ रहे थे। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रीय दल कभी भी उस भाषा और भावना के साथ बात नहीं कर पाए जिसे तमिलनाडु के आम लोग अपनी आत्मा से समझ सकें।

अन्नामलाई ने भाजपा में रहते हुए इसी धारणा को बदलने की पुरजोर कोशिश की और कई अंदरूनी तथा बाहरी बाधाओं के बावजूद राज्य के कोने-कोने में राष्ट्रवाद की अलख जगाई। उन्होंने गर्व से यह साफ किया कि वे एक ऐसे पक्के राष्ट्रवादी हैं जो क्षेत्रीय आकांक्षाओं, तमिल भाषा और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर सर्वोच्च गर्व करते हैं।

तमिलनाडु में राष्ट्रवाद के स्वर्णिम युग की शुरुआत

के. अन्नामलाई का यह कदम तमिलनाडु की राजनीति में एक नए सूर्योदय की तरह है। उन्होंने साबित कर दिया है कि सकारात्मकता, विकास और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर बिना किसी नफरत का सहारा लिए भी एक विशाल जन आंदोलन खड़ा किया जा सकता है। द्रविड़ दलों ने जहाँ हमेशा उत्तर भारत और सनातन से घृणा को अपना हथियार बनाया, वहीं अन्नामलाई ने डॉ. कलाम के ‘मनों के मिलन’ (Unity of Minds) के सिद्धांत को अपना कवच बनाया है।

‘We The Change’ आंदोलन के जरिए तमिलनाडु की धरती पर राष्ट्रवाद का जो बीज बोया गया है, वह आने वाले समय में एक विशाल वटवृक्ष बनेगा। देश की अखंडता को सर्वोपरि मानते हुए तमिल अस्मिता को नया आकाश देने का अन्नामलाई का यह प्रयास न केवल दमदार है, बल्कि भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

तमिलनाडु की जनता ने 10 लाख से अधिक की संख्या में जुड़कर यह दिखा दिया है कि वे अब घृणा की राजनीति से ऊब चुके हैं और अन्नामलाई के नेतृत्व में एक नए, समृद्ध और राष्ट्रवादी तमिलनाडु के निर्माण के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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