फीफा विश्व कप का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। हर दिन कुछ नया कारनामा हो रहा है। यह विश्व कप हमें नित कई शानदार मैच और कई खूबसूरत कहानियां दे रहा है। संपूर्ण विश्व से फुटबॉल के दीवाने तीनों मेजबान देशों (अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको) तक पहुँचे हैं। लग ही नहीं रहा कि यह दुनिया एक माह पूर्व निराशा से घिरी हुई थी। तीनों मेजबान देशों में तमाम जग से लोग पहुंचे हैं और साथ-साथ इस महाउत्सव का आनंद ले रहे हैं।
कल कई बेहतरीन मैच खेले गए। बीते दिनों में कनाडा और मेक्सिको शानदार जीत दर्ज कर अगले दौर में अपनी जगह सुनिश्चित कर ही चुके थे। अब बारी अमेरिकी टीम की थी। उनका सामना तुर्की के विरुद्ध एक बड़ा उलटफेर कर चुकी ऑस्ट्रेलिया से था।
सिएटल के स्टेडियम में मैच शुरू होता है। दोनों ही टीमें यह मैच जीत अगले दौर में जगह बनाना चाहती थीं। स्टेडियम में हजारों की संख्या में घरेलू समर्थकों की भीड़ अपनी टीम की हौसला-अफजाई के लिए तैयार थी और अमेरिकी टीम ने अपने घरेलू समर्थकों को बिल्कुल भी निराश नहीं किया। तिरेसठ प्रतिशत समय गेंद अपने नियंत्रण में रखते हुए अमेरिकी टीम ने 2-0 से यह मैच जीत, बाकी दोनों मेजबान देशों की ही भांति अगले दौर में जगह बना ली।
आगे, बोस्टन में स्कॉटलैंड का सामना मोरक्को की टीम से था, जहां एक दफा फिर इस्माइल सैबारी ने अपनी टीम के लिए एक बेहतरीन गोल दागकर न सिर्फ जरूरी जीत दिलाई, बल्कि ब्राजील के साथ अपने ग्रुप में अंकों के आधार पर बराबरी पर खड़ा कर दिया।
अगला मैच फिलाडेल्फिया में था, जहां ब्राजील की टीम हैती के विरुद्ध मैदान में उतरने जा रही थी। यह मैच बेहद शानदार रहा। ब्राजील 4-4-2 की फॉर्मेशन के साथ मैदान में उतरी। एक बेहद ही आक्रामक फुटबॉल खेलते हुए पहले हाफ में ही ब्राजील ने तीन गोल दाग दिए थे। माथियूस कुन्हा ने दो शानदार गोल किए व एक गोल विनीसियस जूनियर ने लगाया। हालाँकि, पहले हाफ में ब्राजील को एक झटका तब लगा, जब उनके स्टार खिलाड़ी राफिन्हा को चोटिल हो जाने के कारण बीच मैच में ही मैदान से बाहर जाना पड़ा। बाद में मेडिकल टेस्ट होने पर मालूम हुआ कि उन्हें हैमस्ट्रिंग इंजरी हो गई है।
मैच का दूसरा हाफ कमोबेश थोड़ा शांत ही रहा। ब्राजील ने और गोल करने के प्रयास तो किए, मगर उन्हें सफलता नहीं मिली। फॉरवर्ड लाइन में माथियूस कुन्हा व विनीसियस जूनियर ने बेहद शानदार फुटबॉल खेलकर तमाम दर्शकों का दिल जीत लिया। दोनों के गोलों की बदौलत ब्राजील यह मैच 3-0 से जीतने में सफल रहा।
इसके पश्चात, सैन फ्रांसिस्को में इस टूर्नामेंट की डार्क हॉर्स कही जा रही तुर्की की टीम का मुकाबला पराग्वे से था। ग्रुप डी का यह मुकाबला दोनों ही टीमों के लिए ‘करो या मरो’ वाला था। खैर, मैच शुरू होता है। कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले ही चौबीस वर्षीय मातिआस गलार्ज़ा ने एक गोल दागकर पराग्वे को मुकाबले में अहम बढ़त दिला दी। यह इस विश्व कप में किसी भी टीम द्वारा लगाया गया अब तक का सबसे तेज गोल था। तुर्की के खिलाड़ियों की हालत ऐसी थी कि काटो तो खून नहीं; एकाएक यह क्या हुआ था, वे समझ ही न पाए।
तुर्की के लिए यह मैच जीतना बेहद जरूरी था। सभी खिलाड़ी एकजुट होकर धैर्य के साथ अटैक करना शुरू कर देते हैं। चालहानोलू, अर्दा गुलर और केनान यिल्दिज़ लगातार विरोधी गोलपोस्ट पर घातक हमले करने लगे, परंतु सफलता मिल नहीं पा रही थी। तभी पहले हाफ के बिल्कुल अंतिम क्षणों में पराग्वे के सबसे अनुभवी खिलाड़ी मिग्वेल अलमिरोन को रेफरी द्वारा रेड कार्ड दिखा दिया जाता है। रेड कार्ड अर्थात मिग्वेल अलमिरोन को अब मैदान से बाहर जाना था। तुर्की के खिलाड़ियों व समर्थकों में एकाएक खुशी की लहर दौड़ जाती है। अब मैच में वापसी के द्वार खुलते नजर आ रहे थे।
दूसरा हाफ शुरू होता है। तुर्की लगातार विरोधी गोलपोस्ट पर हमले करता है; एक के बाद एक अटैक। मात्र दस खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर पराग्वे की टीम जैसे-तैसे अपने किले की रक्षा कर रही थी। आज शायद पराग्वे के लड़ाके गोल न खाने का कोई दृढ़ संकल्प करके आए थे। तुर्की के तमाम भगीरथ प्रयासों को उन्होंने नाकाम कर दिया।
मैच 1-0 से समाप्त हो जाता है और पराग्वे यह मैच जीत जाता है। चौबीस वर्षों बाद फीफा विश्व कप में वापसी करने वाली तुर्की ने इस मैच में अठत्तर प्रतिशत समय गेंद अपने कब्जे में रखते हुए पराग्वे के गोलपोस्ट पर तैंतीस दफे हमले किए। एक पूरा हाफ दस खिलाड़ियों के साथ खेल रही पराग्वे ने इन सभी तैंतीस हमलों को आज जाने कैसे गोल में तब्दील नहीं होने दिया। नतीजा यह हुआ कि अच्छा फुटबॉल खेलकर भी आज तुर्की हार गई। जोहान क्रुएफ ने सच ही तो कहा था, “जीतने के लिए, आपको अपने प्रतिद्वंद्वी से एक गोल अधिक करना होता है।” तुर्की आज यही नहीं कर पाई और इस हार के चलते वह विश्व कप से बाहर हो गई।
तुर्की ने अब तक ग्रुप स्टेज के अपने दोनों मैचों में मिलाकर विरोधी गोलपोस्ट पर कुल बासठ शॉट्स लगाए, परंतु वे टूर्नामेंट में फिलहाल एक भी गोल करने में नाकामयाब रहे हैं। यह सबसे बड़ा कारण रहा कि इतने सारे युवा सितारों से लैस तुर्की की टीम अच्छा फुटबॉल खेलने के बावजूद अपने दोनों मैच हारकर घर वापस जाएगी।
खैर आगे, ह्यूस्टन स्टेडियम में नीदरलैंड्स को स्वीडन के खिलाफ ग्रुप एफ के मैच में उतरना था। मैच शुरू होता है। लगभग उनहत्तर हजार दर्शक स्टेडियम में मौजूद थे, जिसमें स्टेडियम के तीन छोरों पर नीदरलैंड्स के समर्थक पारंपरिक नारंगी रंग पहने अपनी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए तैयार थे।
मैच शुरू होते ही दोनों टीमें लगातार अटैक करती हैं। प्रयास यह रहता है कि मैच जीतकर ग्रुप में अपनी स्थिति मजबूत की जाए। ‘ओरांजे’ के सेंट्रल फॉरवर्ड ब्रायन ब्रॉबी मैच के पाँचवें व सत्रहवें मिनट में दो गोल दागकर अपनी टीम को 2-0 से आगे कर देते हैं। लेकिन ग्योकेरेस, एलेक्जेंडर इसाक और अयारी जैसे घातक अटैकिंग माइंडसेट वाले खिलाड़ियों की मौजूदगी के चलते स्वीडन कभी भी हताश नजर नहीं आया। वे लगातार नीदरलैंड्स के गोलपोस्ट पर हमले कर रहे थे, बस गोल स्कोर नहीं कर पा रहे थे।
दूसरा हाफ शुरू होता है, लेकिन अबकी दफा कोडी गाक्पो सैंतालीसवें व चौवनवें मिनट में नीदरलैंड्स के लिए लगातार दो गोल कर टीम को चार गोल की बढ़त दिला देते हैं। स्कोर 4-0 हो जाता है। स्वीडन फिर भी हथियार नहीं डालती, वह अब भी लड़ती है। मैच के उनसठवें मिनट में एंथोनी इलांगा स्वीडन के लिए एक गोल कर देते हैं। स्कोरबोर्ड पर अब स्कोर 4-1 हो जाता है। लेकिन मैच के अंतिम क्षणों में एक बार फिर, पिछले मैच के गोलस्कोरर समरविले एक गोल लगाकर 5-1 के स्कोर के साथ इस मैच में नीदरलैंड्स की जीत सुनिश्चित कर देते हैं। जिसने यह मैच देखा नहीं, उसे स्कोरकार्ड बताएगा कि मैच एकतरफा रहा, परन्तु ऐसा था नहीं। स्वीडन की टीम बहुत बहादुरी से अंत तक लड़ती रही। उन्होंने कई घातक काउंटर-अटैक भी किए, लेकिन आज नीदरलैंड्स के गोलकीपर वेरब्रूगन ने कई अहम बचाव किए। नीदरलैंड्स वह टीम हो गई है जिसने विश्व कप के इतिहास में सौ से अधिक गोल दागे हैं, परन्तु अब तक विश्व कप की ट्रॉफी अपने हाथों में लेने से वंचित रह गई है।
आगे, धुआंधार अंदाज में टूर्नामेंट में अपने अभियान का आगाज करने वाली जर्मनी के समक्ष टोरंटो में आइवरी कोस्ट की टीम थी। ग्रुप ई के इस मुकाबले में सभी को चौंकाते हुए आइवरी कोस्ट, फ्रैंक केसी के गोल की बदौलत मैच के तीसवें मिनट में जर्मनी पर अहम बढ़त बना लेती है। जर्मनी वापसी के प्रयास करती रहती है, परन्तु हर दफा आइवरी कोस्ट का मिडफील्ड व रक्षापंक्ति मिलकर उनके हमलों को नेस्तनाबूद कर देती है। उनके अनुभवी गोलकीपर भी लगातार कई शानदार सेव कर रहे थे। पहले हाफ की समाप्ति पर स्कोर 1-0 ही रहता है।
दूसरे हाफ का खेल शुरू होता है। लगभग बीस मिनट का खेल हो जाने पर भी आइवरी कोस्ट जर्मनी की टीम पर बढ़त बनाए हुए थी। मैच के साठ मिनट बीत जाने पर कोच नागेल्समान ट्रिपल सब्स्टीट्यूशन करते हैं और पिछले मैच के स्कोरर उंदाव के साथ अमीरी व लेवेलिंग को मैदान पर उतारते हैं। एक बार फिर उंदाव को मैदान में उतारने का फैसला तुरुप का इक्का साबित होता है। मैच के अड़सठवें मिनट में स्थानापन्न खिलाड़ी अमीरी गोल करने हेतु उंदाव की तरफ गेंद बढ़ाते हैं; उंदाव कोई गलती नहीं करते और शानदार गोल दाग जर्मन खेमे को राहत की सांस लेने का मौका दे देते हैं। स्कोर हो जाता है 1-1।
आइवरी कोस्ट लगातार काउंटर अटैक करके गोल करने की कोशिशें जारी रखती है। लेकिन, एक दफा फिर उंदाव मैच के 90+3 मिनट में गोल दाग देते हैं। आइवरी कोस्ट के तमाम समर्थकों के दिलों को तोड़ते हुए जर्मनी 2-1 से यह मैच जीतकर, पिछले दो संस्करणों की विफलताओं को पीछे छोड़, अगले दौर में अपनी जगह पक्की कर लेती है। उंदाव दो मैचों में तीन गोल दाग चुके हैं व दो गोल असिस्ट भी कर चुके हैं। निश्चित तौर पर वे अब तक जर्मनी के सबसे असरदार हथियार साबित हुए हैं। उनका यह प्रदर्शन निश्चित ही अब कोच नागेल्समान को उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह देने को मजबूर कर देगा।
फिर, ग्रुप ई के अन्य मुकाबले में कंसास सिटी स्टेडियम में इक्वाडोर के सम्मुख जनसंख्या के आधार पर विश्व कप में क्वालीफाई करने वाला सबसे छोटा राष्ट्र कुराकाओ था। यह मैच 0-0 के स्कोर के साथ ड्रॉ रहा, परन्तु इस मैच ने खेलप्रेमियों को आज एक नया नायक दे दिया। कुराकाओ के सैंतीस वर्षीय गोलकीपर, जिनका नाम आज से पहले यह खबर पढ़ रहे शायद ही किसी व्यक्ति ने सुना होगा, आज मैच के हीरो रहे। इक्वाडोर ने विपक्षी गोलपोस्ट पर छब्बीस शॉट्स लगाए, जिसमें से पंद्रह निशाने पर रहे। लेकिन कुराकाओ के गोलकीपर एलोय रूम ने उन सभी पंद्रह शॉट्स को गोलपोस्ट के भीतर जाने से रोक दिया। यह वाकई ऐतिहासिक था।
कुराकाओ जैसा छोटा राष्ट्र, जो पहली दफा विश्व कप का हिस्सा बना है, अपने नायक एलोय रूम के इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत विश्व कप के इतिहास में आज अपना पहला अंक अर्जित करने में सफल हो गया।
आगे, मेक्सिको में खेले गए ग्रुप एफ के एक अन्य मुकाबले में जापान ने ट्यूनीशिया को 4-0 से रौंद दिया। पिछले मैच में जापान के लिए गोल करने वाले दाईची कमाडा ने ही आज भी जापान के लिए खूबसूरत गोल दागकर खाता खोला। इस बड़ी जीत के साथ ‘समुराई ब्लूज’ ने अपने ग्रुप में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।
अब, आज रात भारतीय समयानुसार रात साढ़े नौ बजे अटलांटा स्टेडियम में 2010 विश्व कप के विजेता स्पेन का मुकाबला पिछले संस्करण की विजेता (अर्जेंटीना) को हराकर संपूर्ण विश्व को चौंका देने वाली सऊदी अरब की टीम से होगा। ख़बरें हैं कि लामीन यमाल प्लेइंग इलेवन में वापसी कर सकते हैं।
आगे, रात साढ़े बारह बजे ईरान के ‘पर्शियन चीताज’ का सामना बेल्जियम की सशक्त टीम से होगा। वहीं, रात साढ़े तीन बजे उरुग्वे मियामी के स्टेडियम में काबो-वर्दे से भिड़ती नजर आएगी।
माहौल गर्माता जा रहा है। उन्माद अपने चरम पर है। बने रहिए साथ, इस खूबसूरत खेल की जादुई कहानियों का दौर जारी रहेगा।


