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केरल में एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर के पादरी बिनु वझामुट्टोम पर नाबालिगों से मारपीट, बंधक बनाकर जबरदस्ती काम कराने के आरोप: ईसाई नेता के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग

पादरी बिनू वझामुट्टोम से जुड़ा विवाद तब शुरू हुआ जब इडुक्की जिले के कट्टप्पना के पास अनक्कारा के रहने वाले 17 साल के एक लड़के ने चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट (CPU) से संपर्क किया। लड़के ने आरोप लगाया कि पथानामथिट्टा स्थित संस्था में रहने के दौरान उसके साथ मारपीट की गई और उससे जबरन काम कराया गया।

केरल के पथानामथिट्टा में 21 जून 2026 को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ओमल्लूर स्थित एलोहीम ग्लोबल वर्शिप सेंटर के बाहर प्रदर्शन किया। यह केंद्र पादरी बिनू वझामुट्टोम द्वारा चलाया जाता है। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पादरी की गिरफ्तारी की माँग की।

उन पर आरोप है कि उनकी संस्था द्वारा संचालित स्नेहथानल में नाबालिगों और अन्य लोगों के साथ मारपीट की गई, उन्हें अवैध रूप से रखा गया और उनसे काम करवाया गया।

जब बीजेपी कार्यकर्ता पादरी की गिरफ्तारी की माँग करते हुए नारे लगा रहे थे, उसी दौरान चर्च के अनुयायी साप्ताहिक प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए वहाँ पहुँच गए। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने उन्हें केंद्र के अंदर जाने नहीं दिया और पादरी के खिलाफ नारेबाजी की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई।

पादरी के समर्थकों ने हाथों में बाइबल उठाकर कहा कि उन्हें प्रार्थना करने के लिए अंदर जाने दिया जाए क्योंकि यह उनका अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति पर आरोप हैं तो उनका फैसला कानूनी प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए, न कि मजहबी कार्यक्रमों को रोककर।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुबह से ही केंद्र के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने बीच में हस्तक्षेप किया और पादरी के समर्थकों को सुरक्षा के साथ प्रार्थना हॉल के अंदर पहुँचाया, जिसके बाद प्रार्थना सभा जारी रह सकी।

पास्टर बिनु वझमुट्टोम ने कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के साथ साझा किया था मंच

पादरी बिनू वझामुट्टोम से जुड़े विवाद के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर की कुछ पुरानी तस्वीरें फिर से साझा की जाने लगीं, जिनमें दोनों एक मंच पर साथ दिखाई दे रहे हैं। मार्च 2024 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शशि थरूर ने लिखा था कि उन्होंने एलोहीम ग्लोबल वर्शिप सेंटर जाकर पादरी बिनू से मुलाकात की और उनके निमंत्रण पर वहाँ मौजूद लोगों को संक्षिप्त रूप से संबोधित भी किया।

एलोहीम ग्लोबल वर्शिप सेंटर के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पादरी बिनू वझामुट्टोम की ओर से आयोजित और संचालित प्रार्थना सभाओं के कई वीडियो मौजूद हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि ऐसी प्रार्थना सभाओं का इस्तेमाल कमजोर और संवेदनशील हिंदुओं को ईसाई मजहब अपनाने के लिए प्रभावित करने के उद्देश्य से किया जाता है।

(साभार: Youtube)

17 साल के लड़के की शिकायत से सामने आया था उत्पीड़न का मामला

पादरी बिनू वझामुट्टोम से जुड़ा विवाद तब शुरू हुआ जब इडुक्की जिले के कट्टप्पना के पास अनक्कारा के रहने वाले 17 साल के एक लड़के ने चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट (CPU) से संपर्क किया। लड़के ने आरोप लगाया कि पथानामथिट्टा स्थित संस्था में रहने के दौरान उसके साथ मारपीट की गई और उससे जबरन काम कराया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसे शिक्षा, रहने की सुविधा और रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग देने का वादा करके संस्था में लाया गया था। विवाद सामने आने के बाद पादरी का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह किशोर को नौकरी आधारित शिक्षा और रहने की व्यवस्था देने का भरोसा देते दिखाई दिए।

बताया गया कि पीड़ित करीब तीन महीने तक उस केंद्र में रहा। अपनी शिकायत में उसने कहा कि उसकी पढ़ाई प्रभावित होने लगी और उससे बार-बार संस्था में काम कराया जाने लगा, जिसके बाद उसने प्रबंधन से सवाल करना शुरू किया। आरोप है कि बाद में प्रबंधन ने उस पर चोरी का आरोप लगाया और डंडे से उसकी पिटाई की।

पीड़ित के परिवार का यह भी आरोप है कि संस्था चलाने वाले लोग बच्चों को डराने और नियंत्रण में रखने के लिए पेपर स्प्रे का इस्तेमाल करते थे। परिवार के मुताबिक, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के कारण किशोर को गंभीर मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

FIR दर्ज, तीन स्टाफ सदस्य गिरफ्तार

लड़के की शिकायत के आधार पर कट्टप्पना पुलिस ने शुरुआत में संस्था के मैनेजर रेजी और स्टाफ सदस्य सिजो और बेनी के खिलाफ मामला दर्ज किया। बाद में यह मामला एलावुमथिट्टा पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस ने 20 जून को पथानामथिट्टा बस स्टैंड के पास से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

आरोपितों पर मारपीट, अवैध रूप से बंधक बनाकर रखने, बाल मजदूरी कराने और किशोर न्याय अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसी बीच 15 साल के एक अन्य लड़के की शिकायत के आधार पर अलग मामला भी दर्ज किया गया, जिसमें उसने भी अपने साथ मारपीट होने का आरोप लगाया।

इडुक्की की एक पूर्व कर्मचारी ने भी शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि पादरी बिनू वझामुट्टोम ने उसे धमकी दी थी। इसी महिला ने 17 साल के लड़के के परिवार को उत्पीड़न की जानकारी दी थी। महिला ने अपने और अपने बच्चों की सुरक्षा की माँग करते हुए पादरी के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। वहीं संस्था के कामकाज को लेकर सामाजिक न्याय विभाग भी जाँच कर रहा है।

CWS ने गंभीर अनियमितताओं की ओर किया इशारा

विवाद सामने आने के बाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) ने आरोपों की जाँच की। जाँच के दौरान ऐसे संकेत मिले कि संस्था में रह रहे अन्य लोगों के साथ भी उत्पीड़न और शोषण हुआ हो सकता है। पथानामथिट्टा सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष लीना सुभाष ने कहा कि संस्था में लोगों को अवैध रूप से रखा जा रहा था।

उन्होंने बताया कि वहाँ तीन बच्चे मिले और खराब हालत में मिली एक महिला और उसके शिशु को भी वहाँ से सुरक्षित निकाला गया।

उन्होंने कहा, “हमें यह भी जानकारी मिली है कि एक दूसरी महिला और उसका बच्चा भी यहाँ रह रहे थे। उन्हें भी तलाशना जरूरी है। जिस 17 साल के लड़के को हमने वहाँ से निकाला, उसके शरीर पर चोट के निशान थे। उन्होंने बयान दिया है कि उनके साथ मारपीट की गई, उनसे काम कराया गया और उन्हें कोई भुगतान नहीं किया गया।”

अब अधिकारी यह जाँच कर रहे हैं कि क्या वहाँ रह रही अन्य महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया गया था।

पंचायत अध्यक्ष ने कहा- रह रहे लोगों ने की मारपीट की शिकायत

चेन्नीरक्करा ग्राम पंचायत की अध्यक्ष कोचू मोल कोशी ने कहा कि वहाँ रह रहे लोगों के बयान से पता चलता है कि स्नेहथानल वृद्धाश्रम में लगातार उत्पीड़न होता था। उन्होंने बताया कि जब अधिकारी वहाँ पहुँचे, उस समय संस्था में 21 लोग रह रहे थे। इनमें से दो लोगों को हर दिन काम कराने के लिए पादरी के घर ले जाया जाता था।

कोशी ने कहा, “वहाँ रहने वाले लोगों ने बताया कि उनके साथ मारपीट की जाती थी। वहाँ मौजूद सभी बुजुर्ग महिलाओं ने हमें बताया कि उन लड़कों को पीटा जाता था। जो महिला वहाँ सफाई का काम करती थी, उसके साथ एक छोटा बच्चा भी था। उसे अपने बच्चे की देखभाल तक करने नहीं दी जाती थी और उससे पूरे समय काम कराया जाता था।”

अधिकारी अब उस दूसरी महिला और बच्चे की भी तलाश कर रहे हैं, जिनके बारे में बताया गया है कि वे भी संस्था में रह रहे थे।

पादरी ने आरोपों से किया इनकार, साजिश का लगाया आरोप

पादरी बिनू वझामुट्टोम ने 21 जून 2026 को मलयालम में एक वीडियो जारी कर कहा कि उन्हें किसी भी तरह के उत्पीड़न की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार यह मामला बच्चों के बीच हुए किसी विवाद से जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला अदालत में है, इसलिए वह इस पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर सकते।

उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि वह कहीं छिप गए थे। पादरी ने दावा किया कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है और यह पूरा विवाद उसी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के तहत अधिकतम सजा मिलनी चाहिए, लेकिन उनके और संस्था के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि स्नेहथानल पिछले पाँच साल से चल रहा है। उन्होंने विदेशी फंड लेने या संस्था के नाम पर चंदा जुटाने की बात से इनकार किया और दावा किया कि संस्था उनके मंत्रालय और एलोहीम ग्लोबल वर्शिप सेंटर से मिलने वाले पैसों से चलाई जाती है।

वझामुट्टोम ने ओमल्लूर पंचायत अध्यक्ष अथिरा पर भी व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण झूठे बयान देने का आरोप लगाया और कहा कि वह वकीलों से सलाह लेने के बाद कानूनी कार्रवाई करेंगे। मामले की आगे जाँच जारी है। पुलिस और बाल कल्याण विभाग के अधिकारी पूर्व निवासियों और स्टाफ के बयान दर्ज कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या संस्था में और लोगों के साथ भी मारपीट, जबरन काम, अवैध रूप से रोके रखने या किसी अन्य तरह के शोषण की घटनाएँ हुई थीं।


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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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