बंगाल के दक्षिणी कोलकाता के तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम ढहने से अब तक 11 की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे को हटाने और फँसे हुए लोगों को ढूँढने के लिए सेना की एडवांस ‘ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार’ (GPR) प्रणाली, NDRF और स्थानीय प्रशासन युद्ध स्तर पर जुटे हुए हैं।
यह दर्दनाक हादसा कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि राज्य की पूर्व TMC सरकार के कार्यकाल में फले-फूले ‘सिंडिकेट राज’ और भ्रष्टाचार का सीधा नतीजा है। बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस हादसे को ‘पिछली सरकार के पापों का फल’ करार दिया है।
CM शुभेंदु ने साफ कहा कि पूर्व TMC सरकार के ढीले रवैये, घूसखोरी और बिना किसी जाँच-परख के अवैध नक्शों को पास करने की आदत की वजह से आज फिर मासूमों की जान गई है। इस भीषण हादसे के बाद शुभेंदु सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए पिछली सरकार के समय स्वीकृत हुए सभी निर्माणाधीन व्यावसायिक और रिहायशी प्रोजेक्ट्स के काम पर 31 जुलाई तक तत्काल रोक लगा दी है।
तारातला का जानलेवा सच: बिना सॉइल टेस्ट के पास हुआ था नक्शा
कोलकाता के तारातला में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट की पट्टे पर दी गई भूमि पर यह त्रिस्तरीय निर्माणाधीन गोदाम बनाया जा रहा था। जाँच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछली TMC सरकार के राज में कोलकाता नगर निगम (KMC) ने 17 जनवरी को बिना किसी सॉइल टेस्ट (मिट्टी की जाँच) या लोड टेस्ट के ही इस डिफेक्टिव स्टील-फ्रेम नक्शे को हरी झंडी दे दी थी। भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़े इस ढांचे के कमजोर लोहे के बीम भारी-भरकम कंक्रीट का वजन नहीं संभाल पाए और पूरी छत भरभरा कर काम कर रहे मजदूरों पर गिर गई।
“Building plan of under-construction warehouse that collapsed in Kolkata faulty.”
— News Arena India (@NewsArenaIndia) June 24, 2026
– Bengal CM Suvendu Adhikari pic.twitter.com/sFm5L1yWF9
इस जानलेवा लापरवाही के मामले में पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। अब तक इस मामले में गोदाम के मालिक शंभूनाथ बेहरा और स्ट्रक्चरल इंजीनियर कमल सामंत सहित गुलजार हुसैन, दिबाकर भंडारी और अब्दुल हमीद जैसे 5 मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती जाँच में ही बिल्डिंग प्लान में गंभीर खामियाँ पाई गई हैं। इसी वजह से 31 जुलाई तक सभी संदिग्ध निर्माण कार्यों को फ्रीज कर उनका कड़ा ‘स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट’ शुरू कर दिया गया है, ताकि 1 अगस्त से केवल वैध परियोजनाओं को ही काम की अनुमति मिले।
TMC नेताओं और प्रमोटरों का गठजोड़: तस्वीरों ने खोला राज
इस हादसे के बाद राजनीतिक गलियारों में तब हड़कंप मच गया जब जाँच के दौरान मलबे में मृत पाए गए मुख्य कॉन्ट्रैक्टर असगर हुसैन की कई तस्वीरें सामने आईं। इन तस्वीरों में असगर हुसैन पूर्व TMC सरकार के कद्दावर मंत्री और कोलकाता के पूर्व मेयर फरहाद हकीम के साथ कई राजनीतिक और निजी कार्यक्रमों में बेहद करीब दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीरें साफ बयां करती हैं कि TMC के शीर्ष नेताओं और अवैध निर्माण करने वाले प्रमोटरों के बीच कितना गहरा और पुराना रिश्ता रहा है।
TMC के इसी कथित ‘कट-मनी’ कल्चर और सिंडिकेट के कारण कोलकाता में नगर निगम के नियमों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाई जाती रहीं। स्थानीय प्रमोटर मोटी घूस देकर और स्थानीय राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर बिना किसी डर के अवैध निर्माण करते थे। जब भी नगर निगम का कोई ईमानदार अधिकारी इन अवैध निर्माणों को रोकने की कोशिश करता, तो उन्हें TMC नेताओं के करीबी गुंडों द्वारा डराया-धमकाया और प्रताड़ित किया जाता था, जिसके कारण प्रशासन पूरी तरह पंगु बन चुका था।
कोलकाता में 3,000 ‘टाइम बम’: रेड जोन में तब्दील हुए कई इलाके
कोलकाता नगर निगम की वॉचलिस्ट के अनुसार, शहर के टेंगरा, तिलजला, गार्डन रीच, तपसिया, इकबालपुर और बड़ाबाजार जैसे घने इलाकों में करीब 3,000 अवैध और खतरनाक निर्माण आज भी ‘टाइम बम’ बनकर खड़े हैं। TMC के शासनकाल में बिल्डरों ने अवैध रूप से भारी मुनाफा कमाने के चक्कर में नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया। आलम यह है कि महज 2 मंजिल के स्वीकृत नक्शे पर प्रमोटरों ने जबरन 5-5 मंजिलें तान दीं, जिससे ये इमारतें अब खतरनाक तरीके से एक तरफ झुक रही हैं।
𝗔𝗯𝗼𝘂𝘁 𝟯𝟬𝟬𝟬 𝗯𝘂𝗶𝗹𝗱𝗶𝗻𝗴𝘀 𝘂𝗻𝗱𝗲𝗿 𝗞𝗠𝗖 𝘄𝗮𝘁𝗰𝗵𝗹𝗶𝘀𝘁.
— The West Bengal Index (@TheBengalIndex) May 16, 2026
The Buildings Department under the Kolkata Municipal Corporation (KMC) has identified 3,000 buildings in 'red zones' across six boroughs of Kolkata that have grossly violated the civic body's… pic.twitter.com/iZFks8Th72
शहरी विकास मंत्रालय के ढीले रवैये के कारण कोलकाता के पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया। प्रमोटरों ने TMC नेताओं के संरक्षण में शहर के दर्जनों पुराने तालाबों और जल निकायों (Water Bodies) को मिट्टी और मलबे से पाट दिया और उनके ऊपर कमजोर बुनियाद वाली बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दीं। नियमों के मुताबिक दो मकानों के बीच जरूरी खाली जगह (ओपन स्पेस) छोड़ने के नियम का पालन कहीं नहीं किया गया, जिसके कारण ये बस्तियाँ बेहद असुरक्षित और संकरी हो चुकी हैं।
पुरानी तारीखों का खूनी इतिहास: TMC राज के वो खौफनाक हादसे
यह पहली बार नहीं है जब कोलकाता में TMC समर्थित प्रमोटरों के लालच ने लोगों की जान ली है। इससे पहले 18 मार्च 2024 को कोलकाता के गार्डन रीच इलाके (जो कि तत्कालीन शहरी विकास मंत्री फरहाद हकीम का ही निर्वाचन क्षेत्र था) में एक 5 मंजिला अवैध निर्माणाधीन इमारत ढह गई थी, जिसमें 13 मासूम लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। उस समय भी KMC की जाँच में सामने आया था कि प्रमोटर ने लागत बचाने के लिए 16mm की जगह केवल 10mm के पतले लोहे के रॉड इस्तेमाल किए थे और छत पर 50,000 ईंटें लाद दी थीं, जिसे कमजोर पिलर सह नहीं पाए।
इतना ही नहीं, जनवरी 2025 में टॉलीगंज के नकतला इलाके में एक 4 मंजिला इमारत अचानक एक तरफ झुक गई थी, जिसका निर्माण भी साल 2009-10 में एक तालाब को पाटकर किया गया था। वहीं, 14 मई 2026 को अवैध रूप से बनी तिलजला की एक इमारत में भीषण आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई, और उससे पहले 26 जनवरी को आनंदपुर में बिना फायर क्लीयरेंस के चल रहे दो अवैध गोदामों में लगी आग में 27 कर्मचारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। TMC राज में हुए ये लगातार हादसे साबित करते हैं कि पैसे के लालच में जनता की सुरक्षा को हमेशा दांव पर लगाया गया।
केंद्र के पैसे का दुरुपयोग
पूर्व TMC सरकार पर न केवल प्रशासनिक ढिलाई बल्कि वित्तीय भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप हैं। केंद्र सरकार द्वारा राज्य के विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए भेजे जाने वाले करोड़ों रुपए के फंड को TMC सरकार ने अपने निजी राजनीतिक प्रचार और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया। केंद्रीय पैसों का इस्तेमाल विकास कार्यों में करने के बजाय सिंडिकेट राज को मजबूत करने में किया गया, जिससे राज्य की कानून व्यवस्था और बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया।
पीड़ितों के लिए सहायता राशि और शुभेंदु सरकार का कड़ा संकल्प
इस दर्दनाक हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक-संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएँ प्रकट की हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तुरंत एक्शन लेते हुए विधानसभा में मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 10-10 लाख रुपए और घायलों को 1-1 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने का ऐलान किया है।
शुभेंदु सरकार ने साफ कर दिया है कि पिछली सरकार के इस भ्रष्ट तंत्र को अब राज्य में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने एक हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है, जो पूरे राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) और अवैध निर्माणों पर नकेल कसने के लिए काम करेगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि 31 जुलाई तक चलने वाले इस सेफ्टी ऑडिट के बाद जितने भी अवैध ढांचे मिलेंगे, उन पर सरकार का सख्त बुलडोजर चलेगा ताकि भविष्य में तारातला और गार्डन रीच जैसे खूनी हादसों को हमेशा के लिए रोका जा सके।


