मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (HC) ने लव जिहाद का शिकार हिंदू महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आरोपित और महिला के शौहर मुस्लिम जिम ट्रेनर को उसे मेंटेनेंस (गुजारा भत्ता) की रकम देने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि पीड़ित हिंद महिला कानून रूप से आरोपित मुस्लिम की पत्नी नहीं है। हाई कोर्ट ने माना कि हिंदू महिला की बच्ची का पिता आरोपित मुस्लिम ही है इसीलिए मेंटेनेंस की रकम दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि निचली अदालत ने आरोपित की महीने की कमाई केवल 10 से 20 हजार रुपए आँकी थी। जबकि आरोपित जिम ट्रेनर और कारोबारी हैं, जिसकी महीनेभर की आय एक लाख से ज्यादा है। इसीलिए हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपित से पीड़ित हिंदू महिला और उसकी बच्ची को 30-30 हजार रुपए देने का आदेश दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह भी माना कि हिंदू महिला को प्रताड़ित किया गया था।
दरअसल, मामला लव जिहाद से जुड़ा है। हिंदू महिला ने आरोप लगाया कि मुस्लिम जिम ट्रेनर ने धर्म छिपाकर उससे शादी की थी। फिर साल 2020 में महिला को युवक का असली आधार कार्ड मिला, जिससे उसके बोहरा मुस्लिम होने की सच्चाई सामने आई। महिला ने विरोध किया तो आरोपित ने महिला के माता-पिता को जान से मारने की धमकी दी।
महिला ने यह भी बताया कि उसके साथ मारपीट की गई और यहाँ तक कि इस्लाम कबूलने का भी दबाव डाला गया। बाद में महिला ने एक बच्चे को भी जन्म दिया और साल 2021 में वह अपने मायके चली गई। लेकिन आरोपित ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और शिव मंदिर में घुसकर उसका अपहरण करने की कोशिश की। आरोपित ने मंदिर के पुजारी के परिवार को भी डराया-धमकाया।
इसके बाद महिला ने इंदौर के द्वारकापुरी थाने में आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 452, 498-A, 323, 294, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया। इसके अलावा उसके खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3 और 5 के तहत भी केस दर्ज हुआ।

