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‘गाय हिंदुओं के लिए पवित्र, इसकी हत्या धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकती है’: गोमांस के साथ पकड़े गए आरिफ को जमानत देने से गुजरात HC का इनकार

आरिफ के खिलाफ गोधरा टाउन बी पुलिस थाने में गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम, 2011 की धारा 5(1), 6(b), 8(2), 8(4) और 10 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 और गुजरात पुलिस एक्ट की धारा 119 के तहत FIR दर्ज की गई है।

गुजरात हाई कोर्ट ने गोमांस के साथ पकड़े गए आरोपित की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपित पर पहले से ही इस तरह के आठ मामले दर्ज हैं और पिछले मामलों में जमानत मिलने के बावजूद वह बार-बार ऐसे अपराध करता रहा है, इसलिए उसे रिहा नहीं किया जा सकता।

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म में गाय को पवित्र माना जाता है और गुजरात सरकार ने इसकी सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाए हैं। आरोपित की पहचान मोहम्मद आरिफ अब्दुल रजाक के रूप में हुई है। उसके खिलाफ दिसंबर 2025 में गोधरा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था।

3 जनवरी 2025 को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और तभी से वह जेल में बंद है। आरिफ के खिलाफ गोधरा टाउन बी पुलिस थाने में गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम, 2011 की धारा 5(1), 6(b), 8(2), 8(4) और 10 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 और गुजरात पुलिस एक्ट की धारा 119 के तहत FIR दर्ज की गई है।

क्या है पूरा मामला?

मामले की जानकारी के अनुसार, 1 दिसंबर 2025 को गोधरा पुलिस को सूचना मिली थी कि गोमांस की तस्करी की जा रही है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने मोहम्मद के घर पर छापा मारा, जहाँ से 23 किलो गोमांस बरामद हुआ। मौके से आरोपित मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि अन्य आरोपित भागने में सफल हो गए।

जाँच में यह सामने आया कि मोहम्मद अपनी कार के जरिए गोमांस की तस्करी करता था और इसके लिए उसने कुछ अन्य लोगों को भी रखा हुआ था। हाई कोर्ट में आरोपित मोहम्मद आरिफ के वकील ने दलील दी कि वह 3 जनवरी से जेल में बंद है, जाँच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।

अब मामले में कुछ भी बरामद करने के लिए बाकी नहीं है और ट्रायल में काफी समय लग सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपित का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन जब राज्य सरकार ने अपनी दलील रखी, तो बताया गया कि मोहम्मद आरिफ के खिलाफ इस तरह के आठ मामले पहले भी दर्ज हो चुके हैं।

हर बार वह जमानत पर बाहर आकर फिर से गोमांस की तस्करी में शामिल हो जाता था। सरकार ने इन सभी मामलों की सूची कोर्ट में पेश करते हुए कहा कि आरोपित की गतिविधियों से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है। इसके अलावा जिन अन्य आरोपितों को मौके से पकड़ा जाना था, वे अभी फरार हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की जाँच करने के बाद कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपित के खिलाफ मामला बनता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपित को पहले जमानत मिलने के बावजूद उसने उसकी स्वतंत्रता का दुरुपयोग करते हुए फिर से ऐसे अपराध करना जारी रखा।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, “संविधान कहता है कि हर नागरिक को पर्यावरण का संरक्षण करना चाहिए और अन्य जीवों के प्रति करुणा रखनी चाहिए। मूल अधिकार वैसे तो सीधे तौर पर लागू नहीं होते, लेकिन वे संविधान की मूल भावना और राज्य की मंशा को दर्शाते हैं।”

कोर्ट ने आगे कहा, “इन्हीं संवैधानिक निर्देशों को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने पशु संरक्षण अधिनियम और पशुओं के प्रति क्रूरता रोकथाम अधिनियम बनाए हैं। गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम के तहत गाय और उसके वंश के वध पर प्रतिबंध लगाया गया है और उनके संरक्षण व सुरक्षा के लिए प्रावधान किए गए हैं।”

कोर्ट ने कहा, “प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपित बार-बार गोवंश की हत्या और उसके अवैध परिवहन से जुड़े मामलों में शामिल रहा है। इस तरह की गतिविधियाँ सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।”

‘गाय हिंदुओं के लिए पवित्र है, इसकी हत्या धार्मिक भावनाओं को पहुँचा सकती है ठेस

कोर्ट ने कहा, “कोर्ट इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं कर सकता कि भारतीय समाज के एक बड़े वर्ग, विशेषकर हिंदू और जैन समुदाय के लिए गाय पवित्र है और वे उसके संरक्षण को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। ऐसे में बार-बार गोहत्या के मामलों में संलिप्तता लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा सकती है और सामाजिक तनाव पैदा कर सकती है।”

कोर्ट ने आगे कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता जरूरी है और उसका महत्व भी है, लेकिन यह पूर्ण नहीं होती और इसके साथ समाज के व्यापक हितों को भी ध्यान में रखना होता है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता समाज के हितों पर हावी नहीं हो सकती। कोर्ट के लिए यह आवश्यक है कि आरोपित की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़े सामाजिक हितों के बीच संतुलन बना रहे। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए हैं और अभियोजन पक्ष को भी कहा है कि वे जल्द से जल्द गवाहों की जाँच पूरी करें।

(मूल रुप से यह रिपोर्ट गुजराती में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)


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મેઘલસિંહ પરમાર
મેઘલસિંહ પરમાર
ઇતિહાસ-રાજકારણમાં રુચિ ધરાવતો, ઘટનાઓના ઊંડાણમાં જઈને બૃહદ પરિપેક્ષથી જોવામાં-લખવામાં વિશેષ રસ ધરાવતો પત્રકાર. ક્યારેક લેખક, ક્યારેક રિસર્ચર, ક્યારેક ફેક્ટચેકર.

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