Homeराजनीतिपर्यावरण और विकास में संतुलन से समृद्धि की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश, '1...

पर्यावरण और विकास में संतुलन से समृद्धि की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश, ‘1 पेड़ माँ के नाम’ अभियान बना रहा विश्व रिकॉर्ड: पढ़ें 9 साल में योगी सरकार ने कैसे की ‘हरित क्रांति’

सीएम योगी का वृक्षारोपण कार्यक्रम 'एक पेड़ माँ के नाम' के लिए 12 जुलाई अहम दिन है। राज्य में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, नदियों के किनारे वृक्षारोपण और बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ पर्यावरण पर काफी ध्यान दिया गया है। सरकार ने अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से इनका संरक्षण किया है।

हरित विकास, समृद्ध उत्तर प्रदेश! ये नारा है यूपी की बीजेपी सरकार का। इसके तहत पिछले 9 वर्षों से सरकार पौधरोपण से लेकर कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर काम कर रही है। यूपी देश का सबसे पहला ईवी इस्तेमाल करने वाला राज्य बन गया है। एक्सप्रेस वे पर ईवी चार्जिंग स्टेशन बन गए हैं। इन सबके बीच सरकार का पौधरोपण अभियान भविष्य में उत्तर प्रदेश को पर्यावरण संतुलन और विकास के बीच आदर्श राज्य के रूप में प्रस्तुत करने वाला है।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत 35 करोड़+ पौधरोपण

सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए महाअभियान चलाया जा रहा है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान भी इसका हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 5 जून को हुई थी। उत्तर प्रदेश में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत 12 जुलाई को राज्य में एक दिन का बृहत वृक्षारोपण कार्यक्रम किया जाएगा, जिसमें एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का नया रिकॉर्ड बनाया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से शुरू किया गया यह एक राष्ट्र व्यापी महाअभियान है, जिसके तहत हर नागरिक से अपनी माँ के नाम पर कम से कम एक पेड़ लगाने का आह्वान किया गया है। इसमें नागरिकों को संकल्प दिलाया जा रहा है कि वे न केवल पेड़ लगाएँ, बल्कि शरारती तत्वों और जानवरों से उसकी सुरक्षा भी करें और जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएँ।

5 जून 2026 को ‘उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंध परियोजना’ के शुभारंभ अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के आधिकारिक ‘लोगो’ का अनावरण किया गया था।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत साल 2025-26 में 37 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन राज्य में अक्टूबर 2025 तक 37.21 करोड़ पौधों का रोपण कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।

इससे पहले भी सरकार ने कई योजनाओं के माध्यम से राज्य में हरित क्षेत्र का विकास किया है। व्यापक तौर पर पौधरोपण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। पौधरोपण में तकनीक का इस्तेमाल और वृक्षों के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। भविष्य में के प्रयासों से प्रदेश में निरंतर बढ़ रहा हरित आवरण आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव रख रहा है।

9 वर्षों में 247 करोड़ से अधिक पौधरोपण

पिछले 9 साल में योगी सरकार ने व्यापक अभियान चलाकर 247+ करोड़ पौधे लगाने में सफलता पाई। इसे एक ‘जन आंदोलन’ का रूप देकर संभव बनाया गया, जिसमें समाज ने नेतृत्व किया और सरकार ने सहयोगी की भूमिका निभाई। साल 2017 में सरकार के पास वृक्षारोपण के लिए मात्र 5.5 करोड़ पौधे थे, लेकिन 2026 में सरकारी और निजी नर्सरियों की क्षमता बढ़ाने से पौधों का स्टॉक 57 करोड़ हो चुके हैं।

इनमें सांस्कृतिक और औषधीय महत्व वाले पौधों की संख्या काफी है। इससे न केवल संख्या बढ़ेगी, बल्कि पौधों की प्रजातियों में भी गुणात्मक बदलाव आया है। राज्य में 948 ‘विशाल हेरिटेज वृक्षों’ को पहचान कर उन्हें संरक्षित किया गया है।

साल 2017 में प्रदेश में मात्र 9.18 फीसदी क्षेत्र हराभरा था। लेकिन वर्तमान में 9.96 फीसदी हिस्सा पेड़-पौधों से ढ़का हुआ है। सरकार पिछले 9 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व तरक्की की है। एक्सप्रेस वे, सड़क निर्माण, मेट्रो और दूसरी सुविधाओं को बढ़ावा देने के बावजूद वन क्षेत्रों को बढ़ाने में सफल रही है। यह सरकार की अहम उपलब्धि है।

2047 तक 20 फीसदी हिस्से होंगे वनक्षेत्र

2030 तक राज्य में वनक्षेत्र को बढ़ा कर 15 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है। आजादी के सौ साल पूरे होने पर अर्थात 2047 तक राज्य का 20 फीसदी हिस्से में हरित विकास किया जाएगा।

वनावरण वृद्धि का राष्ट्रीय औसत 3.41फीसदी है जबकि उत्तर प्रदेश में 3.72 फीसदी की दर से हरित क्षेत्र का विकास हो रहा है यानी राष्ट्रीय औसत से 0.31 फीसदी ज्यादा। देश में वनावरण की दृष्टि से यूपी अभी दूसरे नंबर पर है। आर्थिक समीक्षा 2025-26 के मुताबिक, पौधरोपण का असर ये है कि राज्य में साल 2020-21 से 2024-25 के बीच वृक्षारोपण से 84.5 मिलियन टन कार्बन का अवशोषण हुआ है।

‘इंडिया स्टेट ऑफ फ़ॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) 2023 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में ग्रीन कवर एरिया में भारत की दूसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

यह उपलब्धि राज्य द्वारा वृक्षारोपण, वृक्ष संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में की जा रही लगातार कोशिशों को रेखांकित करती है और एक हरित उत्तर प्रदेश के निर्माण में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

नदियों के किनारे औषधीय और छायादार फलदार युक्त पौधों के रोपण को बढ़ावा देने के लिए ‘गंगा बायोडायवर्सिटी पार्क’ की स्थापना की जा रही है। प्रत्येक जनपद में ‘अमृत वन’ स्थापित किए गए है।

सरकार की अमृत सरोवर योजना

राज्य में भूजल स्तर के गिरने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अप्रैल 2022 में मिशन अमृत सरोवर की शुरुआत हुई। इसके तहत अब तक 19111 से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि 25000 से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा रहा है। ऐसा करने वाला यूपी देश के अग्रणी राज्यों में से एक है।

अमृत सरोवरों का निर्माण ग्रामीण विकास विभाग करवा रहा है, जिसके लिए कम से कम एक एकड़ जमीन की जरूरत है और उसकी गहराई इतनी हो कि इसमें लगभग 10000 क्यूबिक मीटर पानी आ सके।

इतना ही नहीं पुराने तालाबों और दूसरे प्राकृतिक जल स्रोतों का भी वैज्ञानिक तरीके से पुनरुद्धार किया जा रहा है। अगर गहराई कम हो गई है तो उसे ठीक किया जा रहा है। किनारों की ढलान ठीक की जा रही है, ताकि वर्षा का पानी उसमें जा सके । इससे भूजल स्तर में और सुधार आएगा।

तालाबों, पोखरों के चारों ओर नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन जैसे विशाल छायादार और औषधि वाले पेड़ लगाए जा रहे हैं और एक हरित पट्टी का निर्माण किया जा रहा है। इसका मकसद मिट्टी के कटाव को रोकना, भूजल स्तर बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना है।

नदियों का पुनरुद्धार और पौधरोपण कार्यक्रम

योगी सरकार पौधारोपण महायज्ञ-2026 के तहत राज्य से होकर बहने वाली गंगा- यमुना समेत 13 प्रमुख नदियों के किनारे पेड़-पौधे लगाकर उसे हरा-भरा बनाएगी। अविरल धारा पौधरोपण कार्यक्रम में नदियों के किनारे 5 किलोमीटर की परिधि में 2673 स्थलों पर 22240.11 हेक्टेयर क्षेत्र में 3.83 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जाएँगे।

कार्यक्रम का मकसद नदियों की अविरल धारा के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र को हराभरा बनाना है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ जल को प्रदूषित होने से बचाना और उसका संरक्षण करना है।

राज्य से बड़े बड़े शहरों से होकर जाने वाली गंगा की धारा स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बने, इसके लिए 603 स्थलों पर 4,495.72 हेक्टेयर में 79.86 लाख पौधे रोपे जाएँगे। जिन जगहों पर वृक्षारोपण में ज्यादा जोर होगा उनमें प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, वाराणसी, गाजीपुर, मीरजापुर, भदोही, काशी वन्यजीव शामिल हैं।

अभियान के तहत यमुना के किनारे वाले 647 स्थलों पर 6531.77 हेक्टेयर क्षेत्र में 1.08 करोड़ से अधिक पौधे रोपे जाएँगे।
इसके अलावा गोमती के किनारे 297 स्थलों पर 31.37 लाख पौधे लगाए जाएँगे, बेतवा नदी के तट पर 52.35 लाख पौधे, सरयू और घाघरा के किनारे 254 स्थलों पर 27.75 लाख पौधे लगाए जाएँगे।

सई नदी के किनारे 23.29 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। राप्ती, छोटी गंडक, सोन, रामगंगा, केन, हिंडन और चंबल जैसी नदियों के तट को भी हराभरा बनाया जाएगा ताकि पर्यावरण संरक्षण कर भविष्य के लिए जल- जीवन- जमीन को संरक्षित किया जा सके। गोरखपुर में 1400 एकड़ के रामगढ़ ताल और 400-500 एकड़ में फैले चिलवा ताल का सफल संरक्षण भी किया गया है।

राज्य सरकार ने अब तक 3363 किलोमीटर लंबाई वाली 50 नदियों का पुनरुद्धार किया है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में 3388 तालाबों का निर्माण किया गया। इससे भूजल स्तर और जल संचयन के क्षेत्र में वृद्धि हुई है। किसानों को खेती और पशुपालन में इससे सहयोग मिल रहा है।

नमामि गंगे प्रोजेक्ट के साथ साथ मनरेगा ने भी इस अभियान में अहम भूमिका निभाई है। 2014-15 में शुरू हुई नमामि गंगे प्रोजेक्ट का लक्ष्य गंगा और उसकी सहायक नदियों के प्रदूषण उन्मूलन और पुनर्जीवन पर केन्द्रित है। निर्मल गंगा, अविरल गंगा, जन गंगा और ज्ञान गंगा के माध्यम से सीवेज प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, सामूहिक भागीदारी और अनुसंधान पर जोर दिया गया।

विश्व बैंक के सहयोग से 2741 करोड़ रुपए की लागत से देश का पहला एयर शेड आधारित परियोजना यूपी कैप स्कीम शुरू की गई।

वन और पारिस्थितकी तंत्र का सफल जुड़ाव

वनक्षेत्र में वृद्धि का सीधा और सकारात्मक असर राज्य के वन्यजीव और पारिस्थितकी तंत्र पर पड़ा है। बाघों के संरक्षण के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनी हैं जिससे बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2006 में इनकी संख्या 109 थी, जो 2022 में बढ़कर 205 हो गई है।

यह राष्ट्रीय बाघ आबादी का 5.6% है पीलीभीत टाइगर रिजर्व को बाघों की संख्या दोगुनी होने पर प्रतिष्ठित ‘TX2 अवार्ड’ दिया गया है और चित्रकूट के 53,000 हेक्टेयर क्षेत्र को चौथे ‘रानीपुर टाइगर रिजव’ के रूप में पहचाना गया है।

गंगा डॉल्फिन एवं सारस: देश की कुल 6,327 गंगा डॉल्फिन में से सबसे अधिक 2,397 डॉल्फिन (37.8%) उत्तर प्रदेश में पाई गई हैं। 2023 में इसे ‘राज्य जलीय जीव’ घोषित किया गया है। राज्य पक्षी सारस की संख्या साल 2021 के 17329 थी, जो 2025 में 20281 हो गई है।

गिद्ध संरक्षण: पारिस्थितकी तंत्र के लिए अहम माने जाने वाले रेड-हेडेड गिद्धों के संरक्षण के लिए देश का पहला ‘गिद्ध प्रजनन केन्द्र’ गोरखपुर में स्थापित किया गया है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा घोषित करने वाला यह देश का प्रथम राज्य है, जिसके तहत 2024 में 10 बाघ और 55 तेंदुए, 2025 में 19 बाघ, 54 तेंदुए और 02 भेड़ियों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।

श्रावस्ती में ‘केन नाला’ को बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट के रूप में विकसित किया गया है। 100 साल से अधिक पुराने पेड़ों को ‘विरासत वृक्ष’ घोषित कर संरक्षित किया जा रहा है। उदाहरण के लिए संरक्षित वृक्षों में बाराबंकी में 5000 साल पुराना पारिजात वृक्ष अहम है।

कार्बन क्रेडिट योजना से पर्यावरण का बचाव

किसानों के लिए देश की पहली कृषि-वानिकी के तहत ‘कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना’ उत्तर प्रदेश में लागू की गई है। इससे किसानों को पयावरण अनुकूल खेती और वृक्षारोपण के बदले काबन डाइऑक्साइड अवशोषण की एवज में अतिरिक्त रकम मिल रही है। योजना के तहत किसानों को हर 5 साल में 06 डॉलर प्रति कार्बन क्रेडिट की दर से भुगतान किया जा रहा है।

पहले चरण में 6 मंडलों के 25140 किसानों को पंजीकृत किया गया है। राज्य में अब तक किसानों को आंशिक भुगतान के रूप में 49.05 लाख रुपए वितरित किए जा चुके हैं और 25 लाख दुधवा टाइगर नेशनल पार्क फाउंडेशन को दिए गए हैं।

प्रदूषण मुक्त ईवी योजना

राज्य सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए इलेक्ट्रिकल वाहनों को सपोर्ट कर रही है। इसके बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा देने के लिए एक विस्तृत नीति लागू की गई है। योजना के तहत चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों को प्रति यूनिट (उपकरण व बुनियादी ढाँचे की लागत का) ₹10 लाख तक की भारी सब्सिडी और रियायती बिजली दरें दी जा रही हैं। चार्ज पॉइंट ऑपरेटरों को चार्जर, अपस्ट्रीम इन्फ्रास्ट्रक्चर और बैटरी उपकरणों की लागत का 20% (प्रति यूनिट ₹10 लाख तक) सब्सिडी के रूप में मिलता है।

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए बिजली की दरें सामान्य औसत लागत से भी कम तय की हैं। राज्य में ‘पीएम ई-ड्राइव’ और राज्य की योजना के तहत हजारों नए चार्जिंग स्टेशन लगाए जा रहे हैं। लखनऊ, कानपुर, मेरठ, अयोध्या, प्रयागराज जैसे शहरों में पीपीपी मॉडल पर 714 नए ईवी स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।

इतना ही नहीं राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति, 2022 के अंतर्गत सब्सिडी भी दी जा रही है। राज्य में पंजीकृत और निर्मित वाहनों के रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पर 100 फीसदी की छूट दी है, जो 13 अक्टूबर 2027 तक लागू है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर ₹5,000, फोर-व्हीलर पर ₹1 लाख तक और ई-बसों पर ₹20 लाख तक की सब्सिडी दी जा रही है।

इसका असर ये हुआ है कि देश में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन उत्तर प्रदेश में हैं। राज्य में रजिस्टर कराए गए इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 4.14 करोड़ से ज्यादा हैं। दिल्ली दूसरे और महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर है। यूपी में ईवी वाहनों में बड़ी संख्या ई-रिक्शा की है, जो करीब 85 फीसदी हैं।

सबसे ज्यादा ईवी रनिंग हाईवे वाला राज्य बना उत्तर प्रदेश

देश में सबसे ज्यादा 22 एक्सप्रेस वे उत्तर प्रदेश में हैं, जिनमें से यमुना एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे को ईवी रनिंग हाईवे बनाया जा चुका है साथ ही कई एक्सप्रेस वे पर काम जारी है। दिल्ली-आगरा यमुना एक्सप्रेस वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। अब इन एक्सप्रेस वे पर ईवी वाहन सरपट दौड़ रही हैं।

सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए चलाए जा रहे पीएम सूर्य घर योजना का लाभ भी राज्य को काफी मिला है। अयोध्या के 18 नगर निगमों को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2022 के तहत अगले 5 वर्षों में 22000 मेगावॉट वाले सौर ऊर्जा परियोजना शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। 2017 में 288 मेगावॉट वाले सौर ऊर्जा परियोजना थे, जो अब 2815 मेगावाट बिजली पैदा करने वाले सौर ऊर्जा परियोजनाएँ राज्य में चल रही हैं।

राज्य में अवैध कब्जे के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया जा रहा है और इसका भी फायदा पर्यावरण को मिल रहा है। कुकरेल में अवैध कब्जों को हटा कर वहाँ शानदार ‘सौमित्र वन’ स्थापित किया गया है। राज्य में अटल वन,एकलव्य वन, ऑक्सी वन और सिटी वन बनाए गए हैं। राज्य में भूमि संरक्षण पर भी काफी काम हुआ है।

रामसर साइट्स के तौर पर 10 आद्रभूमि का संरक्षण किया गया है। इनमें गंगा रिवर, बखीरा,सरसई नावर झील, असन,सूर सरोवर, हैदरपुर वेटलैंड, पार्वती अगरा,सांडी,समसपुर अहम हैं। इन्हें अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी मिल चुकी है। गंगा नदी के किनारे वाले 275 आर्द्रभूमि को चिन्हित कर उनमें से 231 के लिए इंटीग्रेटेड वेटलैंड मैनेजमेंट प्लान का निर्माण किया गया है। ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश देश का दूसरा राज्य है।

शहरों को हरा भरा रखने के लिए भी कई योजनाएँ चल रही हैं। उत्तर प्रदेश शहरी हरित नीति इसके लिए योगी सरकार ने लागू किया है। इसके तहत मियावाकी वन वर्टिकल गार्डन और ग्रीन रूफ का विकास किया जा रहा है। सबसे अच्छे शहर को अल्टीमेट ग्रीन सिटी का खिताब दिया जाएगा। जीवाश्म इंधन पर निर्भरता कम करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2024 लागू की गई है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेरी हिंदू बेटी अब मुझे और मेरे बेटे को जान से मारना चाहती है’: पिता ने ऑपइंडिया से बयाँ किया दर्द, कहा- वसीम, इकरा...

गाजियाबाद में एक हिंदू पिता ने वसीम,उसके परिवार, इकरा और नेहा खान पर उनकी बेटी के ब्रेनवॉश और परिवार की हत्या की साजिश के गंभीर आरोप लगाए हैं।

FIFA World Cup: मेस्सी के चमत्कार से अर्जेंटीना ने मिस्र को हराकर क्वार्टर फाइनल में की एंट्री, स्विट्जरलैंड भी बढ़ा आगे; महसूस करें बीती...

अटलांटा स्टेडियम में खेले गए इस सांस रोक देने वाले मैच में गत विजेता अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराकर क्वार्टर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया।
- विज्ञापन -