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UP को मिला विकास का एक और हाईवे, लखनऊ-कानपुर के बीच 3D एलिवेटेड तकनीकसे लैस अवध एक्सप्रेस-वे हुआ ऑपरेशनल: जानें लंबाई, स्पीड लिमिट से लेकर सब कुछ

यूपी का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे जनता के लिए खुल गया है। ₹4200 करोड़ रुपए की लागत से बनी 63 किलोमीटर के इस एक्सप्रेस वे को आधुनिक तकनीक से 18 किलीमोटर तक एलिवेटेड बनाया गया है।

यूपी को एक और सौगात मिल गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह,केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिलकर लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के रूप में यह सौगात दी है। इसके साथ ही 3 घंटे का सफर अब मात्र 35-40 मिनट में पूरा किया जा सकता है। इस पर अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियाँ दौड़ सकती हैं। 63 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस वे ₹4200 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है।

उद्घाटन के बाद तीनों नेता खुद पहले इस एक्सप्रेस-वे का लुत्फ उठाने के लिए सफर कर लखनऊ पहुँचे। मंगलवार (14 जुलाई 2026) से इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

एक्सप्रेस वे के हैं कई नाम

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे को NE6, अवध एक्सप्रेस वे और डिफेंस कॉरिडोर के नाम से जाना जाता है। इस कॉरिडोर को भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एनएचएआई के साथ मिलकर बनाया है इसलिए इस मार्ग को NE-6 कहा जाता है।

लखनऊ-कानपुर तक का पूरा इलाका अवध के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा के अंतर्गत आता है। इसलिए सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए इसे अवध एक्सप्रेस वे कहा जाता है।

यूपी डिफेंस कॉरिडोर के प्रमुख केन्द्र लखनऊ और कानपुर हैं। इनसे रक्षा उत्पादन, लॉजिस्टिक्स और भारी वाहनों को बगैर किसी रुकावट के आवाजाही हो सकेगी, इसलिए इसे डिफेंस कॉरिडोर भी कहा जाता है। इस एक्सप्रेस वे से रक्षा उद्योग के विकास को नई रफ्तार मिलेगी क्योंकि यह रक्षा सेंटर बन रहे लखनऊ और कानपुर को जोड़ता है।

इतना ही नहीं 63 किलोमीटर के इस आधुनिक ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन तकनीक से बना ये एक्सप्रेस वे पर्यावरण के भी अनुकूल है।

(साभार-x@nitingadkari)

दो पहिया वाहन को गुजरने की अनुमति नहीं

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे से कोई दुपहिया वाहन नहीं गुजर सकता। इससे सिर्फ कार, वैन और दूसरे चारपहिया वाहन ही गुजर सकते हैं। सुरक्षा के लिए यहाँ 63 हाई रिजॉल्युशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे 500 मीटर तक छोटी से छोटी चीजें भी साफ दिखाई देती हैं। इनमें से 21 कैमरे वाहनों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।

अगर इंटरचेंज करते वक्त नियमों की अनदेखी की गई तो ऑनलाइन चालान कटेगा और बगैर रोके गाड़ियों की नंबर प्लेट देखकर टोल टैक्स ले लिया जाएगा। एक्सप्रेस वे पर 24 घंटे निगरानी करने के लिए दो आधुनिक कंट्रोल रूम 27वें और 35वें किलोमीटर के दौरान बनाए गए हैं। यहाँ पर आपातकालीन सेवाएँ भी उपलब्ध हैं और ट्रैफिक मैनेजमेंट भी यहीं से होता है।

इस मार्ग पर 6 इंटरचेंज दिए गए हैं ताकि अलग अलग जगहों पर गाड़ियाँ प्रवेश कर सके और निकासी हो सके। इस दौरान पूरे 38 अंडरपास, 6 फ्लाई ओवर, 3 बड़े पुल और 28 छोटे-छोटे पुल बनाए गए हैं।

एक्सप्रेस वे पर एआई आधारित निगरानी सिस्टम लगाई गई है जिससे किसी तरह की दुर्घटना या हादसा, असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम को मिल सकेगी। इससे एम्बुलैंस तुरंत पहुँच जाएगी और बचाव-राहत कार्य आसान होगा।

कितना और कैसे कटेगा टोल टैक्स

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के बाद 14 जुलाई 2026 से यहाँ टोल टैक्स लगना शुरू हो रहा है। यहाँ कार जीप और एसयूवी के एक तरफ का टोल ₹275 रुपए जबकि 24 घंटे में वापसी पर ₹415 रुपए देने हैं। बड़ी और कमर्शियल गाड़ियों, बसों और ट्रकों को एक तरफ में 935 रुपए देना होगा। छोटे ट्रकों और व्यावसायिक वाहनों को 445 रुपए एक तरफ का टोल टैक्स देना होगा। दोपहिया वाहन तो इस पर जा ही नहीं सकते। टोल टैक्स पूरी तरह डिजिटल तरीके से देना है।

पूरे एक्सप्रेस वे पर कोई टोल प्लाजा वाला सिस्टम नहीं है, जहाँ बेरियर लगे होते हैं और एक-एक गाड़ी को टोल देकर उससे गुजरना पड़ता है, बल्कि इस एक्सप्रेस-वे पर बैरियर फ्री टोल सिस्टम है यानी कहीं रुकने की जरूरत नहीं है खुद-ब-खुद ऑटोमैटिक नंबर प्लेट एएनपीआर कैमरे से फास्टटैग के जरिए टोल कट जा रहे हैं। इससे लंबे कतारों में खड़े होने से मुक्ति मिली है। इंधन और समय की भी बचत हो रही है।

3 डी एलिवेटेड तकनीक वाला कॉरिडोर

63 किलोमीटर एक्सप्रेस वे का 18 किलोमीटर यानी करीब 30 फीसदी हिस्सा एलिवेटेड है। देश में ऐसा पहली बार प्रयोग किया गया है, जिसमें इतना लंबा हिस्सा 6 लेन एलिवेटेड बनाया गया है, यानी ये पूरा हिस्सा सिर्फ एक पिलर पर टिका हुआ है। इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों के ट्रैफिक जाम से निजात मिलेगी। अमौसी, एनएच-27 और सरोजिनीनगर जैसे इलाके अक्सर जाम रहते हैं। यह एक्सप्रेस वे इन इलाकों में एलिवेटेड है। इससे बिना सिग्नल और रुकावट के वाहन यहाँ से निकल जाएँगे। इससे रोजाना ऑफिस आने जाने वालों को काफी फायदा होगा।

बगैर ट्रेनों को बाधा पहुँचाए बना खास बोस्टिंग गर्डर

लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस वे को आधुनिक इंजीनियरिंग की मिसाल कहा जा रहा है। इसका सिस्टम 3डी ऑटोमेट मशीन गाइडेंस टेक्नोलॉजी पर आधारित है। भारत में इसका इस्तेमाल बृहत पैमाने पर पहली बार किया गया है। इस तकनीक में ग्रेडर और कंक्रीट बिछाने वाली मशीनों को जीपीएस और 3डी डिजिटल मॉडल से जुड़ा होता है। इससे किसी तरह के चूक की आशंका काफी कम हो जाती है। इसकी वजह से सड़क की फिनिशिंग इतनी शानदार और स्मूथ होती है कि गाड़ी में ग्लास में रखा हुआ पानी भी न छलके, हाई स्पीड से झटका लगना तो दूर की बात है।

उन्नाव के पास रेलवे लाइनों को पार करने के लिए एक्सप्रेस वे पर खास बोस्टिंग गर्डर का इस्तेमाल किया गया है। रेलवे ओवरब्रिज ज्यादातर कंक्रीट के पिलर पर बनते हैं, लेकिन यहाँ बेहद कम वक्त पर भारी स्टील गर्डर्स को हवा में असेंबल कर इस ब्रिज को तैयार किया गया है, ये आधुनिक आर्किटेक्चर का बेहतरीन उदाहरण है। इस निर्माणकार्य के दौरान रेलवे यातायात को किसी भी वक्त बाधा नहीं पहुँचाया गया।

लखनऊ आउटर रिंग रोड से कनेक्टिविटी

एक्सप्रेस वे को लखनऊ आउटर रिंग रोड से जोड़ा गया है जिससे कानपुर में बगैर घुसे ही लोग सीधे रायबरेली, सीतापुर, सुल्तानपुर,हरदोई जैसे इलाके तक जा सकेंगे। इससे लखनऊ में भी ट्रैफिक का दबाव कम होगा। इस इलाके में सर्विस रोड भी बनाई गई है ताकि स्थानीय स्तर पर ट्रैफिक जाम न हो।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि ये यूपी के आर्थिक विकास और देश की मजबूती का उदाहरण है। इससे व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बढ़ावा मिलेगा। इस क्षेत्र में आने वाले इलाकों के लोगों की बाजार तक पहुँच बनेगी। रोजगार के अवसर मिलेंगे और तरक्की होगी। आने वाले वर्षों में लखनऊ -कानपुर एक्सप्रेस वे यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को नई दिशा देने वाला है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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