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बादल ऐसा जिसमें नमी नहीं, बस आग ही आग होती है: यूरोप के जंगलों को धधका रहा ‘आग उगलने वाला ड्रैगन’, कैसे कहर बरपाता है ‘क्लॉउड फायर’

फायर क्लाउड आग की वजह से बनने वाला बादल है। जलवायु परिवर्तन की वजह से यूरोप में भीषण गर्मी पड़ी है। इस दौरान जंगलों में आग लगी। इससे निकलनेवाली ऊर्जा और उष्मा तेजी से वायुमंडल के काफी ऊपर चला गया। यहाँ यह संघनित होकर बादल बना और बगैर पानी वाले इस बादल ने पहले से लगी आग को और भी भयानक बना डाला।

फ्रांस-स्पेन इन दिनों अजीब तरह की आग से जूझ रहा है। दक्षिण-पश्चिम फ्रांस में फैली आग पर काबू पाना आसान नहीं रह गया है। आग फैलते हुए स्पेन के कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है। इन इलाकों से करीब 4 लाख से ज्यादा लोगों को हटा कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। जंगलों की आग ने बड़े पैमाने पर संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया है। इससे बड़ी संख्या में जानवरों के मारे जाने का खतरा पैदा हो गया है।

जंगल में लगी इस आग को पायरोक्यूमुलोनिम्बस या पायरोसीबी बादल कहते हैं। इसे आम बोलचाल की भाषा में फायर क्लाउड यानी आग का बादल कहते हैं। दरअसल यह जलवायु परिवर्तन और मौसमी बदलाव का परिणाम है।

क्या होता है फायर क्लाउड

पायरोक्यूमुलोनिम्बस या पायरोसीबी बादल एक ऐसा बादल है जो आग की वजह से पैदा होते हैं। यूरोप में इस बार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी। फ्रांस- स्पेन के कुछ जगहों पर पारा 45 डिग्री तक पहुँचा था। अत्यधिक तापमान और शुष्क मौसम की वजह से जंगलों में आग भी लगी। इन भीषण आग की वजह से काफी ऊष्मा निकली जो तेजी से गुबार के रूप में ऊपर उठी।

ये काफी ऊपर (करीब 10-15 किलोमीटर) उठने के बाद कम वायुमंडलीय दबाव की वजह से ठंडी होकर संघनित होने लगी और बादल का रूप ले लिया। ऐसे बादल बिजली गिरने या तेज हवाएँ चलने की वजह बनते हैं। इन बादलों में स्ट्रेटोस्फीयर यानी पृथ्वी की दूसरी परत समताप मंडल को भेदने की क्षमता होती है। इसलिए नासा इसे ‘आग उगलने वाला ड्रैगन क्लाउड’ कहता है।

न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रिक मैक्रे के मुताबिक, आग की लपटों के भीतर तूफान बन रहा होता है और वायुमंडल के निचली सतह से ऊपर करीब 10000 क्यूबिक किलोमीटर पर इसका असर भी काफी होता है। ऐसी जगह ठंडे होकर ये संघनित होते हैं और पायरोक्यूमुलोनिम्बस बादल का निर्माण करते हैं।

ये खुद भी बिजली पैदा कर सकते हैं और तेज हवाओं के साथ आग को और भीषण बना देते हैं। इसके कारण आग बुझाना काफी मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं ये काफी तेजी से आस-पास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लेते हैं।

अब तक कहाँ कहाँ देखी गई फायर क्लाउड

21वीं सदी की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में फायर क्लाउड दिखाई देने लगे थे। 2022 में अमेरिका के कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी भीषण आग के दौरान भी ऐस फायर बादल का निर्माण हुआ था और इसकी वजह से व्यापक तबाही हुई थी। लेकिन यूरोप में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है। इसकी वजह से वैज्ञानिक काफी चिंतित हैं।

फ्रांस का दक्षिणी पश्चिम हिस्सा फायर क्लाउड से सबसे ज्यादा प्रभावित है। बोर्डो और सौमोस के जंगलों में लगी आग ने बोर्डो शहर को अपने चपेट में ले लिया है वहीं सौमोस गाँव के ऊपर आग के बादल बन गए हैं। पेरिस के आकार से चार गुना बड़ा फायर क्लाउड गिरोंड क्षेत्र में बन गया है। इसके अलावा बिस्कारोस, फॉनटेनब्लियू का जंगल, लैंडेस, टार्न, लैकेनाउ और वार सहित फ्रांस के कई अन्य इलाके भी आग की चपेट में हैं।

स्पेन के अंदरूनी मामलों के मंत्री फर्नांडो ग्रांडे मार्लास्का ने कहा कि 27 जुलाई और 28 जुलाई 2026 आग पर काबू पाने के लिए अहम है क्योंकि 29 जुलाई से तापमान बढ़ने का अनुमान है। एविला के पहाड़ी इलाकों में अब तक की सबसे भीषण आग लगी हुई है, जिसकी वजह से 50000 हेक्टेयर भूमि राख हो चुकी है। राजधानी मैड्रिड के उत्तर पश्चिम में दो जगहों पर आग लगी हुई है इसकी वजह से 70000 हेक्टेयर भूमि जल गई है। इस साल लगी आग पिछले साल से 6 गुणा से ज्यादा है।

दरअसल दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन की स्थिति ने मौसमी सिस्टम को बदल दिया है। यूरोप में गर्मी आम तौर पर सुहाना हुआ करता था। घरों में लोग एसी नहीं लगाते थे, लेकिन इस साल रिकॉर्डतोड़ गर्मी ने सबको बेहाल कर दिया। इसकी वजह से ऐसी परिस्थितियाँ पैदा हुई, जिससे पायरोक्यूमुलोनिम्बस क्लाउड का निर्माण हुआ। इससे वायुमंडल में बदलाव, मौसम में बदलाव और दूसरे बदलाव भी हो रहा है। मई महीने में यूरोप में बारिश होती है लेकिन इस बार बारिश की कमी से वन क्षेत्र शुष्क पड़े हैं।

मौसम विशेषज्ञ मैक्रे के मुताबिक, जल्द ही फ्रांस में गर्मी का एक और दौर शुरू हो सकता है। इसमें फिर तापमान 40 डिग्री तक पहुँच सकता है।

क्यों खतरनाक होते हैं आग के बादल

फायर क्लाउड को कंट्रोल करना धरती पर लगी किसी भी आग से ज्यादा मुश्किल है। इतना ही नहीं ये ज्यादा विनाशकारी भी होता है। क्योंकि आग ही उष्मा ही संघनित होकर बादल बनते हैं इसलिए कहा जा सकता है कि ये अपना खुद का मौसम तंत्र विकसित कर लेता है और किसी भी चीज को जला सकता है।

ये बादल काफी शक्तिशाली होते हैं और तेज हवा होने पर उसकी दिशा में जल्दी फैलते हैं यहाँ तक कि बिजली कड़कने का कारण भी बनते हैं यानी बगैर बारिश के बिजली गिरती है। ये बादल काफी बड़ा होता है इसलिए इससे पैदा होने वाली बिजली का दायरा भी काफी बड़ा होता है। यही वजह है कि दूर दराज के इलाके में बेवजह इसके गिरने से आग लग जाती है। इस दौरान अगर तेज हवाएँ चल रही हों, तो आग के लिए यह इंधन का काम करता है।

इन बादलों से लगने वाली आग का पैटर्न इतना अलग और अप्रत्याशित होता है कि इसको कंट्रोल करने की मानवीय क्षमता कम पड़ जाती है। दमकलकर्मियों के पास चाहे जितना ही अत्याधुनिक अग्निशमन साधन उपलब्ध हों, इन पर कंट्रोल करना नामुमकिन-सा होता है। ऐसे में आसपास के लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट करना ही एकमात्र उपाय रह जाता है।

हालाँकि पायरोक्यूमुलोनिम्बस या फायर क्लाउड काफी दुर्लभ मौसमी घटना है, लेकिन 4 सालों के अंदर अमेरिका- कनाडा से लेकर यूरोप तक में देखा गया। ये पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन हर देश को किसी न किसी रूप में प्रभावित कर रही है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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