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PM मोदी की 4 REEL के पीछे छिपे सरकार के 4 बड़े एक्शन: 1 हफ्ते में पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट से लेकर नए बिल तक, जानें क्या-क्या हुआ

फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान, परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन, CBI की चार्जशीट दाखिल होना और फिर पेपर लीक रोकने वाले कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधन विधेयक संसद से पास कराना… पीएम मोदी की 4 इंस्टा रील के पीछे सरकार के 4 बड़े एक्शन।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले एक हफ्ते में इंस्टाग्राम पर लगातार चौथी सेल्फी-स्टाइल रील (Reel) पोस्ट की है। आमतौर पर किसी प्रधानमंत्री का इतने कम समय में लगातार सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से संवाद का विषय बनता है। लेकिन इस बार सिर्फ रीलें ही चर्चा में नहीं हैं, बल्कि उन 4 रील के पीछे दिख रहे सरकार के 4 बड़े एक्शन भी हैं। खासकर NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार ने पिछले एक हफ्ते के भीतर जिस तेजी से फैसले लिए हैं, उस पर भी नजर डालनी चाहिए।

फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान, परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन, CBI की चार्जशीट दाखिल होना और फिर पेपर लीक रोकने वाले कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधन विधेयक संसद से पास कराना… एक के बाद एक कई बड़े कदम उठाए गए।

इन सभी फैसलों की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समय-समय पर इंस्टाग्राम रील के जरिए देश के युवाओं तक पहुँचाई। अब चौथी रील में पीएम मोदी ने अब तक हुई कार्रवाई का पूरा अपडेट देते हुए भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था बनाने की दिशा में सरकार की आगे की रणनीति भी बताई।

उन्होंने कहा कि टास्क फोर्स बनाई गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जा रही है, राज्यों के सुझाव लिए जा रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में टेक्नोलॉजी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संसद के दोनों सदनों में व्यापक चर्चा के बाद पेपर लीक से जुड़े विधेयक को भी मंजूरी मिल चुकी है और अब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक माफियाओं पर पहले से ज्यादा सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

पहली रील में GenZ युवाओं से फास्ट ट्रैक कोर्ट का वादा

जब NEET पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में प्रदर्शन तेज हो रहे थे, उस माहौल में पीएम मोदी ने पिछले हफ्ते आधी रात को इंस्टाग्राम पर अपनी पहली सेल्फी-स्टाइल रील जारी की। उन्होंने युवाओं को ‘मेरे दोस्तों’ कहकर संबोधित किया और कहा कि जिन लोगों ने मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, उन्हें किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।

इस रील को 24 घंटे से भी कम समय में 300 मिलियन से ज्यादा लोगों ने देखा।

इसी वीडियो में उन्होंने सबसे बड़ा ऐलान किया कि पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएँगे। इस फास्ट ट्रैक कोर्ट में दिल्ली हाई कोर्ट के जज अनु ग्रोवर बलीगा को विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। सरकार का मानना है कि अभी ऐसे मामलों में जाँच और मुकदमे लंबे समय तक चलते हैं, जिससे अपराधियों के मन में कानून का डर कम हो जाता है। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने के बाद ऐसे मामलों की सुनवाई तेजी से होगी और दोषियों को जल्द सजा मिल सकेगी।

बता दें कि फास्ट ट्रैक कोर्ट सामान्य अदालतों से अलग होते हैं। इन्हें किसी खास या गंभीर मामलों की जल्द सुनवाई के लिए बनाया जाता है। इससे सरकार बताना चाहती है कि पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों में अगर फैसला जल्दी आएगा तो भविष्य में ऐसे गिरोहों पर प्रभावी रोक लग सकेगी। यही वजह है कि सरकार ने इसे परीक्षा में सुधार की दिशा में पहला बड़ा कदम भी बताया।

दूसरी रील में युवाओं का किया धन्यवाद

पहली रील को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और उस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इसके बाद अगले ही दिन प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरी इंस्टाग्राम रील पोस्ट की। इस वीडियो में उन्होंने किसी नई योजना का ऐलान नहीं किया, बल्कि युवाओं को पहले वीडियो पर मिले समर्थन के लिए धन्यवाद कहा।

इस दौरान उन्होंने एक बार फिर GenZ युवाओं को ‘मेरे दोस्त’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताओं को सरकार गंभीरता से सुन रही है और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से भरोसा बनाए रखने की अपील भी की और कहा कि सरकार केवल बयान नहीं दे रही, बल्कि लगातार कार्रवाई भी कर रही है।

तीसरी रील में हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का ऐलान

फास्ट ट्रैक कोर्ट के ऐलान के तीन दिन बाद प्रधानमंत्री मोदी ने तीसरी इंस्टाग्राम रील जारी की। इस बार उनका फोकस सिर्फ दोषियों को सजा दिलाने पर नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में सुधार करने पर था।

प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली की समीक्षा और उसमें सुधार के लिए एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के पूर्व प्रमुख नंदन नीलेकणी को सौंपी गई है। इसमें शिक्षा, तकनीक, साइबर सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।

इस टास्क फोर्स का काम केवल पेपर लीक की जाँच करना नहीं है। इसका उद्देश्य पूरी परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करना, कमजोर कड़ियों की पहचान करना, डिजिटल सुरक्षा बढ़ाना, प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाना और भविष्य के लिए ऐसे सुझाव देना है, जिनसे पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम हो सके।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी तीसरी रील में कहा कि सरकार अब केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना चाहती है जिसमें भविष्य में किसी भी छात्र का भविष्य पेपर लीक माफिया की वजह से खतरे में न पड़े।

CBI की चार्जशीट ने जाँच को निर्णायक मोड़ पर पहुँचाया

इसी बीच NEET पेपर लीक मामले की जाँच कर रही CBI ने भी कार्रवाई तेज कर दी। सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार के फैसले लिए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ जाँच एजेंसी अदालत में सबूत पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही थी।

CBI ने NEET पेपर लीक मामले में अपनी चार्जशीट दिल्ली की राउड एवेन्यू कोर्ट में दाखिल करते हुए 13 आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निरोधक कानून और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े कानून की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए। जाँच एजेंसी ने अदालत को बताया कि यह कोई सामान्य नकल का मामला नहीं था, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए प्रश्नपत्र लीक करने, उसे अभ्यर्थियों तक पहुँचाने और इसके बदले मोटी रकम वसूलने की साजिश रची गई थी।

CBI की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से दाखिल चार्जशीट में 360 गवाहों के बयान, 422 महत्वपूर्ण दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है। जाँच एजेंसी के अनुसार, डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेखन विशेषज्ञों की राय और विषय विशेषज्ञों की जाँच से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र का अवैध रूप से प्रसार किया गया था।

चार्जशीट में कुल 13 लोगों को आरोपित बनाया गया है। इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े बायोलॉजी विशेषज्ञ मनीषा मंधारे, केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवालदार के अलावा कई बिचौलिए शामिल हैं। आरोपितों में यश यादव, मंगलिलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम माधुकर खैरनार, धनंजय निवृत्ति लोखंडे, मनीषा संजय वाघमारे और डॉ मनोज भगवानराव शिरुरे के नाम भी हैं।

संसद से पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल

मामले में जाँच के साथ-साथ सरकार ने भविष्य के लिए भी ठोस कदम उठाए। केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 संसद में पेश किया। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में इस पर चर्चा हुई और बाद में इसे पारित कर दिया गया।

इस संशोधित विधेयक में पेपर लीक जैसी गंभीर अपराधों को लेकर, अधिनियम की धारा 10 के तहत अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए न्यूनतम सजा 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी जाएगी, जबकि अधिकतम सजा 10 वर्ष तक हो सकेगी। इसके साथ ही दोषियों पर अधिकतम 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता एजेंसियों के लिए अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दिया गया है। साथ ही सार्वजनिक परीक्षाएँ आयोजित करने से प्रतिबंधित किए जाने की अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी जाएगी।

अगर किसी सेवा प्रदाता संस्था के निदेशक या जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें भी कम से कम 5 वर्ष की कैद होगी, जो पहले 3 वर्ष थी, और उन पर 5 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं धारा 11 के तहत संगठित अपराध के मामलों में न्यूनतम सजा 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष कर दी जाएगी। जबकि न्यूनतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए कर दिया जाएगा।

एक हफ्ते में सरकार के ताबड़तोड़ फैसले

अगर पिछले एक हफ्ते के घटनाक्रम को क्रमवार देखा जाए तो साफ दिखाई देता है कि सरकार ने NEET पेपर लीक मामले पर अलग-अलग स्तरों पर कार्रवाई की। सबसे पहले छात्रों से सीधे संवाद किया गया और फास्ट ट्रैक कोर्ट का ऐलान हुआ। इसके बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाई गई। इसी दौरान CBI ने अपनी जाँच को आगे बढ़ाते हुए चार्जशीट दाखिल की। फिर संसद ने संशोधित एंटी पेपर लीक विधेयक को मंजूरी दी और आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौथी इंस्टाग्राम रील के जरिए इन सभी कदमों को जोड़ते हुए देश के युवाओं को सरकार की पूरी कार्ययोजना बताई।

यानी पिछले एक हफ्ते में सरकार की रणनीति केवल बयान देने तक सीमित नहीं रही। एक तरफ जाँच एजेंसियाँ कार्रवाई करती रहीं, दूसरी तरफ परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए संस्थागत बदलाव किए गए और साथ ही कानून को भी पहले से ज्यादा सख्त बनाने की दिशा में कदम उठाए गए। यही संदेश प्रधानमंत्री की चारों इंस्टाग्राम रील में भी लगातार दिखाई देता है।

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