‘सारे आरोप झूठे, मनगढ़ंत और राजनीतिक रूप से प्रेरित’: महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न केस में बृजभूषण शरण सिंह बरी, जानिए दिल्ली कोर्ट ने फैसले में क्या कहा

पिछले तीन साल से चल रहे महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न केस में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया गया है। यह फैसला दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिया। इस दौरान अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने उनके साथ WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी राहत दी।

कोर्ट ने अपने आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि केस में लगाए गए सभी आरोप ‘झूठे, मनगढ़ंत और राजनीतिक रूप से प्रेरित एक गहरी साजिश’ का हिस्सा प्रतीत होते हैं।
अदालत ने माना कि ये सभी आरोप रोहतक स्थित ‘महादेव अकादमी’ के कोचों, एक महिला पहलवान और एक पुरुष पहलवान के इशारे पर एक गहरी राजनीतिक साजिश के तहत गढ़े गए थे।

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि कि शिकायत दर्ज कराने में लंबा समय लिया गया। विरोध प्रदर्शन से पहले ऐसी किसी यौन उत्पीड़न की घटना का जिक्र नहीं था। बाद में 21 अप्रैल 2023 को एक समान पैटर्न और बनावटी भाषा में तैयार की गई शिकायतें पुलिस को दी गईं, जो पहले से सिखाई-पढ़ाई और प्रायोजित किस्म की लगती हैं।

बृजभूषण शरण सिंह केस में अदालत ने क्या कहा

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी आरोपों, गवाहों के बयानों, घटना के समय की परिस्थितियों, घटना के बाद शिकायतकर्ताओं के व्यवहार, बयानों में किए गए बदलावों और आपसी विरोधाभासों को गहराई से परखने के बाद, उन महिला पहलवानों के बयानों को सबसे ज्यादा विश्वसनीय माना जो बाद में अपने शुरुआती आरोपों से पीछे हट गईं।

उन्होंने ही अदालत को बताया था कि उन पर कुछ अन्य पहलवानों और कोचों के इशारे पर झूठे बयान देने का भारी दबाव बनाया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका जिससे यह लगे कि इन गवाहों ने आरोपित के किसी दबाव में आकर बयान बदले हैं।

अदालत ने अपने आदेश में कहा:

“यह बात कहने के लिए मुझे इस तथ्य से बल (ताकत) मिलता है कि जिन पाँच पीड़ित पहलवानों के आरोपों पर आरोपितों के खिलाफ केस तय हुआ था, उनमें से दो ने अदालत में अभियोजन पक्ष (पुलिस) का समर्थन नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें PW-5 (एक मुख्य महिला पहलवान) और PW-10 (उसका पति) के कहने पर दबाव डालकर बयान देने के लिए मजबूर किया गया था। वहीं, अभियोजन पक्ष ऐसा कोई भी सबूत पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो कि इन दो पीड़ितों ने आरोपी के किसी दबाव या डर की वजह से अपना बयान बदला हो।”

अदालत ने यह भी गौर किया कि ये कथित घटनाएँ उस समय की बताई गईं जब खिलाड़ी किसी न किसी टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे थे- यानी ऐसी जगहों पर जहाँ परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों की भारी भीड़ मौजूद रहती थी।

बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने राहत जताते हुए कहा कि वे पहले दिन से कह रहे थे कि अगर आरोप सच निकले तो वे फाँसी पर लटक जाएँगे और आज का फैसला उनके व समर्थकों के लिए बड़ी जीत है। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता पहलवानों की वकील रिबेका जॉन ने इस फैसले को बेहद निराशाजनक बताया है।

2023 में पहलवानों का प्रदर्शन और आगे कार्रवाई

गौरतलब है कि इस मामले की शुरुआत जनवरी 2023 में हुई, जब विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जैसे शीर्ष पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया। मंत्रालय द्वारा जाँच समिति गठित होने पर आंदोलन रुका, लेकिन कार्रवाई न होने की बात कहकर अप्रैल 2023 में इन पहलवानों ने फिर हंगामा किया। इस दफा सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

मई 2023 में आंदोलन उग्र हो गया। पुलिस से झड़पें हुईं और 28 मई को नए संसद भवन की ओर मार्च करने पर पहलवानों को हिरासत में लेकर धरना स्थल खाली करा दिया गया। इसके बाद कुछ पहलवानों ने अपने अंतरराष्ट्रीय पदक गंगा में बहाने के नाम पर सुर्खियाँ बटोरीं, लेकिन बाद में सामने आया कि ऐसा कुछ हुआ नहीं।

जून में पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल होने पर सड़क का प्रदर्शन खत्म हुआ। लंबी सुनवाई में दो शिकायतकर्ता पहलवान मुकर गईं और उन्होंने दबाव में झूठा बयान देने की बात कबूली, जिसके बाद अदालत ने बृजभूषण को बरी कर दिया।