भरत तिवारी एनकाउंटर केस में SDM-SDPO समेत 11 के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, पीड़ित माँ ने कहा- ‘सबको फाँसी की सजा हो तब मिलेगी कलेजे को ठंडक’

भरत तिवारी एनकाउंटर केस में आरा सिविल कोर्ट ने 11 आरोपितों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। इसमें तत्कालीन जगदीशपुर एसडीएम, एसडीपीओ और शाहपुर थानाध्यक्ष शामिल हैं। मामले की सुनवाई करते हुए सीजेएम ने भोजपुर के एसपी को 12 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होने का आदेश दिया है।

इस मामले में पुलिसवालों पर एक्शन को देखते हुए भरत तिवारी की माँ का कहना है कि उन्हें अब न्याय की आस जगी है। उनका कहना है कि दोषियों को फाँसी की सजा हो, ताकि उनके दिल को ठंडक पहुँचे, क्योंकि उनके साथ पुलिसवालों ने ही अन्याय किया।

घटना के सात दिन बाद मृतक की माँ की शिकायत पर शाहपुर थाना में हत्या का मामला दर्ज किया गया। इस FIR में आरा के तत्कालीन SDPO, शाहपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया था।

क्या है भरत तिवारी मामला

बिहार के भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के 26 साल के युवक भरत भूषण तिवारी की 17 जून 2026 को कथित पुलिस एनकाउंटर के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई।

भोजपुर के एसपी की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, “पुलिस टीम ने खुद और लोगों की सुरक्षा के लिए गोली चलाई थी, जो भरत भूषण के पांव में लगी।”

लेकिन घटना और पुलिस के दावे अलग अलग थे। प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “भरत तिवारी ने हम लोगों के सामने हथियार फेंका, जिसके बाद पुलिसवालों ने दौड़कर उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद कुछ दूर तक उन्हें ले गए और उन्हें गोली मार दी। हम लोगों ने देखा था कि उन्हें तीन गोलियाँ मारी गई है। अब डॉक्टर 5 गोली लगने की बात कह रहे हैं, तो भरत तिवारी को रास्ते में पुलिसवालों ने 2 और गोली मारी होगी।”

बिलौटी गाँव के लोगों का कहना था कि भरत को पुलिस ने उनके सामने तीन गोलियाँ मारी। गाँववालों ने कहा कि भरत तिवारी उनके लिए भगवान के समान थे।

इस मुठभेड़ पर सवालों के बीच लोग आक्रोशित हो गए और 18 जून 2026 को भरत के शव को हाईवे पर रखकर हंगामा किया गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने एनएच-922 जाम कर दिया था और इसके बाद खूब बवाल हुआ, पुलिस को लाठी तक चलानी पड़ी।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि इस हंगामे को लेकर दो FIR दर्ज की ग, जिनमें एक में भरत के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपित बनाया गया। उन पर हथियार रखने और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए। वहीं, हंगामे-सड़क जाम को लेकर 14 नामजद सहित 50 से अधिक अज्ञात लोगों पर दूसरी FIR दर्ज की गई।

सीएम सम्राट चौधरी ने घटना की जाँच का आदेश दिए और घटना पर हंगामा बढ़ने के बाद शाहपुर थाना प्रभारी राजेश कुमार मलाकार समेत कई सिपाहियों को निलंबित कर दिया। इस मामले पर सुनवाई करते हुए आरा सिविल कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।