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8 साल के उच्चतम स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग ऐक्टिविटी, अर्थव्यवस्था में जल्द तेजी आने के संकेत

"जनवरी में विनिर्माण पीएमआई के उच्च स्तर पर रहने की अहम वजह माँग में सुधार होना है। इसकी वजह से नए ऑर्डर मिलने, उत्पादन, निर्यात और विनिर्माण के लिए खरीदारी और रोजगार में बढ़त देखी गई है।"

नए साल के पहले महीने में देश की आर्थिक सुस्ती दूर होने के संकेत मिले हैं। जानकारी के मुताबिक भारत की मैन्‍युफैक्‍चरिंग एक्टिविटी जनवरी में लगभग 8 वर्षों में सबसे तेज गति से आगे बढ़ी है। दरअसल नए ऑर्डर्स मिलने और आउटपुट में मजबूत वृद्धि की वजह से यह उछाल आया है। एक प्राइवेट सर्वे में सोमवार (फरवरी 3, 2020) को यह बात सामने आई। सर्वे में बताया गया है कि अर्थव्यवस्था फिर से मजबूत हो रही है। बिक्री में वृद्धि के बाद कारखानों ने बहुत तेजी से नए वर्कर्स को काम पर रखा है। यह पिछले सात साल में वर्कर्स को काम पर रखने की सबसे तेज गति है।

बताया जा रहा है कि अगर मौजूदा स्थिति बरकरार रहती है तो आने वाले कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार दिखने लगेगा। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने पिछले महीने अपने पोल में इस बात की जानकारी दी थी कि अगर लगातार ऐसी स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। बता दें कि जुलाई-सितंबर की तिमाही में वृद्धि छह साल के निचले स्तर पर आ गई थी।  

IHS मार्किट की ओर से कंपाइल्ड निक्केई मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स जनवरी में 55.3 अंक रहा है।  यह 2012 से 2020 की अवधि में इसका सबसे ऊँचा स्तर है। इससे पहले दिसंबर में यह 52.7 अंक था। साल भर पहले जनवरी 2019 में यह आँकड़ा 53.9 अंक था। यह लगातार 30वाँ महीना है जब मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 50 अंक से ऊपर रहा है।

IHS मार्केट की प्रमुख अर्थशास्त्री पॉलियेना डि लीमा ने कहा, “जनवरी में भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ में मजबूती लगातार बनी हुई है। पिछले 8 सालों में उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।” उन्होंने कहा कि जनवरी में विनिर्माण पीएमआई के उच्च स्तर पर रहने की अहम वजह माँग में सुधार होना है। इसकी वजह से नए ऑर्डर मिलने, उत्पादन, निर्यात और विनिर्माण के लिए खरीदारी और रोजगार में बढ़त देखी गई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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